युवराज पंवार ने 98.86 प्रतिशत के साथ किया टॉप

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JEE Main 2020

सिरसा (Sach Kahoon News)। एनटीए ने जनवरी सत्र के लिए जेईई मेन 2020 रिजल्ट घोषित कर दिया है। जिसमें सिरसा जिला के डबवाली उपमंडल के गांव अबूबशहर निवासी अधिवक्ता राजाराम पंवार के बेटे युवराज पंवार ने 98.86 व मुन्नावाली के मिस्त्री श्योपतराम के बेटे प्रवीण ने 98.12 व नागोकी के टीवी रेडियो मकैनिक हरीश शर्मा के बेटे कुलदीप ने 93.3 पर्सेंटाइल के साथ परीक्षा पास की है। तीनों विद्यार्थी वर्तमान में रेवाड़ी में विकल्प फाउंडेशन के विकल्प इंस्टिट्यूट में बाहरवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे है।

डबवाली उपमंडल के गांव अबूबशहर निवासी युवराज पंवार ने जेईई मेन 2020 में 98.86 पर्सेंटाइल लेकर जिलाभर में उपरोक्त परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। युवराज के पिता राजाराम पंवार डबवाली कोर्ट में अधिवक्ता है तो उनकी माता सुनीता गृहणी है। राजाराम के दो बेटे है। जिनमें युवराज बड़ा है, जबकि उसका छोटा भाई आरोही मॉडल स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। युवराज वर्तमान में रेवाड़ी में विकल्प फाउडेशन में बाहरवीं कक्षा की पढ़ाई के साथ जेईई मेन की तैयारी कर रहा है।

मोबाइल की दूनिया से दूर रहा युवराज

युवराज की मैट्रिक की पढ़ाई भी आरोही मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल कालुआना से की है। युवराज के पिता राजाराम पंवार ने बताया कि युवराज हमेशा से मोबाइल की दूनिया से दूर रहा है तथा लैपटॉप भी उनके पास नही है। उन्होंने बताया कि युवराज की इस सफलता के पीछे उनके दादा जय नारायण पंवार की परिश्रम है। क्योंकि वह गांव में नहीं बल्कि ढाणी में रहते है। हर रोज स्कूल तक छोडऩा और स्कूल से घर लेकर आना, यह सब कार्य उनके दादा ही करते थे।

युवराज के पिता का कहना है कि युवराज का इंजीनियर बनने की इच्छा मैट्रिक की पढ़ाई से पूर्व ही थी। इसलिए उसने इस कैरियर को चुना। मिस्त्री के बेटे ने पास की जेईई मेन परीक्षा रामामंडी रिफाइनरी में लौहे के मिस्त्री का कार्य करने वाले श्योपतराम के एक लड़का प्रवीण व एक पांच साल की बेटी मुस्कान है। परिवार में कोई भी इंजीनियर होना तो दूर की बात है, उन्हें इस शब्द का भी पूरा पता नहीं है। परिवार खेती-बाड़ी करके अपना गुजारा करता है। प्रवीण की माता जोकि एक गृहणी है, ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए बताया कि उन्हें प्रवीण की शानदार उपलिब्ध पर इतनी खुशी हो रही है कि उसे लिख-बोलकर ब्यान नहीं कर सकती।

घर आने के पश्चात कामों में बंटाता था हाथ

सरोज ने बताया कि सुबह सबसे पहले प्रवीण ने उन्हें फोन करके रिजल्ट के बारे में बताया और उसने मेरे अलावा अपने पापा श्योपतराम, दादी शांति देवी व छोटी बहन मुस्कान के साथ भी अपनी खुशी सांझा की थी। उन्होंने फोन पर ही उसे बधाई दी है। उन्होंने बताया कि वह मैट्रिक तक तो सिर्फ स्कूल में ही पढ़ाई करता था। घर आने के पश्चात तो उनके कामों में हाथ बंटाता था। लेकिन रेवाड़ी में वह मध्य रात्री तक पढ़ाई करता है, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। माता सरोज ने बताया कि प्रवीण कहता था कि वह एक बड़ा इंजीनियर बनना चाहता है ताकि वह अपने माता-पिता को दिहाड़ी मजदूरी से मुक्ति दिला सकें।

इलेक्ट्रिशियन के बेटा ने परीक्षा की पास

गांव नागोकी के कुलदीप पुत्र हरीश शर्मा ने भी यह परीक्षा पास की है। कुलदीप के इलेक्ट्रिशियन है। जबकि उसके दादा अमित चंद शर्मा नॉन मेडिकल के विद्यार्थी रहे हैं। दादा की प्रेरणा से ही कुलदीप ने पढ़ाई की और यह मुकाम पाया है।

 

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