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Friday, January 30, 2026
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    जैसा कर्म करोगे वैसा फल भोगना पड़ेगा

    You will have to suffer the way you do
    सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान आज के स्वार्थी दौर में उलझा हुआ है, जब तक इन्सान के अंदर का स्वार्थ नहीं जाता, तब तक वह मालिक की खुशियों का हक्कदार नहीं बन सकता। इन्सान अपने दिलो-दिमाग से काम नहीं लेता यानि दिलो-दिमाग में जब तक कचरा भरा हुआ है, बुराइयां भरी हैं, तब तक आत्मा और परमात्मा में बहुत सी दीवारें खड़ी रहती हैं।

    पहले इन्सान मानता नहीं और बाद में पश्चाताप के अलावा कुछ मिलता नहीं

    पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि यदि आप मालिक की खुशियां हासिल करना चाहते हो, अगर उसकी दयामेहर, रहमत को हासिल चाहते हो तो वचन सुनकर अमल किया करो। पहले इन्सान मानता नहीं और बाद में पश्चाताप के अलावा कुछ मिलता नहीं। फकीर कोई अपने लिए वचन नहीं करते, किसी को बद्दुआ नहीं देते, लेकिन उनका काम लोगों को सचेत करना है। जैसे डॉक्टर बता देते हैं कि आप यह कर्म करोगे तो यह दु:ख आएगा, ये करोगे तो ये आएगा। इतने परहेज रखने होंगे, इतनी दवाई लेनी होगी। अगर आप मान लेते हैं तो बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है, नहीं मानते तो वह घातक हो जाती है। उसी तरह संतों के वचन होते हैं, मान लो तो खुशियां ही खुशियां हैं, नहीं मानते तो एक दिन पछताना पड़ता है जिसका कोई ईलाज नहीं मिलता। बहुत बार ऐसा होते देखते हैं, लेकिन कोई परवाह नहीं करता। कहते हैं कि जो बबूल का पेड़ बोएगा, आम उस पर कभी नहीं लग सकते। उस पर तो सूलें ही लगेंगी। कहने का मतलब है कि जैसा कर्म करोगे वैसा भोगना ही पड़ेगा। यह आपके हाथ में है कि कर्म कैसे करते हैं, कर्मों का फल हर जीव को जरूर भोगना पड़ता है। इसलिए बुरे कर्म मत किया करो। अच्छे कर्म करो, आप दुनिया से छुपाते हैं, अल्लाह-राम से छुप कर करते हो और दिखावा करते हैं भक्तों का, वो सब जानता है। पल-पल की खबर उसे होती हैं, इसलिए बुरे कर्मों से परहेज करो। अच्छे-नेक कर्म करो, ताकि मालिक की तमाम खुशियां आपको मिलें और अंदर-बाहर से आप मालामाल हो जाएं।
    इन्सान की आदत है कि किए गए रहमोंकर्म को भूला देता है और जो पापकर्म आने वाले हैं उनकी तरफ से बेफिक्र हो जाता है। जो बोझ उठाना है उसकी तरफ ध्यान नहीं रहता और पीर-फकीर के वचनों को नजरअंदाज करता रहता है। ऐसे इन्सान को अपने कर्मों से एक ना एक दिन दो-चार होना पड़ता और फिर संत, पीर, फकीर को दु:ख लगता है, इसके ऐसे कर्म आने वाले हैं, इसलिए वह समझाते रहते हैं। अब अगर इन्सान माने ही ना तो यह उसकी गलती है। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि वचन सुनकर मानो, अमल करो ताकि उसकी दया-मेहर के काबिल बनो और उसकी मूसलाधार रहमत आप पर बरसती रहे।

     

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