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हृदय दिवस से सीखें अपना दैनिक जीवन

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29 सिंतबर को पुरी दुनिया में हृदय दिवस के रुप में मनाया जाता है। आज यह रोग समूचे विश्व में एक गंभीर समस्या बन चुका है।’विश्व हृदय दिवस’ के माध्यम से पूरे विश्व के लोगों में इसके बारे में जागरूकता फैलाई जाती है। यदि हम अपने देश के परिवेश में इस रोग की बात करें तो एक सर्वे के अनुसार करीब 11 करोड़ लोग इसकी चपेट में हैं। दरअसल मामला यह है कि पिछले तीन देशकों में मनुष्य नें अपना सर्वनाश स्वयं करना शुरू कर दिया। आज हम शहरीकरण के चक्कर में प्रकृति का नाश करते हुए सुविधाओं से इतने घिर चुकें कि हमारा शरीर बिल्कुल भी संचालित नहीं होता। हमें हर चीज में आॅटोमैटिक भाने लगा। पिछले कुछ वर्षों से तो इस तरह की नई बीमारियां जन्म ले रही हैं जिनके बारे में न कभी देखा और नही सुना जिस वजह से देश के सभी सरकारी व प्राइवेट हॉस्पिटल भरे रहने लगे। हृदय रोग ऐसी बीमारी बन चुकी जो किसी भी उम्र के व्यक्ति हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार हृदय रोग की समस्या पिछले चार दशकों 300 फीसदी बढ़ गई हैं। छाती में असहज महसूस होना, नोजिया, हार्टबर्न और पेट व हाथ में दर्द होना, कई दिनों लगातार तक कफ होना, पसीना आना, पैरों में सूजन, हाथ-कमर और जांघ में दर्द होना, चक्कर आना या सिर घूमना, सांस लेने में दिक्कत आना आदि तमाम ऐसी स्थिति से पता चल जाता है कि इस रोग की शुरूआत हो चुकी। और यह सबसे ज्यादा उन लोगों को होता है जो निष्क्रिय जीवन शैली, अत्यधिक तनाव, हाइपरटेंशन, शुगर, अधिक धूम्रपान, मोटापा, वसायुक्त भोजन व इसके अलावा जिनका कोलेस्ट्रोल, ट्राईग्लिसराइड और वीएलडीएल, एलडीएल के शिकार होते हैं। हमारे देश के लोगों की एक अद्भूत विडंबना यह है कि जब तक पानी सिर से ऊपर न निकल जाए तब तक हमें किसी इलाज के लिए तैयार नहीं होते। हमें इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए कि हमें अपने शरीर का ध्यान रखना बेहद जरुरी हैं क्योंकि किसी रोग लगने से यदि कोई ज्यादा बीमार हो जाए या उसकी मृत्यु हो जाए तो उसके परिवार की जिंदगी अर्थहीन सी हो जाती है।

कई बार सोचकर आश्चर्य होता है कि हमारे देश से निकले योग को पूरा विश्व स्वीकार कर चुका है लेकिन हमें इसकी गंभीरता को समझने को क्यों असफल हो रहे हैं। भारत ने योग को विश्व स्तरीय पहचान दिलाने के लिए पूरे विश्व में 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया लेकिन हमारे देश में कुछ नासमझ इंसान इसका मजाक तक उडाते हैं और कुछ इसे धर्म के चश्में से तक देखते हैं। दरअसल एक पुरानी कहावत भी है कि ‘जो चीज इंसान को आसानी से मिल जाती है तो वह उसकी क्रद नही करता’। पूरे विश्व में योग को लोगों ने अपने जीवन में उतारकर स्वास्थय की दिशा की ओर चल पड़े, पूरे दिन में साठ मिनट यानि एक घंटा अपने शरीर को जरुर दीजिए जिससे किसी बीमारी के चपेट में न आ जाए। जिसने भी अपने जीवन में करसत या योग को शामिल कर लिया वो अपना जीवन सुचारु रुप से संचालित कर रहा

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