खून बिन जाने न देंगे जिंदगी

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  • दुनियाभर में रक्तदान की अलख जला रहा डेरा सच्चा सौदा
  • अब तक 5 लाख 60 हजार यूनिट से अधिक रक्त मानवता को समर्पित

वक्त जिंदगी का आधार है। हवा ना मिले तो इंसान मर जरूर जाता है लेकिन अगर रक्त का प्रवाह और बनने की प्रणाली काम करना बंद कर दे तो इंसान की मौत और भी दर्दनाक होती है। जिंदगी का यह अनमोल रत्न भगवान ने हर किसी के अंदर प्रवाहित किया है लेकिन कभी एक्सीडेंट तो कभी किसी बीमारी की चपेट में आकर अक्सर लोग खून की कमी की वजह से दम तोड़ देते हैं। कई बार जिंदगी के दीपक सिर्फ इसलिए बुझ जाते हैं क्योकि उन्हें कुछ यूनिट खून नहीं मिल पाता।

मानवता भलाई कार्यों में अग्रणीय सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा भी दुनिया को नियमित रक्तदान के प्रति जागरूक करता आ रहा है। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए दुनिया के कोने-कोने में बैठी डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत नियमित रक्तदान कर रही है। इन चलते-फिरते ब्लड पंपों रक्तदाताओं ने दुनियाभर में अब तक अपने ख्ूान से लाखों जरूरतमंदों व बीमारों के जीवन की तकदीर लिखी है।

समय-समय पर भारतीय सेना के साथ-साथ पत्रकारों, पुलिस कर्मियों, थैलेसीमिया व एड्स रोगियों के अलावा देश और दुनियाभर में जरूरतमंद लोगों को रक्त की आपूर्ति करने में विश्वविख्यात डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा अब तक 5 लाख 60 हजार से ज्यादा यूनिट रक्तदान किया जा चुका है। इसके अलावा साध-संगत अपने ब्लॉकों व गांवों में जो रक्तदान करती है, वह इस आंकड़े से अलग है।

World Blood Donor Day

कोविड-19 महामारी के बीच जब ब्लड बैंक खून की भारी कमी से जूझ रहे थे और थैलेसीमिया सहित विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीजों का जीवन संकट में पड़ा तो सरकार की अपील पर डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने बिना देरी किए विभिन्न ब्लड बैंकों में रक्तदान करके इन मरीजों को नया जीवन देने का काम किया।  वहीं साध-संगत अपने शहरों, ब्लॉकों व गांवों में आज भी निरंतर जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान कर रही है।  इस सबके पीछे जो प्रेरणा कार्य कर रही है, वो है पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां। 

एक-दो नहीं, लाखों मिसालें हैं यहां

शादी वाले दिन रक्तदान, कोई अपना इस दुनिया से चला चला जाए तो रक्तदान। शादी की सालगिरह हो या हो बच्चे का जन्मदिन। मानवता के ये सच्चे प्रहरी इन अवसरों पर तो रक्तदान करते हैं ही साथ ही कोई नियमित रक्तदान का प्रण लेता है तो कोई जीते जी गुर्दादान व मरणोपरांत आंखेंदान का। डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों में यह जज्बा कोई नया नहीं है। मानवता के ये सच्चे प्रहरी हर सु:ख-दुख के मौके पर भी मानवता भलाई करना नहीं भूलते।

….ताकि दूर हों भ्रांतियां

स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1997 से 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस मुहिम के पीछे मकसद विश्वभर में रक्तदान की अहमियत को समझाना था लेकिन दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में इस मुहिम को उतना प्रोत्साहन नहीं मिल पाया जितना की अपेक्षित है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों में फैली भ्रांतियां हैं, जैसे कि रक्तदान से शरीर कमजोर हो जाता है और उस रक्त की भरपाई होने में काफी समय लग जाता है।

इतना ही नहीं यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित खून देने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने के कारण बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं। ऐसी मानसिकता के चलते रक्तदान लोगों के लिए हौवा बन गया है जिसका नाम सुनकर ही लोग सिहर उठते हैं। ऐसी ही भ्रांतियों को दूर करने के लिए पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां रूहानी सत्संगों व रक्तदान शिविरों के माध्यम से समय-समय पर आमजन को नियमित रक्तदान के प्रति जागरूक करते आ रहे हैं।

रक्तदान के बाद क्या करें

  • रक्तदान के बाद कई लोगों का रक्तचाप थोड़ा कम हो जाता है और हल्का चक्कर भी महसूस होता है।
  • अगर आप भी ऐसा महसूस कर रहे हैं तो रक्तदान के बाद थोड़ी देर बैठें।
  • रक्तदान के बाद आपको जो रिफ्रेशमेंट खाने के लिए दिया जा रहा है उसे खा लें।
  • रक्तदान के आधे घंटे बाद काम कर सकते हैं। सिर्फ रक्तदान के तुरंत बाद कठिन व्यायाम करने से बचें।
  • रक्तदान के बाद खानपान में कोई पाबंदी नहीं होती और न ही ताकत बढ़ाने वाले पदार्थ खाने की जरूरत है।

लारजेस्ट हुॅमन ड्रॉपलेट के तहत रक्त बूंद

शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के हजारों सेवादारों ने रक्तदान के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए विगत 24 मार्च 2013 को लारजेस्ट हुॅमन ड्रॉपलेट के तहत रक्त बूंद बनाकर संदेश भी दिया। डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह के उपलक्ष्य में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के तत्वावधान में आयोजित लारजेस्ट हुॅमन ड्रॉपलेट् इवेंट में लाल रंग की टी शर्ट व कैप पहने 10 हजार 500 सेवादारों ने करीब 24 हजार स्कवेयर फुट में रक्त बूंद बनाई। सेवादारों ने रक्तदान करने की प्रतिबद्धता को दोहराया साथ ही रक्तदान करने के लिए आमजन को प्रेरित करने का भी प्रण लिया।

World Blood Donor Day

रक्तदान के क्षेत्र में गिनीज 4 वर्ल्ड रिकॉर्ड

मानवता भलाई कार्यों को समर्पित विश्वविख्यात सर्व धर्म संगम डेरा सच्चा सौदा के नाम 17 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डों में से चार गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड रक्तदान के क्षेत्र में हैं। ट्रयू ब्लड पंप के रूप में जाने जाने वाला डेरा सच्चा सौदा ने भारतीय सेना व अन्य जरूरतमंद लोगों को अब तक 5 लाख 60 हजार से ज्यादा यूनिट रक्त देकर लोगों की जान बचाई है। इसके अलावा एक ही दिन में 43 हजार 732 यूनिट रक्तदान का विश्व कीर्तिमान भी डेरा सच्चा सौदा के नाम है।

विगत वर्ष 12 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली समेत देशभर में 100वीं मस्तो-मस्त रूहानी रूबरू नाईट की डायमंड जुबली के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल रक्तदान शिविर में एक ही दिन में 77,777 यूनिट रक्तदान किया गया था। उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना की 90 प्रतिशत रक्त की जरूरत डेरा सच्चा सौदा द्वारा पूरी की जाती है जिसके लिए भारतीय सेना की आर्म्स आॅफ टॉसफ्यूजन सैंटर की टीम हर माह आश्रम से आवश्यक्तानुसार रक्त एकत्रित कर ले जाती है।

 

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