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    जब महिलाओं के हक में पास हुआ यूएन में प्रस्ताव

    Modern Society

    महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 25 नवंबर को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा खत्म करने वाले दिन के रूप में घोषित किया हुआ है। यूएन का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा मानवाधिकार का उल्लंघन है और इसके पीछे की वजह महिलाओं के साथ भेद भाव है। संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मामला शिक्षा, गरीबी, एचआईवी और एड्स के अलावा सुरक्षा और शांति के साथ जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि सिर्फ गरीब और विकासशील देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों में महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं। वेबसाइट में अनुमान लगाया गया है कि विश्व की 70 फीसदी महिलाओं ने अपने जीवनकाल में कभी न कभी हिंसा का सामना किया है।

    डोमिनिकन गणराज्य की सामाजिक कार्यकर्ता तीन मीराबल बहनों की हत्या 1960 में इसी दिन कर दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों और गैरसरकारी संगठनों से अपील की है कि वे महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करें। पिछले साल अपने संदेश में यूएन महासचिव बान की मून ने कहा, दुनिया भर में लाखों महिलाओं और बच्चियों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें मारा जाता है, उनका बलात्कार होता है और यहां तक कि उनकी हत्या कर दी जाती है। यह सब मानवाधिकारों का हनन है। हमें मूल रूप से भेद भाव करने वाली संस्कृति का विरोध करना चाहिए, जिससे हिंसा होती है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, मैं सभी सरकारों से अपील करता हूं कि वे महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हर तरह की हिंसा को खत्म करने का प्रयत्न करें। मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि इस अहम लक्ष्य को पूरा करने में वे मदद करें।

     

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