जल संरक्षण व पौधारोपण अत्यंत आवश्यक

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Water Conservation
गर्मी का मौसम अब अपने पूरे यौवन पर हो चला है। शहरी क्षेत्रों में पानी की किल्लत के चलते लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। यूं तो जब से पृथ्वी पर जीवन आया है तब से मनुष्य गर्मी, सर्दी को झेलता आ रहा है, लेकिन मानवीय विकास व मनुष्य की बढ़ी जनसंख्या ने इसके समक्ष मौसम जनित समस्याओं की झड़ी लगा दी है। बढ़ रहे शहरीकरण से भारत जैसे देश में जहां वनों की कमी हो रही है वहीं पानी की मांग बेहिसाब बढ़ रही है। देश की आबादी का जो आकार हो चला है इस हिसाब से देश में पानी का प्रबंधन नहीं हो पा रहा, जिस वजह से यहां प्रतिदिन करोड़ों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है वहीं देश के हर गांव-शहर की आबादी पानी की कमी से जूझ रही है।
हर वर्ष सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर गर्मी के मौसम में जनजागरूकता अभियानों में गति आ जाती है कि पानी को बचाया जाए, लेकिन गर्मी का मौसम गुजरते ही देशवासी फिर से उदासीन हो जाते हैं। पानी में बढ़ रहा प्रदूषण इसकी किल्लत में कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। देशभर के नदियां, झीलें, तलाब सभी प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। अरबों घनमीटर पानी जो स्वच्छ है लेकिन सरकार, प्रशासन एवं आमजन की लापरवाही के चलते वह पीने लायक नहीं रहा। देश में पानी के संरक्षण के लिए प्रतिवर्ष नई नीतियां, नये बजट जारी होते हैं, परंतु उन सब का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता। मौसम की मार व पानी की किल्लत से पीड़ितों को बीमारी की हालत में स्वास्थ्य केंद्रों में भी पूरा सहारा नहीं मिल पाता।
भारतीय सरकारी चिकित्सा सेवाओं में डॉक्टरों, नर्सों, दवाइयों की किल्लत साल भर बनी रहती है, जिस कारण लू जैसी मौसमी बीमारी से भी बहुधा लोग जान से हाथ धो बैठते हैं। मूल-भूत सुविधाओं की कमी में आखरी राहत बिजली सप्लाई की बचती है। वह भी वर्ष भर कमी के भंवर में फंसी रहती है। दरअसल विकास का पूरा पहिया ही पानी के इर्द-गिर्द घूमता है। जब पानी की ही कमी बनी रहती है तब अन्य समस्याएं तो फिर बिना बुलाए आनी ही हैं। एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक भारत में पानी कमी बहुत हद तक बढ़ जाने वाली है। भारत में घरेलू व कृषि खपत का 70 प्रतिशत पानी भू-जल से लिया जा रहा है, जबकि प्रतिवर्ष देश में तेजी से भू-जल गिर रहा है।
अत: अब वक्त नहीं बचा है कि लम्बी तान कर सोते रहा जाये। शहरीकरण की वजह से बढ़ रहे गर्मी के प्रकोप से बचने का एक मात्र उपाय है खाली भूमि पर अधिक से अधिक संख्या में पौधारोपण किया जाए। साथ ही सर्दी में भी पानी की बचत की जाए, जीवन के आधार जल को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जल प्रदूषण के विरुद्ध लड़ना चाहिए अन्यथा पानी के लिए लड़ाई की जमीन तो लगभग तैयार हो ही चुकी है।

 

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