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Friday, February 13, 2026
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    शिक्षा के मंदिर में ताश की क्लास

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    तस्वीर देखकर अंदाजा लगाएं क्या बनेंगे इस स्कूल के बच्चे, डॉक्टर, इंजीनियर या जुआरी

    चरखी दादरी(सच कहूँ न्यूज)। विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है और हम अपने बच्चों को विद्यालय इसलिए भेजते हैं ताकि वे पढ़-लिखकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील आदि बनें। लेकिन देश के इन भावी कर्णधारों के मार्गदर्शक के रूप में विद्यालय में मौजूद अध्यापक रूपी पुजारी ही यदि तमाम मर्यादाएं लांघकर अमर्यादित आचरण करने लगें, स्कूल समय में पढ़ाने की बजाए ताश के पत्ते पीटने लगें और दरी बिछाकर पूरी निडरता से सुस्साते रहें तो आप स्वंय अंदाजा लगा लीजिए कि देश का भविष्य कैसा होगा?

    चरखी दादरी के गांव फतेहगढ़ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को ली गई यह तस्वीर तो शिक्षा विभाग के साथ-साथ समस्त अध्यापक वर्ग को शर्मसार कर देने वाली है क्योंकि विद्यालय के अध्यापक स्कूल समय में ही मजे से ताश के पत्ते पिटते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर में ताश की क्लास में प्राचार्य व अध्यापकों के पीछे कुछ अध्यापक आराम से सोते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।

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    साथ ही एक चारपाई भी दिखाई दे रही है लेकिन फिलहाल उस पर कोई नहीं है। दूसरी तरफ विद्यालय में विद्यार्थियों की अगर बात करें तो वे आराम से खेल-कूद में व्यस्त हैं। लगता है पढ़ाई-लिखाई से इन्हें कोई लेना-देना ही नहीं। पूछने पर विद्यार्थियों ने बताया कि विद्यालय में अध्यापकों का यही हाल है। वे रोजाना स्क्ूल समय में इसी तरह ताश खेलते हैं, उनकी पढ़ाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कुछ भी हो यह तस्वीर शिक्षा विभाग के साथ-साथ प्रदेश सरकार के दावों की भी पोल खोल रही है।

    स्कूल टाइम में ताश खेलते अध्यापकों का वीडियो वायरल

    जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें स्कूल के प्राचार्य विनोद श्योराण के साथ ताश खेलते हुए एसएस अध्यापक हरेंद्र, संस्कृत अध्यापक रामधन व मैथ अध्यापक सतीश कुमार दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य अध्यापक ताश खेलने वाले अध्यापकों के साथ वाले कमरे में आराम से सो रहा है।

    जिस स्कूल समय में प्राचार्य व अन्य अध्यापक अध्यापन की बजाए ताश खेलने में मशगुल रहते हों, भला ऐसे स्कूल में पढ़ाई व बेहतर रिजल्ट की आस कैसे की जा सकती है। स्कूल टाइम में कोइर् बच्चे ग्राऊंड में घूूम रहे हैं तो कुछ शोर-शराबा कर रहे हैं। लेकिन अध्यापक हैं कि उन्हें कोई सरोेकार नहीं। स्कूल का आधा स्टाफ जहां ताश व मोबाइल में व्यस्त है वहीं एक अध्यापक कमरे में आराम में सो रहे हैं।

     

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