कोरोना पॉजिटिव थी दो नर्स, एक स्कूटी पर तो एक पैदल ही पहुंची अस्पताल

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Negligence of Government Civil Hospital

चिंताजनक। तबियत खराब होने की बात बताई थी, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया (Negligence of Government Civil Hospital)

  • स्वास्थ्य विभाग ने नहीं उपलब्ध कराई एम्बुलेंस
  • कोरोना रिपोर्ट थी पेंडिंग, फिर भी कहा ड्यूटी करो…
  • नर्सिंग सिस्टर ने मोबाइल कॉल पर बताई आपबीती

संजय मेहरा/सच कहूँ  गुरुग्राम। फाइव स्टार, थ्री स्टार अस्पतालों के शहर गुरुग्राम के सरकारी नागरिक अस्पताल की ओर से कोरोना के समय में कितनी बड़ी लापरवाही और उदासीनता बरती जा रही है, इसका खुलासा यहां दो नर्सिंग स्टाफ के कोरोना पॉजिटिव होने से हुआ है। उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि कई बार अपने केस में अस्पताल की ओर से लापरवाही की बात कही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के उन दावों की यहां पोल खुल जाती है, जो कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सुविधाएं देने के नाम पर किए जाते हैं।

क नर्सिंग स्टाफ अशोक विहार फेज-3 में रहती है और दूसरी यहां ओम नगर में

बता दें कि गुरुग्राम के नागरिक अस्पताल की दो नर्सिंग स्टाफ कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब ईएसआई अस्पताल में उपचाराधीन हैं। वे दोनों यहां अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड (कोरोना पॉजिटिव मरीजों के उपचार का वार्ड) में ड्यूटी पर थीं। अब वह वार्ड नागरिक अस्पताल से ईएसआई अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। एक नर्सिंग स्टाफ अशोक विहार फेज-3 में रहती है और दूसरी यहां ओम नगर में। (Negligence of Government Civil Hospital) अशोक विहार निवासी नर्सिंग सिस्टर मुताबिक उनकी 19 अप्रैल की रात की ड्यूटी थी और 20 को उन्हें उल्टियां हुई। सिरदर्द भी था और कमजोरी महसूस हो रही थी। उन्होंने अपनी ऐसी तबियत के बारे में वार्ड में डॉक्टर को भी बताया, लेकिन उन्होंने थकान आदि की बात कहकर उन्हें टाल दिया।

  • उन्होंने योगा भी शुरू किया, लेकिन शरीर कमजोर ही हो रहा था।
  • हौंसला नहीं बन पा रहा था।
  • उन्हें टेंशन भी होने लगी।
  • उनका कहना है कि 23 अप्रैल की उनकी नाइट ड्यूटी थी।
  • उस दिन उसकी आइसोलेशन वार्ड में अंतिम ड्यूटी थी।
  • क्योंकि इसके बाद उस वार्ड को ईएसआई अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
  • अगले दिन 24 का आॅफ था। 26 अप्रैल को उन दोनों के सेंपल लिए गए।
  • सेंपल लेने के बाद प्रोटोकॉल के तहत उन्हें रिपोर्ट आने तक खुद को क्वारंटाइन रहने को कहा गया।
  • इसलिए दोनों ही अपने-अपने घरों में क्वारंटाइन हो गई।

क्वारंटाइन में होने के बाद भी रहा ड्यूटी का दबाव

अशोक विहार में रहने वाली स्टाफ अपने परिवार के साथ रहती हैं। इसलिए उन्होंने सेंपल देने के बाद खुद को अपने घर के नीचे के फ्लोर पर क्वारंटाइन किया। उनके मुताबिक उनके सेंपल की रिपोर्ट आई भी नहीं थी और अस्पताल से कॉल करके उन पर दबाव बनाया कि वह ड्यूटी पर पहुंच जाए। जबकि कोरोना रिपोर्ट आने तक डॉ. नवीन और डॉ. काजल ने उन्हें क्वारंटाइन रहने को कहा था। (Negligence of Government Civil Hospital) फिर कहा गया कि नहीं आ सकते तो मेडिकल भेजो। इस तरह से उन्हें मानसिक प्रताड़ना भी दी गई। ऐसा ही दूसरी नर्सिंग स्टाफ को भी कहा गया। उनको 29 अप्रैल को ईवनिंग में सीनियर स्टाफ ने ड्यूटी पर आने को कहा। उसी दिन उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

एंबुलेंस तक की नहीं मिली सुविधा

लापरवाही की इंतेहा तो तब हो गई, जिस दिन (29 अप्रैल को) उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दोनों को अस्पताल में पहुंचने के लिए कहा गया। अशोक विहार निवासी नर्सिंग सिस्टर के मुताबिक उन्हें कहा गया कि एम्बुलेंस आने में अभी एक-दो घंटे लगेंगे, इसलिए खुद से ही अरेंजमेंट करके अस्पताल आ जाए। फिर वह खुद तो स्कूटी से अस्पताल पहुंची और उनके पति बच्चों को गाड़ी से लेकर अस्पताल में पहुंचे। क्योंकि वह कोरोना पॉजिटिव थी, इसलिए पूरा परिवार एक साथ नहीं जा सकता था।

वहीं दूसरी नर्सिंग सिस्टर का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव का पता चलने के बाद वह टेंशन में थी। उन्होंने अस्पताल में कॉल की कि तबियत बहुत खराब है, एम्बुलेंस  दो। अस्पताल स्टाफ द्वारा एम्बुलेंस पहुंचने में डेढ़-दो घंटे का समय दिया गया। साथ ही कह दिया गया कि वह खुद देख ले जल्दी कैसे आ सकती है। एम्बुलेंस नहीं आने पर कोरोना पॉजिटिव नर्सिंग सिस्टर ओम नगर से पैदल ही अस्पताल के लिए निकल पड़ी।

  • उनके मुताबिक उस समय तबियत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी।
  • उससे चला भी नहीं जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचना था।
  • करीब 40 मिनट में वह थकी-हारी परेशान होते हुए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल पहुंची।

अपने खर्च से घर को करवाया सेनिटाइज

इतनी लापरवाहियों के बीच एक और लापरवाही यह की गई कि अशोक विहार में रहने वाली नर्सिंग सिस्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसके घर को सेनिटाइज तक नहीं कराया गया। इंतजार करके उसने अपने पड़ोसियों से कहकर किसी प्राइवेट सेनिटाइजर को पैसे देकर घर सेनिटाइज कराया। उनके लिए अच्छी खबर यही रही कि उनके परिवार की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई।

ईएसआई में कहा, एक-दूसरे के सेंपल ले लो…

पढ़ते रहिए, क्योंकि लापरवाही अभी थमी नहीं है। दोनों कोरोना पॉजिटिव नर्सिंग सिस्टर यहां ईएसआई में उपचाराधीन हैं। यहां पर भी उनका स्टाफ के नाते कोई विशेष ध्यान नहीं रखा जा रहा। इसकी शिकायत उन्होंने सीएमओ डॉ. जे.एस. पूनिया से भी की है। दोनों नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि उन्हें कोई देखने तक नहीं आता। फोन से ही पूछ लेते हैं कि कैसी तबियत है। कल उनके सेंपल लिए जाने थे। उन्हें कह दिया गया कि एक-दूसरे के सेंपल ले लो।

  • उनका कहना है कि बेशक वे नर्सिंग स्टाफ हैं, लेकिन इस समय वे मरीज हैं।
  • दोनों एक-दूसरे के पास भी नहीं जा सकती।
  • किसी का भी संक्रमण किसी को और अधिक इफेक्ट कर सकता है।
  • यह रिस्की है और उन्हें सेंपल लेने को कहा गया।
  • इस तरह से कदम-कदम पर उनको कोरोना पॉजिटिव होने के साथ तनाव दिया गया है।

सीएम, स्वास्थ्य मंत्री करें कार्रवाई

हम चाहते हैं कि कोरोना योद्धाओं के साथ इस तरह के बर्ताव पर संबंधित दोषियों पर कार्यवाही तो होनी ही चाहिए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को इस पर संज्ञान लेना चाहिए कि जिस जिला को मॉडल के रूप में दिखाकर सरकार विदेशों में वाहवाही लूटती है, वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल है। अपने ही स्टाफ के साथ इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई तो फिर आम आदमी क्या उम्मीद कर सकता है।

क्या कहते हैं सीएमओ डॉ. जे.एस. पूनिया

इस पूरे प्रकरण पर गुरुग्राम के सीएमओ डॉ. जे.एस. पूनिया का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इस बात सुनते ही बात को घुमाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि दो-दो नोडल आॅफिसर लगा रखे हैं। फिर भी इतनी बड़ी लापरवाही हुई, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वे नोडल आॅफिसर को आपका नंबर देते हैं।वे आपसे संपर्क करेंगे।इस तरह सीधा जवाब ना देकर सीएमओ डॉ. जेएस पूनिया अपनी जवाबदेही से ही बचते रहे।

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