दुखियों व पीड़ितों का सहारा है यह संस्था

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This institution is the support of the sufferer and the victims
26 अगस्त 1910 को मेसेडोनिया की राजधानी स्कोप्जे शहर में जन्मी मदर टेरेसा ने महज 18 साल उम्र में अपना परिवार छोड़ दिया और अपना जीवन समाज सेवा में समर्पित कर दिया था। जब मदर टेरेसा वर्ष 1929 में भारत आईं थी उस समय उनकी उम्र 19 साल थी। मिशनरीज ऑफ़ चैरिटीज एक एनजीओ है, जिसकी स्थापना मदर टेरेसा ने की थी। भारत रत्न से सम्मानित मदर टेरेसा ने आज ही के दिन 7 अक्टूबर, 1950 में कोलकाता में इसकी स्थापना की थी। इसकी मुख्य पदाधिकारी सिस्टर प्रेमा, मदर जनरल ऑफ़ मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी हैं। इस संस्था की अलग-अलग शाखाएं देश और विदेश के अलग-अलग हिस्सों में खोली गईं।
फिलहाल इस संस्था की दुनिया के 120 देशों में 4500 से भी ज्यादा शाखाएं हैं। अकेले झारखंड में ही कुल 12 संस्थाएं हैं। इस संस्था में दुनिया भर के गरीब, बीमार, अनाथ और बेघर बच्चों को मदद मिलती है। किसी दुष्कर्म पीड़िता और उसके होने वाले बच्चे की देखभाल इस संस्था में की जाती है। यदि कोई दुष्कर्म पीड़िता गर्भवती होती है और वो अपना बच्चा नहीं चाहती है, तो संस्था उस बच्चे को किसी निसंतान दंपती को भारतीय कानून के तहत गोद लेने का प्रावधान करती है। इसके अलावा मानव तस्करी से छुड़ाई गई लड़कियों और उनके बच्चों को भी इस संस्था में रखा जाता है। संस्था में आने वाली महिलाओं और बच्चों को रहना-खाना दवाइयां और शिक्षा मुफ्त दी जाती हैं। इसके लिए संस्था को देश-दुनिया की कई संस्थाओं से चंदा भी मिलता है, जो करोड़ों रुपये में होता है। मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के तहत निर्मल हृदय के अलावा भी कई और संस्थाएं हैं। इनमें मिशनरी ऑफ़ चैरिटी ब्रदर्स, मिशनरीज ऑफ़ द वल्ड, मिशन कोलकाता, मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी फादर्स इंडिया और मिशनरीज सिस्टर्स मेरी जैसी कई संस्थाएं हैं। इसके सदस्यों को चार प्रणों के प्रति अंजान रहना होता है: 1- पवित्रता, 2- दरिद्रता, 3- आज्ञाकारिता और 4- प्रण। यह है कि वह व्यक्ति गरीब से गरीब इंसान की सेवा में अपना जीवन व्यतीत करे।

 

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