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वृक्षों को बचाने की सैद्धांतिक जीत, व्यवहारिक हार

Trees

मुंबई के आरे में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए पहले विद्यार्थियों को हाईकोर्ट जाना पड़ा
युवा पीढ़ी वातावरण को लेकर चिंतित है और उन्होंने साहस भी दिखाया

अमेरिका के समुद्र में एक कछुए की मौत पर वहां के वातावरण वैज्ञानिकों में चिंता का माहौल है। कछुए की मौत लोगों द्वारा समुद्र में फैंके गए माईक्रो प्लास्टिक कूड़े को निगलने के कारण हुुई है। एक कछुए ने अमेरिका को हिलाकर रख दिया है लेकिन दूसरी तरफ हमारे देश में वातावरण से सरेआम खिलवाड़ की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। मुंबई के आरे में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए पहले विद्यार्थियों को हाईकोर्ट जाना पड़ा, जब वहां बात नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर रोक लगाकर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

नि:संदेह सुप्रीम कोर्ट में विद्यार्थियों की जीत तो हुई है लेकिन यह सैद्धांतिक और सांकेतिक जीत है। व्यवहारिक तौर पर विद्यार्थी वृक्ष काटने वाले कुलहाड़े के सामने हार गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश जारी होने तक पेड़ काटे जा चुके थे। सरकार के वकील ने अदालत में कहा कि जितने पेड़ काटने की जरूरत थी उतने काट लिए गए हैं। अगर विकास के लिए पेड़ काटने जरूरी थे तब इस मामले में विद्यार्थियों और अन्य वातावरण प्रेमियों को भरोसे में लिया जा सकता था और काटे जाने वाले वृक्षों की संख्या घटाई जा सकती थी, लेकिन प्रशासन इस बात पर खुश था कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पेड़ काट लिए जाएंगे।

विद्यार्थियों की भावना का सम्मान करने की बजाय रात के समय भी पेड़ काटे गए ताकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले-पहले आरे के जंगलों में आरी चला दी जाए। विद्यार्थियों ने वृक्षों को काटकर कोई अपनी जायदाद तो नहीं बनानी थी बल्कि वे मुंबई के लोगों की बेहतरी के लिए अपने खर्च पर संघर्ष करते रहे। भले ही विद्यार्थी व्यवहारिक तौर पर हार गए हैं लेकिन उनकी सोच व बहादुरी की दाद देनी बनती है जिन्होंने वृक्षों के लिए इतना प्यार दिखाया है।

स्वीडन की युवती ग्रेटा थनबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को हिलाकर रख दिया था और डोनाल्ड ट्रम्प की की तरफ उसकी घुड़की को पूरे विश्व ने देखा था। यह पहल बेहतर है कि हमारे देश में भी युवा पीढ़ी वातावरण को लेकर चिंतित है और उन्होंने साहस भी दिखाया। सरकारें, राजनेताओं की वातावरण प्रति चुप्पी भयानक नजर आ रहा है। फ्लोरिडा के कछुए की मौत का मातम अभी हमारे देश के नेताओं के जहन को झकझौरने में समर्थ नहीं हुआ तभी तो यहां जंगल समेटे जा रहे हैं।

 

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