सम्पादकीय

ट्रंप का दीवार बनाने का कदम बेतुका

The step of trump absurd

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह मैक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने का निर्णय लिया है, उससे ट्रंप की अड़ियल मानसिकता अपने शिखर पर पहुंचती नजर आती है। करीब 3200 किलोमीटर दीवार पर 5.7 अरब अमेरिकी डॉलर के खर्च होने का अनुमान है। अमेरिकी संसद में इसको स्वीकृति न मिलने की सूरत में ट्रंप ने देश में वित्तीय एमरजैंसी लगाने की भी चेतावनी दे दी है। ट्रंप की सोच व व्यवहार बड़ा अजीबो-गरीब अमेरिकी लोकतांत्रिक उसूलों के ही खिलाफ है। एक तरफ अमेरिका, भारत-पाक को आपसी मसले बातचीत के द्वारा सुलझाने पर जोर दे रहा है वहीं दूसरी तरफ उसके पास अपने पड़ोसी देश (मैक्सिको) के साथ निपटने के लिए दीवार के अलावा कोई और हल नजर नहीं आता। ट्रंप को यह नहीं भूलना चाहिए कि विश्व व्यापार समझौते का वह अग्रिम देश है जो सारे संसार को व्यापारिक तौर पर एक होने या एक गांव की तरह बता रहा है।

आधुनिक व विश्व भाईचारे के जमाने में दीवारें किसी मसले का हल नहीं। अफगानिस्तान, ईराक व कई अन्य देशों में बमबारी के साथ पहाड़ों को चीरने वाले देश को बौद्धिकता की इतनी कमी क्यों महसूस हो रही है कि अब उसे दीवारों के बिना कुछ सूझ ही नहीं रहा। दरअसल अमेरिकी सुरक्षा व गुप्तचर तंत्र का लोहा पूरी दुनिया मानती है, ऐसे हालातों में कोई गुंजाईश नहीं कि अमेरिका को अति आधुनिक कैमरों, सुरक्षा यंत्रों पर से भरोसा छोड़ कर हेरोइन तस्करी व गैर कानूनी प्रवास रोकने के लिए दीवारों का सहारा लेना पड़े। दरअसल ट्रंप की सोच शिखर की तरक्की के बाद ढ़लते सूरज वाली है। अमेरिकावाद की आंधी लाने के लिए ट्रंप गैर अमेरीकियों को दुश्मन की तरह पेश कर रहे हैं परंतु यह सोच अमेरिका में बढ़ती नजर नहीं आ रही।

ट्रंप अमेरिका को एक व्यापारिक कंपनी की तरह चलाने की कोशिश कर रहे हैं व यही उनका भ्रम है। देश व कंपनी में बहुत बड़ा अंतर है ट्रंप के व्यवहार में तानाशाही के अंश नजर आ रहे हैं, जिस अमेरिका ने दास प्रथा को खत्म किया है वहां मूलवाद को उभारना कठिन है। ट्रंप का निर्णय अमेरिका के लिए न सिर्फ आर्थिक बल्कि, सामाजिक व सांस्कृतिक तौर पर भी मुश्किलों भरा है। दक्षिणी कोरिया व उत्तरी कोरिया जैसे देशों में नफरत की दीवार टूट रही है तब अमेरिका विश्व समुदाय को क्यों नजरअन्दाज कर रहा है? यदि ट्रंप का व्यवहार इसी तरह ही रहा है तब अमेरिकी उनके इस कार्यकाल को आखिरी कार्यकाल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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