सतगुरू के प्रेम में गांव-गांव नाचता रहा असली रांझा

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प्रेमी रांझा राम लिखते हैं कि उसकी पत्नि ने बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज से नाम शब्द प्राप्त किया हुआ था। शुरू-शुरू में वह उसे सत्संग में जाने नहीं देता था। वह छिप-छिप कर सत्संग में जाती थी।एक दिन उसने बेपरवाह जी के सामने उसकी शिकायत करते हुए उपरोक्त सब कुछ बता दिया।

इस पर बेपरवाह जी फरमाने लगे, ‘‘समय आने पर सांकल से बांधेगें व गांव गांव घुमाएंगे।’’ जब मैंने नाम-शब्द लिया तो वास्तविकता का पता चला। बेपरवाह जी के उपरोक्त वचनों के अनुसार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने मुझे तेरावास में बुलाया व वचन किये,‘‘बेटा, पहले तो आप नकली रांझा थे, आज से तुझे असली रांझा बना दिया। ’’ फिर मेरे पैरों में घुंघरू बांधे गए(जैसे कि बेपरवाह जी के वचन थे कि सांकल से बांधेंगे) व वचन फरमाए,‘‘यह खोलने नहीं, यह घुंघरू मरने पर ही खुलेंगे’’ एक दिन पूजनीय परम पिता जी ने पूछा, रांझा राम, क्या घुंघरूओं के बारे में लोग आपको टोकते हैं?’’ मैंने कहा, हां, पिता जी, बहुत टोकते है।‘‘ फिर पूजनीय परम पिता जी ने कहा, आप इनकी परवाह न करो। इन घुंघरूओं को कभी नहीं खोलना।’’ शहनशाह जी के वचन मानकर उसने अपने पैरों में से घुंघरू अभी तक भी बांधे हुए हैं।

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