पूज्य गुरू जी पर आरोप लगाने वाली पंजाब पुलिस व उसके राजनीतिक आका इन सवालों के जवाब दें:-

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Dera Sacha Sauda sachkahoon

सरसा। सर्व-धर्म-संगम डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पंजाब पुलिस ने पवित्र गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले में फंसाने की साजिशों की हदें पार कर दी है। वास्तविकता यह है कि पूज्य गुरू जी श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का सम्मान खुद करते हैं, इसके अलावा करोड़ों की संख्या में साध-संगत को भी सभी धर्मों के पावन ग्रन्थों का सम्मान करने की शिक्षा देते हैं। ऐसे महान गुरू पर बेअदबी के आरोप लगाने का एकमात्र उद्देश्य पूज्य गुरू जी को सिख धर्म के खिलाफ साबित करना है ताकि सिख मतदाताओं को गुमराह कर चुनावों में लाभ उठाया जा सके। पंजाब पुलिस और उसके राजनीतिक आकाओं से हम पूज्य गुरू जी पर आरोप लगाने से पहले नीचे लिखे सवालों के जवाब पूछना चाहते हैं:-

प्रश्न नं 1 : डेरा सच्चा सौदा सर्व-धर्म-संगम है, जहां सिख भाईचारा लाखों की तादाद में श्रद्धा रखता है। क्या पुलिस के पास इस बात का कोई सबूत है कि डेरा सच्चा सौदा सिख धर्म में विश्वास नहीं रखता?

प्रश्न नं 2 : डेरा सच्चा सौदा की स्थापना सन् 1948 में हुई। डेरा सच्चा सौदा में आस्था रखने वाले सिख परिवार चार-पांच पीढ़ियों से जुड़े हुए हैं। क्या 73 सालों के इतिहास में एक भी सिख परिवार ने किसी थाने में शिकायत दी कि डेरा सच्चा सौदा उनके धर्म के खिलाफ लिखता, बोलता या प्रचार करता है?

प्रश्न नं 3 : यदि डेरा सच्चा सौदा में कभी सिख धर्म के खिलाफ प्रचार किया जाता तो क्या सिख भाईचारे के लोग डेरा सच्चा सौदा में श्रद्धा रखते?

प्रश्न नं 4 : डेरा सच्चा सौदा शुरू से ही हर श्रद्धालु को अपने-अपने धर्म अनुसार जीवन जीने की शिक्षा देता है। क्या डेरा सच्चा सौदा ने कभी किसी हिन्दू, सिख, ईसाई या मुस्लमान को धर्म बदलने, पहनावा बदलने या भाषा बदलने के लिए कहा?

प्रश्न नं 5 : डेरा सच्चा सौदा में आने वाले सिख श्रद्धालु केस, दाढ़ी भी रखते हैं और दस्तार भी सजाते हैं। क्या धर्मों के नियमों को सम्मान देने वाले डेरा सच्चा सौदा को सिख विरोधी कहा जा सकता है?

प्रश्न नं 6 : डेरा सच्चा सौदा किसी धर्म विशेष की मर्यादा और परम्परा के खिलाफ नहीं है। सिख धर्म से संबंधित बहुत से डेरा श्रद्धालु आज भी अपने बच्चों के विवाह और दु:ख-सुख व अन्य कार्य पवित्र श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी की पावन उपस्थिति में संपूर्ण करते हैं। क्या कोई ऐसी एक भी मिसाल है जब डेरा सच्चा सौदा द्वारा किसी भी श्रद्धालु को सिक्ख रीति-रिवाजों के अनुसार अपने कार्य करने से रोका गया हो?

प्रश्न नं 7 : कोरोना महामारी के दौरान डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने अनेकों पवित्र सिख गुरूधामों में सैनेटाईजेशन और सफाई की सेवा की। क्या अपने श्रद्धालुओं को ऐसी शिक्षा देने वाले पूज्य गुरू जी किसी पवित्र ग्रंथ का अपमान करने के बारे में कभी सोच सकते हैं?

प्रश्न नं 8 : यदि डेरा सच्चा सौदा सिख धर्म के खिलाफ होता तब क्या डेरा सच्चा सौदा के पवित्र ग्रंथों में गुरबाणी की मिसालें पेश की जातीं?

प्रश्न नं 9 : विगत वर्षों में डेरा श्रद्धालुओं द्वारा एक गुरूद्वारा साहिब में लगी आग को अपनी जान पर खेलकर बुझाया गया, क्या ऐसा करने वाले डेरा श्रद्धालु सिख धर्म के विरोधी हो सकते हैं?

प्रश्न नं 10: पूज्य गुरू जी ने पोशाक मामले में फरमाया कि वह किसी भी सिख गुरू साहिबान की नकल करना तो दूर, ऐसा सोच भी नहीं सकते। क्या यह शब्द गुरू साहिबानों की महानता और उनके सम्मान से खाली हैं?

प्रश्न नं 11: पूज्य गुरू जी सत्संगों में सिख गुरूओं के लिए ‘भगवान स्वरूप गुरू साहिबान’ और गुरबाणी की जगह ‘पवित्र गुरबाणी’ शब्द का प्रयोग करते हैं। क्या ऐसा कहने वाले पूज्य गुरू जी सिक्ख विरोधी हो सकते हैं?

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