हमारे लिए टिड्डी दल भी कोरोना जैसा खतरा’

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The locust party is also a corona-like threat to us

फसलों को नुकसान देकर हमारे जीवन को कर सकता है प्रभावित

  • टिड्डियों का एक बड़ा समूह ईरान और पाकिस्तान के रास्ते भारत में पहुंचा
संजय मेहरा/सच कहूँ गुरुग्राम। 21वीं सदी के 20वें साल में आपदाएं ही आपदाएं हैं। आपदाओं के दौर में टिड्डियों के रूप में एक और बड़ी आपदा हमारे सिर पर मंडरा रही है। कोरोना की तरह यह भी सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अनेक देशों के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि सरकारें कोरोना से राहत, बचाव के साथ-साथ टिड्डियों के मामले को भी गंभीरता से लें। सिर्फ दावों से टिड्डियों का आतंक कम या खत्म नहीं होने वाला। इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
कोरोना काल के चलते एक विशाल टिड्डी दल का समूह भारत की सीमाओं पर दस्तक दे रहा है। पिछले 18 महीनों के दौरान तीन से चार बार टिड्डी दलों के झुंड ने भारत में प्रवेश किया। टिड्डियों ने गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब में फसलों का खूब नुकसान किया। वहां पर इनका प्रबन्धन इसलिए किया जा सका, क्योंकि इनका घनत्व, संख्या, व फैलाव कम था। यह टिड्डी दल आगामी समय में फसलों पर हमला करेगा। यह अपनी पूरी क्षमता के साथ जहां से भी गुजरेगा, वहां की हरियाली व फसलों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। जिसका प्राणी व अन्य जीव जंतुओं के भोजन पर बड़ा विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
कई देशों में प्रजनन में लगा टिड्डी दल
गुरुग्राम में रह रहे चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में कीट विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष रह चुके तथा इसी विश्वविद्यालय में मानव संसाधन प्रबंधन के निदेशक तथा रॉयल एंटोमॉलजिकल सोसायटी लंदन के फेलो पर्यावरण एवं जीव विज्ञानी डॉ. राम सिंह कहते हैं कि वर्तमान में यह टिड्डी दल अपने जन्म स्थान ईरान, ईराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, सोमालिया, इथियोपिया, सूडान व पाकिस्तान में अपने प्रजनन कार्य में लगा हुआ है। खाद्य एवं कृषि संगठन मरू टिड्डी दल को इसके प्रजनन स्थान पर नियंत्रित करने के लिए प्रयासरत है। अंतरराष्ट्रीय टिड्डी दल संगठन को भी इसके प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि सम्बन्धित संगठन अभी कोरोना संक्रमण के प्रबंधन में व्यस्त हैं।
पृथ्वी के 10 प्रतिशत हिस्से पर डाल सकता है प्रभाव
यह मरू टिड्डी दल विश्व के 60 देशों में व्याप्त होकर पृथ्वी के 10 प्रतिशत भू-भाग पर अपना प्रभाव डाल सकता है। हमला करने वाले टिड्डी दल 40 से 80 मिलियन की तादाद में मिलकर हर हरे भरे फूल, फल, पेड़, पौधों को खाते हुए तबाही मचा सकते हैं। इस विपत्ति का पहले से ही आंकलन कर लेना चाहिए। इस समय इसका एक बड़ा समूह ईरान और पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश कर राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में फसलों को नुकसान कर रहा है। कोरोना के कारण देश की वर्तमान स्थिति बड़ी चिंताजनक है, परन्तु टिड्डी दल भी देश का बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकता है। इसलिए कोविड-19 के साथ-साथ टिड्डी दल प्रबंधन पर विचार अति आवश्यक है।

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