खबर का असर। मेघूवाला-शहजादवाला को जोड़ने वाले पुल में भ्रष्टाचार की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने पर कार्रवाई
खिजराबाद (सच कहूँ न्यूज)। मेघूवाला-शहजादवाला को जोड़ने वाले पुल के निर्माण में प्रयोग की जा रही घटिया निर्माण सामग्री संबंधी समाचार सच कहूँ द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद ठेकेदार ने नींव को तुड़वा डाला। ठेकेदार ने अब ग्रामीणों व अधिकारियों की मौजूदगी में नए सिरे से काम शुरू करवा दिया है। मार्किटिंग बोर्ड के एक्सईएन ने मौके पर काम की गुणवता की जांच की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि जिस काम की नींव ही कमजोर हो वह ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता।
ठेकेदार के कारिंदों ने रात के समय काम करके काम में अनियमितता बरती है और गलत काम किया है। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव वालों की ओर से एक कमेटी बनाई जाएगी जो पुल के निर्माण कार्य की हर समय जांच करेगी और काम पर नजर रखेगी। ज्ञात होकि मेघूवाला से शहजाद वाला में करोडों रूपए की लागत से पुल का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप था कि पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग हो रहा है जिससे पुल ज्यादा टिकाऊ और मजबूत नही बनेगा।
बाढ के सीजन में मा?कटिंग बोर्ड द्वारा बनवाया जा रहा है यह पुल कभी भी ढह जाएगा। ग्रामीणों विजयपाल,राजेश कुमार,संजय कुमार,दाता राम,साधा राम,सुनहरा,नकली राम,जगबीर सिंह,संजीव कुमार आदि का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष की कडी मेहनत के बाद इतने सालों में पहली बार मेघूवाला और शहजाद वाला को जोडने वाले पुल के लिए ग्रांट मंजूर हुई है। ग्रांट मिलने और निर्माण कार्य शुरू होने से गांव वालों में खुशी की लहर है। लेकिन ठेकेदार द्वारा पुल निर्माण की नींव में ही घटिया सामग्री का प्रयोग होने से ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। हालांकि ग्रामीणों के विरोध करने पर ठेकेदार ने अपनी गल्ती मानी और किए गए काम को तोडकर दोबारा बनाने पर ग्रामीणों की सहमति हुई।
तीन करोड़ से होना है निर्माण
ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग एक किलोमीटर लंबे इस पुल के लिए लगभग तीन करोड़ रूपए का बजट जारी किया गया है। पटड़ी बनाने के लिए ठेकेदार ने रेतीली मिटटा प्रयोग किया है जोकि बिल्कुल गलत हैं। पटडी बनाने के लिए खेत की मिट्टी का प्रयोग होना चाहिए था। ठेकेदार ने रेतीली मिटटी का प्रयोग कर लाखों रूपए का गबन किया है।इस काम में भी ग्रामीणों ने कोई आपति नही जताई लेकिन नीचे के पिल्लर आदि बनाने के लिए घटिया सामग्री के प्रयोग पर गांव के लोग भडक गए और काम को रूकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि करोडों रूपए की लागत से बन रहे इस पुल पर ठेकेदार की ओर से तैनात किए गए एक इंजिनियर की आंखों के सामने मजदूरों ने ये काम किया है।