कोरोना की गिरफ्त में देश का दिल दिल्ली

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Coronavirus

दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस(Coronavirus) का फिर से संक्रमण बढ़ गया है। इसके चलते यूरोप के कई देश फिर से लॉकडाउन लगा रहे हैं। पहले फ्रांस ने लॉकडाउन का एलान किया। उसने 1 दिसंबर तक लॉकडाउन कर दिया है। इंग्लैंड ने भी दोबारा लॉकडाउन लगा दिया है। दुनिया में कोरोना वायरस से अब तक 55,349,529 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इससे अब तक 1,332,328 लोगों की मौत हो चुकी है। हअमरीका की त्रासद दुर्दशा देखिए कि पिछले दिनों एक ही दिन में दो लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। यह उस देश का यथार्थ है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा विकसित और सुपरपॉवर देश है। स्वास्थ्य उनके राष्ट्रीय सरोकारों में बहुत ऊपर है।

रोशनी का त्योहार दीपावली हंसी-खुशी के साथ बीत गया। पूरा देश दीपावली के दीयों की रोशनी से जगमगाया। लॉकडाउन से लगभग तबाह हो चुके व्यापार, उद्योग और अर्थव्यवस्था को दीपावली के त्योहार ने काफी मजबूती और गति प्रदान की। लेकिन त्योहार के दौरान बाजारों में खरीददारी, यात्राओं और मिलने-जुलने के चलते कोरोना के नये मामलों में वृद्धि भी देखने को मिल रही है। त्योहार के मौसम में अधिकतर देशवासी सरकार और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों और निदेर्शों को नजरअंदाज करते दिखे। त्योहार के मौसम में हुई लापरवाही का फल अब धीरे-धीरे ही सही, लेकिन सामने आने लगा है। देश में संक्रमण के मामले 88,74,291 तक पहुंच गए हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरूआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में घातक कोरोना के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि रिकार्ड की गयी है। दिल्ली में कोरोना के नए मामलों में वृद्धि की गंभीरता को देखते हुए पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक आपात बैठक बुलाई थी। बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के खिलाफ गृह मंत्रालय ने अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है।

बीते कुद दिनों में दिल्ली में कोरोना वायरस के नए मामलों में काफी वृद्धि के साथ, मौत के आंकड़े भी रिकॉर्ड संख्या में रिकार्ड हुए हैं दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर बतायी जा रही है। दिल्ली में प्रतिदिन आने वाले कोरोना मामलों की संख्या अब 8 हजार के निकट पहुंचने वाली है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कह चुके हैं कि यह कोरोना की तीसरी लहर है। पहली लहर का पीक 23 जून को, तो दूसरी लहर का पीक 17 सितंबर को आयी थी। सरकारी तंत्र इस मसले पर लगातार खामोश है कि दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर कहीं सामुदायिक स्तर पर संक्रमण फैलने से तो नहीं आई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि पिछले एक हफ्ते के अंदर पॉजिटिविटी दर 15 फीसदी से घटकर 13 फीसदी हो गई है। ये कोरोना की तीसरी लहर जरूर है लेकिन पीक अब जा चुका है। दिल्ली में मृत्यु दर 1.58 फीसदी है, जो कि राष्ट्रीय औसत मृत्यु दर 1.48 फीसदी के पास है।

भारत सरकार के आंकड़ों को मानें तो शेष देश में कोरोना के मामले घट रहे हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि जब देश के दूसरे हिस्सों में कोराना नियंत्रण में है तो दिल्ली-एनसीआर में बेलगाम क्यों है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डा. वी. के. पॉल ने एक माह पहले आगाह कर दिया था कि नवंबर में दिल्ली में कोरोना की एक और लहर आ सकती है। डा. पॉल की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समूह की तैयार रिपोर्ट में कहा गया था कि नवंबर में दिल्ली को लगभग 15 हजार नये मामलों के लिए तैयार करने की आवश्यकता है। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने तैयार की थी। त्योहारी सीजन से पहले दिल्ली में कोरोना से मौत का आंकड़ा औसतन काफी कम हो गया था, और संक्रमित 1000 से कम आने लगे थे, लेकिन कोरोना ने एक बार फिर पलटवार किया है।

बात अगर देश के दूसरे राज्यों की जाए तो बेशक महाराष्ट्र में रोजाना के मरीजों का औसत 5000 से कम हुआ है, लेकिन वहां कुल मरीजों की संख्या करीब 17.5 लाख तक पहुंच गई है। केरल, बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक में भी संक्रमित मरीज काफी आ रहे हैं। कोरोना का संक्रमण कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन वायरस का अंत अभी संभव नहीं है। कोरोना है और अभी वह जिंदा रहेगा। यह भी यथार्थ सामने आया है कि दिल्ली में ही संक्रमण के हालात खराब नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत के अन्य राज्यों-हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान और उप्र-में भी संक्रमित मरीजों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। भारत संक्रमित लोगों की संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर है. दुनिया में अब तक 38,431,704 लोग कोरोना से ठीक भी हो चुके हैं। इटली, जर्मनी, स्पेन आदि यूरोपीय देशों में भी कोरोना वायरस की पलट-लहर ने आतंकित कर रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक को बयान देना पड़ा है-हम थक गए, लेकिन कोरोना नहीं थका।

वास्तव में लॉकडाउन खुलने के बाद लोग मास्क पहनने, हाथ धोने व दो गज की दूरी बनाए रखने जैसे आवश्यक दिशा-निदेर्शों का पालन करने के प्रति बहुत लापरवाह दिख रहे हैं। जबकि दिल्ली-एनसीआर के वातावरण में प्रदूषण की मोटी चादर भी फैली है, जो कि श्वास तंत्र को और मुश्किल में डाल रही है।

कोरोना के घटते-बढ़ते मामलों के बीच अब पहले से ज्यादा लोग न केवल घरों से बाहर निकल रहे हैं, बल्कि हवाई-जहाज, ट्रेन और बसों में सफर भी कर रहे हैं। लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोरोना वायरस का खतरा कम हो गया है। यही वजह है कि सरकारें जहां एक तरफ पाबंदियों को लगभग खत्म करती जा रही हैं, वहीं लोगों को लगातार आगाह किया जा रहा है कि कोरोना वायरस अभी भी हमारे बीच मौजूद है, जिससे बचने के लिए पूरी ऐहतियात बरतना जरूरी है। इस बीच मास्क और सैनेटाइजर हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। दूसरी ओर वैक्सीन बनाने की कोशिश दिन-रात जारी है। लेकिन फिर भी कोई दावे से नहीं कह सकता कि सही मायने में असरदार वैक्सीन सारी दुनिया को कब तक नसीब होगी?

देश में भले कोरोना का कहर पहले के मुकाबले कम हुआ हो लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। दीपावली त्योहार तो बीत चुका है लेकिन अगले आने वाले दिनों में देश के तमाम राज्यों में छठ, गुरुपर्व समेत कई त्योहार आयोजित होने हैं। ऐसे में हम सबको याद रखना होगा कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक मास्क को ही वैक्सीन मानें और घर से बाहर जाने पर मास्क अवश्य लगाएं। दो गज की दूरी का भी पालन करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात को भी याद रखना होगा कि लाकॅडाउन गया है, कोरोना नहीं। त्योहार मनाएं या रोजमर्रा के काम करें, लेकिन इस बात को हमेशा याद रखें कि कोरोना अभी देश में जिंदा है।

                                                                                                                -राजेश महेशवरी

 

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