शतरंज की पहली चैंपियन पर देश को नाज

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Chess Champion Rohini Khadilkar

शतरंज की दुनिया का जाना पहचाना नाम रोहिणी खाडिलकर आज की लड़कियों के लिए एक सशक्त प्रेरणा स्रोत हैं। उन्हें तेरह साल की उम्र में ‘वुमन इंटरनेशनल मास्टर’ होने का भी खिताब मिल चुका है। वर्ष 1976 में रोहिणी पहली भारतीय महिला चेस खिलाड़ी रहीं। उन्होंने बहुत कम उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। उस जमाने में इस खेल में महिलाओं का बिल्कुल भी दबदबा नहीं था। रोहिणी का जन्म 10 नवंबर 1963 को हुआ था। उनके पिता अखबार चलाते थे। उनका चेस खेलने का सफर आसान नहीं था। एक रिपोर्ट के मुताबिक रोहिणी ने कभी बताया था कि जब वे पुरुषों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करती थीं तो वे उसे हराने के लिए सबकुछ किया करते थे। वे सिगरेट पीकर उनके मुंह पर धुंआ छोड़ते थे। इस तरह की हरकतें भी उन्हें खेलने से रोक नहीं पाईं।

उन्होंने पांच बार भारतीय महिला चैंपियनशिप और दो बार एशियाई महिला चैम्पियनशिप जीती। इसके अलावा उन्होंने 56 बार शतरंज में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेशों की यात्राएं कीं और 1980 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। रोहनी खादिलकर ने 1976 (कोट्टायम ), 1977 (हैदराबाद ), 1979 (चेन्नई ) में लगातार तीन राष्ट्रीय खिताब और 1981 (नई दिल्ली) और 1983 (कोट्टयम ) में मिलाकर कुल 5 राष्ट्रीय खिताब जीते। 1981 (हैदराबाद) और 1983 (मलेशिया) में उन्हे एशियन विजेता होने का गौरव हासिल हुआ। 1981 में तत्कालीन खुद प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने उन्हें शतरंज का भारतीय प्रतिनिधि घोषित करते हुए दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना था। शतरंज के शुरूआती दौर में इसके स्तर और भारतीय पुरुष शतरंज के स्तर में कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आता पर समय बीतने के साथ पुरुष शतरंज विश्वानाथन आनंद के पदार्पण से एक नए दौर में प्रवेश कर गया।

 

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