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मीडिया का सबसे बड़ा एडिटर

Sach Kahoon Desk Picture
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पत्रकारिता की दुनिया में जोसेफ पुलित्जर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 10 अप्रैल 1847 को हंगरी में हुआ था। जब वह हंगरी से अमेरिका 1864 में आए तो उनके पास न तो पैसे थे, न जान-पहचान और सबसे बड़ी बात उन्हें अंग्रेजी बोलनी तक नहीं आती थी। उन्हें एक समय वेटर तक की नौकरी करनी पड़ी थी। एक दिन लाइब्रेरी में उन्होने दो शतरंज के खिलाडियों को कुछ चालें समझाई, जिससे ये खिलाडी काफी प्रभावित हुए। उन्होने पुलित्जर से काफी चर्चा की। ये दोनों जर्मनी के मशहूर अखबार के संपादक थे। उन्होने पुलित्जर को अपने यहां नौकरी दी और इस प्रकार वह पत्रकार बन गए।

25 वर्ष की उम्र में वह प्रकाशक भी बन गए। सुबह से रात तक काम करने वाले पुलित्जर ने खोजी पत्रकारिता पर जोर दिया। जल्द ही वह और उनका अखबार मशहूर हो गए। उन्होने आर्थिक संकट में फंसे न्यूयार्क वर्ल्ड को खरीद उसकी भी कायापलट दी। पर खराब स्वास्थ्य के कारण 43 वर्ष की उम्र के बाद वे कभी अखबार के कार्यालय में नहीं गए। इसी दौरान उन्हे आवाज से एलर्जी हो गई और दो दशक तक अपनी नौका में एक साउन्ड प्रूफ कमरे में ही रहे। इसे लोग टावर आॅफ साइलेन्स के नाम से पुकारते थे। इसी समय के दौरान व्यावसायिक स्पर्धा में उन्हें कई अखबारों का सामना भी करना पड़ा।

1878 में उन्होंने सेंट लुइस पोस्ट डिस्पैच और उसके पांच साल बाद न्यूयॉर्क वर्ल्ड अखबार की शुरूआत की। ये दोनों अखबार बेहतरीन पत्रकारिता के उदाहरण माने गए थे। 29 अक्टूबर 1911 में इनकी मृत्यु हो गई। पुलित्जर अमेरिका के धनी लोगों में से एक थे। उन्होंने अपने कमाई में से एक मिलियन डॉलर कोलंबिया यूनिवर्सिटी को जर्नलिज्म स्कूल के लिए दे दिया था। 1917 से यूनिवर्सिटी ने पुलित्जर पुरस्कार देने शुरू किए।

 

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