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    पहले भी सात बार बदला गया है आधार वर्ष : राव इंद्रजीत

    Rao Inderjeet

    सरकार ने खपत संबंधी ताजा आर्थिक आंकड़ों को खारिज नहीं किया (Rao Inderjeet)

     पिछले वर्षों में देश में संरचनात्मक परिवर्तन हुए

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने वीरवार को कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के निर्धारण के लिए आधार वर्ष में परिवर्तन के संबंध में व्यक्त की जा रही आशंकाएं निराधार हैं और इससे पहले भी सात बार आधार वर्ष में परिवर्तन किया गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्यवन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने राज्यसभा में पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि उपभोक्ता व्यय में गिरावट नहीं आयी है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब आधार वर्ष बदला गया है इससे पहले वर्ष 1967, 1978, 1988, 1999, 2006 , 2010 और 2015 में भी इसमें परिवर्तन किया गया है।

    परिवर्तनों को बेहतर ढंग से दशार्ने के लिए समय समय पर बदला जाता है

    पिछले वर्षों में देश में संरचनात्मक परिवर्तन हुए हैं जिनमें सामाजिक-आर्थिक बदलाव , बिजनेस मॉडल में बदलाव, स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बढ़ना और खपत के आंकड़ों में बदलाव शामिल हैं। आधार वर्ष को इसलिए भी बदला जाता है जिससे कि अर्थव्यवस्था के व्यापक इंद्रधनुषी आयामों को इसमें शामिल किया जा सके। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र लेखा प्रणाली 2008 के अनुसार भी सकल घरेलू उत्पाद श्रंखला का आधार वर्ष अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को बेहतर ढंग से दशार्ने के लिए समय समय पर बदला जाता है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने खपत संबंधी ताजा आर्थिक आंकड़ों को खारिज नहीं किया है बल्कि उन्हें स्वीकार नहीं किया गया है। इन दोनों बातों में अंतर है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के चलते लोगों का अब स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक खर्च नहीं हो रहा है।

     

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