प्रेरणास्त्रोत: श्रेष्ठता की कसौटी

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Test of superiority

ऋषियों की सभा चल रही थी। एक ऋषि ने जानना चाहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में श्रेष्ठ कौन है? निर्णय के लिए ऋषियों ने भृगु को चुना। निर्णय करने के लिए भृगु तीनों देवों से मिलने चल पड़े। वे सबसे पहले ब्रह्मा के पास गए और नमस्कार किए बिना उनके पास जाकर बैठ गए। ब्रह्मा जी को क्रोध तो आया, परन्तु भृगु को निकट का समझकर शांत हो गए। ब्रह्मा में प्रतिक्रिया तो हुई, लेकिन विचार द्वारा उन्होंने उसे नियंत्रित कर लिया। अब भृगु शिव के पास गए। शिव जैसे ही भृगु को स्रेहवश आलिंगन करने के लिए आगे बढ़े, भृगु पीछे हट गए।

उन्होंने चिता की भस्म में डूबे शिव को अपना शरीर दूर रखने के लिए कहा। इस पर शिव कुद्ध हो गए और त्रिशूल लेकर भृगु को मारने दौड़े। अंतत: पार्वती के समझाने पर शिव शांत हुए। प्रतिक्रिया हुई। वह प्रकट रूप में सामने भी आई, लेकिन किसी अपने के परामर्श से वह शान्त हो गई। इसके बाद भृगु विष्णु के पास गए और सोते हुए विष्णु की छाती पर पैर रख दिया। विष्णु शांत ही नहीं रहे, वे भृगु के पैर पकड़कर बोले, ‘‘मेरा वक्षस्थल तो युद्ध में शत्रुओं के आघात से कठोर हो गया है, आपके कोमल पैरों को चोट तो नहीं लगी?’’ सभा में आकर भृगु ने सारा वृत्तांत सुनाया तो शांत और स्रेह वत्सल विष्णु को ही सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।

ठंड से लड़ने की मानसिक शक्ति

एक ठंडी रात में, एक अरबपति बाहर एक बूढ़े गरीब आदमी से मिला। उसने उससे पूछा, “क्या तुम्हें बाहर ठंड महसूस नहीं हो रही है, और तुमने कोई कोट भी नहीं पहना है?” बूढ़े ने जवाब दिया, “मेरे पास कोट नहीं है लेकिन मुझे इसकी आदत है।” अरबपति ने जवाब दिया, “मेरे लिए रुको। मैं अभी अपने घर में प्रवेश करूंगा और तुम्हारे लिए एक कोट ले लाऊंगा।” वह बेचारा बहुत खुश हुआ और कहा कि वह उसका इंतजार करेगा। अरबपति अपने घर में घुस गया और वहां व्यस्त हो गया और गरीब आदमी को भूल गया।

सुबह उसे उस गरीब बूढ़े व्यक्ति की याद आई और वह उसे खोजने निकला लेकिन ठंड के कारण उसे मृत पाया, लेकिन उसने एक चिट्ठी छोड़ी थी, जिसमे लिखा था कि, “जब मेरे पास कोई गर्म कपड़े नहीं थे, तो मेरे पास ठंड से लड़ने की मानसिक शक्ति थी। लेकिन जब आपने मुझे मेरी मदद करने का वादा किया, तो मैं आपके वादे से जुड़ गया और इसने मेरी मानसिक शक्ति को खत्म कर दिया। ” अगर आप अपना वादा नहीं निभा सकते तो कुछ भी वादा न करें। यह आप के लिये जरूरी नहीं भी हो सकता है, लेकिन यह किसी और के लिए सब कुछ हो सकता है।

 

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