लेख

आतंकवाद पर भारत की बेमिसाल एयर स्ट्राइक

Terrorism

भारतीय वायुसेना के विमानों द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना आतंकवादी हमलों के खिलाफ आजतक की सबसे बड़ी कार्यवाई है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार एयर स्ट्राइक 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक के तरह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तक सीमित नहीं रहा।खैबर पख्तूनख्वा स्थित जैश-ए-मोहम्मद के महत्वपूर्ण केंद्र बालाकोट को निशाना बनाया गया। 1971 के बाद पहली बार भारतीय सेना पाकिस्तान के बिल्कुल डीप एरिया में प्रवेश कर गई।आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में अब भारतीय रणनीति सुरक्षात्मक से आक्रामक हो चुकी है। साथ ही इसमें उत्कृष्ट सैन्य रणनीति के साथ सर्वश्रेष्ठ कूटनीतिक रणनीति का भी अद्भुत सम्मिश्रण देखा जा सकता है।

तीन पाकिस्तानी एफ-16 विमानों को भारत ने सफलतापूर्वक रोका: आतंकी संगठन जैश के कैंप पर भारतीय हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने बुधवार को तीन एफ-16 पाकिस्तानी विमानों ने भारत में प्रवेश की कोशिश की। लेकिन भारतीय वायुसेना ने सुखोई विमानों से उनमें से एक विमान को मार गिराया, जबकि दो विमानों को खदेड़ दिया। यहां यह तथ्य भी बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत ने पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान को पाक अधिकृत कश्मीर में ही मार गिराया। भारतीय सेना ने सुखोई विमानों के द्वारा पाकिस्तान के नापाक हरकतों पर रोक लगा दी है। इन सबसे भारतीय वायु सेना के जांबाजों के शक्तियों को स्पष्टत: समझा जा सकता है।

भारतीय कार्यवाई काफी हद तक अमेरिकी एबटाबाद कार्यवाई के समान: पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए जिस प्रकार 12 भारतीय मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया,वह अभूतपूर्व है। इस संपूर्ण सैन्य योजना का चक्रव्यूह भी शानदार रहा। एयरफोर्स के मिरज-2000 विमानों ने मंगलवार तड़के 3:30 बजे सीमा पार कर बालाकोट में आतंकी कैंप को नष्ट किया । इस संपूर्ण घटनाक्रम से, वर्ष 2011 में अमेरिका द्वारा की गई,एबटाबाद कार्यवाई की यादें जीवंत हो गई। सर्वप्रथम भारतीय वायुसेना ने 2011 अमेरिकी कार्यवाई की तरह ही एबटाबाद से करीब 60 किमी दूर बालाकोट पर हमला किया। स्वयं इस कार्यवाई के बाद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने भी कहा कि रात के अंधेरे के कारण पाकिस्तान शीघ्र भारतीय वायुसेना के विरुद्ध प्रतिरोध दर्ज नहीं कर पाया। इस संपूर्ण आॅपरेशन में 2011 के तरह पुन: पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को नाकाम बनाया गया।

अब प्रश्न उठता है कि इस एयर स्ट्राइक के लिए मिराज विमानों का ही प्रयोग क्यों?

सच कहा जाए तो 26 फरवरी के इस अभूतपूर्व एयरस्ट्राइक के बाद मिराज-2000 विमान को अब अगर मिरेकल लड़ाकू विमान कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।भारत ने 2011-12 के दौरान 49 मिराज-2000 विमानों को नए ग्लास, कॉकपिट्स, मिसाइलों, आत्म सुरक्षा सेट्स के साथ 2000-5 के विशिष्ट मानक पर अपग्रेड करने के लिए फ्रांस के साथ 17,547 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके बाद 2015 में मिराज 2000 विमानों को अपग्रेड किया गया था। इस तरह मिराज का उन्नत वर्जन दुश्मन के लिए अत्यंत खतरनाक है। यह बेहद छोटे रनवे पर भी उड़ान भर सकता है। साथ ही आपातकाल में हाईवे को रनवे बनाया जा सकता है। यमुना एक्सप्रेस पर भी यह सफल उड़ान भर चुका है।

मिराज-2000 में एक फ्लाई-बाय-वाटर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम है,जिसमें सेक्टेंट- वीई-130 एचयूडी है,जो उड़ान नियंत्रण, नेविगेशन, लक्ष्य की पहुंच और हथियार की पोजीशन फायरिंग से संबंधित डेटा प्रदर्शित करता है।यह गाइडेड लेजर बम से भी निर्देशित है। इन सबके प्रयोग से ही भारत न केवल अंधेरे में पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र को चकमा देने में सफल रहा,अपितु आतंकवादी ठिकानों पर अचूक हमला करने में भी सफल रहा। स्पष्ट है कि इस संपूर्ण कार्यवाई ने भारतीय वायुसेना के अत्यंत उच्चतम दर्जे की पारंगतता और व्यूह रचना को विश्व के समक्ष रखा है।

एयर स्ट्राइक के प्रभाव: यह कार्यवाई आने वाले दिनों में भी सीमापार आतंकवाद को लेकर भारतीय रूख में आमूलचूल बदलाव की शुरूआत है। भारत नेपाकिस्तान सहित संपूर्ण विश्व को स्पष्ट कर दिया है कि अब पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेलिंग के दिन अतीत का हिस्सा हो गए हैं। पाकिस्तानी नेता हर बात पर परमाणु हमले की धमकी देते रहते थे।स्पष्ट है कि अब परमाणु हमले की धमकी पाकिस्तानी आतंकवादियों को सुरक्षित नहीं रख पाएगी। आतंकवाद के बुनियादी ढ़ांचे को नष्ट करना मूलत: भारत के आत्मरक्षा के लिए की गई महत्वपूर्ण कार्यवाई है। लेकिन हम लोगों को याद रखना चाहिए कि यह आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई का प्रथम कदम है। अगर हम लोग यह सोचते हैं कि सीमापार आतंकवाद से हम लोग मुक्त हो जाएंगे, तो यह पूर्णत: गलत होगा। यह पाकिस्तान को कठोर संकेत देने वाला कदम है,परंतु इस मामले में हमें अतीत से सीख लेने की आवश्यकता होगी,तभी इस एयरस्ट्राइक के लाभों को दीर्घकालिक लाभ में बदला जा सकेगा,अन्यथा यह अल्पकालिक उपाय ही रह जाएगा।

अतीत में भी 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान पर काफी दबाव बना था,परंतु उसके बाद भारत के तरफ से कोई कठोर आक्रामक कार्यवाई नहीं हुई। स्वयं भारतीय सेना के रिपोर्टों के अनुसार 2016 में जिन टेरेरिस्ट लॉंच पैड्स को निष्क्रिय किया गया था,वे पुन: सक्रिय हो गए थे। ऐसे में आवश्यक है कि इजराइल के तर्ज पर भारत प्रत्येक पाकिस्तानी कार्यवाई के विरुद्ध कठोर प्रतिरोध दर्ज कराएं।

इसके अतिरिक्त हमें यह भी समझना चाहिए कि पाकिस्तान में मुख्यत: नीति निर्णय डीप स्टेट के द्वारा लिया जाता है, जिसके अंतर्गत सेना एवं प्रमुख कट्टरपंथी संगठन शामिल हैं। वहां के सेना एवं आतंकवादी संगठनों को भारत विरोध के नाम पर फंडिंग प्राप्त होती है।इस तरह से पाकिस्तान का अस्तित्व भारत-विरोध पर ही टिका है। ऐसे में आवश्यक है कि भारत अपनी कूटनीति एवं आक्रमकता का प्रयोग करते हुए चीन को भी प्रतिसंतुलित करें। चीन इस समय अमेरिका के साथ ट्रेड वार के कारण पहले से ही भारी आर्थिक दबाव में है। वहीं 28 वर्षों के बाद प्रथम बार भारतीय आर्थिक विकास दर चीन से काफी आगे है। ऐसे में चीन पहले ही अमेरिका का बाजार खो चुका है।

ऐसे में चीन अभी किसी भी हालत में भारतीय बाजार को खोना नहीं चाहेगा। इसके अतिरिक्त चीन के साथ भारतीय व्यापार पूर्णत: चीनी पक्ष में ही झुका हुआ है। सरल शब्दों में कहें तो इस समय चीन पर दबाव डालना बेहद आसान है। अगर चीन के द्वारा पाकिस्तानी आतंकवाद को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा,तो पाकिस्तान के रवैये में बदलाव अवश्य दिखेगा।इसके अतिरिक्त भारत को पाकिस्तान के निकट सहयोगी सऊदी अरब पर भी दबाव डालना चाहिए। खागोशी हत्याकांड के बाद उनकी स्थिति भी वैश्विक स्तर पर कमजोर हुई है। भारत फ्रांस, आस्ट्रेलिया इत्यादि देशों के द्वारा सऊदी अरब पर सामूहिक दबाव बनाया जा सकता है। अभी एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में ग्रे लिस्ट में रखा है।

अभी जिस तरह संपूर्ण विश्व में पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा है,उस जनमत का प्रयोग कर पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ब्लैक लिस्ट में भी डलवाया जा सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से सहयोग मिलना और भी बहुत ज्यादा कठिन हो जाएगा। साथ ही पाकिस्तान विदेशी निवेश और आर्थिक रूप से दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा।पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि अगर बालाकोट में एयरस्ट्राइक करने में सक्षम है,तो वहाँ से पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी भी ज्यादा दूर नहीं है।आज पुन: जिस तरह भारतीय वायु सेना ने भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे एफ-16 विमान को मार गिराया है,उससे पुन: भारतीय सेना की उत्कृष्टता प्रदर्शित हुई है।स्पष्ट है कि पाकिस्तान को अब बार-बार भारतीय धैर्य का परीक्षण से बचना चाहिए और आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।

लेखक: राहुल लाल

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