सरसा: बच्चों को राम-नाम की राह पर आगे बढ़ाओ : पूज्य गुरु जी

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शाह सतनाम जी धाम में नामचर्चा आयोजित, गाया गुरुयश

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सरसा। रविवार को शाह सतनाम जी धाम में नामचर्चा का आयोजन किया गया। नामचर्चा में बड़ी संख्या में साध-संगत ने शिरकत की। नामचर्चा की शुरूआत पवित्र नारा ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ और अरदास विनती के साथ हुई। इसके पश्चात कविराजों ने विभिन्न भक्तिमय भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। (Satsang) इस अवसर पर बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रिकॉर्डिड पावन वचन चलाए गए।

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रिकॉर्डिड वचनों में पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इस घोर कलियुग में मालिक की याद में आकर बैठना बहुत बड़ी बात है। लेकिन असली खुशी तभी मिलती है जब सत्संग में आकर बैठो, ध्यान से सुनो और फिर अमल करो। सत्संग सुनने से मन काबू में आता है। साथ-साथ दीन-दुखियों और निराश्रयों की मदद करो, भला करो तो मालिक आपको दु:ख, तकलीफ आने ही नहीं देगा।

आपजी ने फरमाया कि वो परम पिता परमात्मा दया का सागर है। बेपरवाह जी फरमाते हैं कि इन्सान अपनी हैसियत को भूल गया है। परम पिता परमात्मा ने मनुष्य का बड़ा ऊंचा दर्जा दिया है, जिसके लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। देवी देवता भक्ति करते हैं कि हे परमात्मा! कब हमें मनुष्य के रूप में जन्म मिलेगा और कब हम आपसे मिल सकेंगे। राम-नाम का जाप करके और उसकी बनाई खलकत का भला करके इन्सान मनुष्य जन्म का सदुपयोग कर सकता है। ऐसा करने से उसके दोनों जहां संवर जाएंगे। यहां भी खुशियां और अगले जहान भी खुशियां जरूर हासिल होंगी।

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पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि मोह-ममता में इन्सान अंधा हो जाता है। महाराष्टÑ में धृतराष्टÑ ने मोह ममता में फंसकर अपना सब कुछ गंवा लिया। वह आँखों से अंधा था। भाई ने उसे राज का नुमाइंदा बनाया। भाई कुछ वक्त बाद गुजर गया। धृतराष्टÑ ने भाई के दु:ख में आंसू कम बहाए और गद्दी पर बैठने में थोड़ा वक्त भी न लगाया।

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उसने यहीं पर बस नहीं किया; भाई के बच्चों को गद्दी सौंपने की बजाय लालच में फंस गया और सोचने लगा कि मेरा बेटा ही गद्दी पर बैठे। मोह माया में फंसकर उसने बेटे को शुरू से ही जहर की गंदल (अहंकारी, ईर्ष्यालू, कपटी और क्रोधी) बना दिया और आगे चलकर वही बेटा पूरे परिवार के विनाश का कारण बन गया। वो धृतराष्टÑ मशहूर हो गया, क्योंकि वो अकेला था।

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इस कलियुग में धृतराष्टÑों की कमी नहीं है। ऐसे लोग भी देखने में आते हैं, जो बच्चों के मोह फंसकर मालिक की राह से मुनकर हो जाते हैं। वहीं जो सुमिरन करता है और जिसका सतगुरु पर दृढ़ विश्वास है, सत्संग सुनकर अमल करता है, वो धृतराष्टÑ बनने से बच जाता है। वरना अपने बच्चों को जहर की गंदल बनाने में लोग दिन-रात लगे हुए हैं। ऐसे लोगों को अपने बच्चों की गलतियां नजर नहीं आती, वो उन्हें दूध से धुले हुए नजर आते हैं। ऐसे लोग संसार के दूसरे लोगों की ही गलतियां देखते हैं और अपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डालते रहते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए।

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आपजी ने फरमाया कि अगर आपको बच्चे के अंदर गलती नजर आती है तो उसे रोको, समझाओ और गलत राह पर जाने से उसकी नकेल कसो, ना कि शाबासी दो। यदि उनकी गलती पर पर्दा डालोगे तो ये आपके और उस बच्चे दोनों की बेड़ी में बट्टे बन जाएंगे। इसलिए मोह ममता में फंसकर अपने बेटे, बेटी, माँ-बाप के माह में फंसकर उनके बुरे काम में मदद ना करो। उन्हें राम, अल्लाह, वाहेगुरु की राह पर लगाओ, मालिक की सृष्टि की सेवा में लगाओ। यदि ऐसा करोगे तो मालिक आपको खुशियां बख्शेगा ही बख्शेगा।

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नामचर्चा के दौरान सेवादारों ने शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग की सदस्यता भी ली। वहीं दो नवयुगल डेरा सच्चा सौदा की मर्यादानुसार दिल जोड़ माला पहनाकर विवाह बंधन में बंधे। इसके पश्चात आई हुई साध-संगत को प्रशाद और लंगर-भोजन खिलाया गया।

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