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Friday, April 10, 2026
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    रूहानी करिशमा : 15 मिनट का रहस्य

    Spirituality

    हमारे गांव का एक सत्संगी था, जिसे नाम लिए थोड़ा ही समय हुआ था। कुछ दिनों के बाद ही बुरी संगत में पड़कर उसने वचन यानि परहेज तोड़ दिए और मन के झांसे में आकर उसने अपने सतगुरू की निंदा करनी शुरू कर दी। वह एक दिन अपने साथी को कहने लगा कि मुझे रात को सच्चे सौदे वाले बाबा जी ने दर्शन दिए और कहा कि तुझे परसों सुबह सवा सात बजे लेकर जाएंगे, तैयार रहना। पर मैं इस बात को नहीं मानता। निश्चित दिन आने पर सुबह-सुबह उसने अपने साथी से समय पूछा उस समय सात बज चुके थे।

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    इस पर वह कहने लगा कि क्या मेरे जाने में 15 मिनट ही बचे हैं? उसने इसे मजाक समझ लिया और वह शौच के लिए चला गया और शौच जाने के बाद वह हाथ धो रहा था तो उस समय पूरे सवा सात बजे हुए थे। उसी वक्त पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज उसे लेकर जाने के लिए आ गए और उसके सभी रिश्तेदारों व दोस्तों ने देखा कि उसके हाथ में पानी की अंजुली भरी ही रह गई और उसने सही सवा सात बजे वहीं चोला छोड़ दिया और मालिक का नूरी स्वरूप उसको ले गया। शिष्य बेशक सतगुरू को छोड़ देता है पर सतगुरू उसका साथ कभी नहीं छोड़ता है।                                                                                                              -श्री दर्शन सिंह, मिड्डू खेड़ा(पंजाब)

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