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शिक्षा माफियाओं के लिए ललकार है ‘सुपर-30’

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 ऐसे पल विरले लोगोें के जीवन में ही आते हैं जब उनका संघर्ष फिल्मों के जरिए सिनेमाई पर्दों पर दिखाया जाए, कैसे महसूस कर रहे हैं आप?

निश्चित रूप से मैं किस्मत का धनी इंसान हूं। तमाम समस्याओं के बावजूद भी आज ईश्वर ने इतना सबकुछ दिया है। युवा आज मुझे अपना प्रेरणादायक मान रहे हैं, ये गर्व वाली बात है मेरे लिए। शिक्षा माफियाओं से जब मैंने सीधे लोहा लिया था, तो मुझे लगा था कि कभी भी मारा जाउंगा। लेकिन जिसको राखे साईंया, तो मार सके न कोय! फिल्म बनने से इतना फायदा जरूर हुआ, जिस सच्चाई को लोग नहीं जानते हैं, उसे जान जाएंगे। कमाई के चलते लोगों ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है। यही कारण है कि मध्यम वर्गों की पहुंच से शिक्षा दिनोंदिन दूर होती जा रही है। लोग शिक्षा नियमों का खुलेआम मखौल उड़ा रहे हैं। बड़े लोग इस क्षेत्र में दांव लगा रहे हैं। शिक्षातंत्र पर उनका एकतरफा कब्जा हो गया है। धनाड्य, नेता, व्यापारी, अधिकारी सब शिक्षा की आड़ में व्यापार कर रहे हैं। सिनेमा से लोग जानेंगे कि कितना घाल-घपला होता है। रही बात मेरे महसूस करने की तो लोगों का प्यार पाकर खुद को भाग्यशाली समझ रहा हूं।

 आपको नहीं लगता कि कोई ऐसी व्यवस्था बने, जिससे कोचिंग की जरूरत ही खत्म हो जाए?

हिंदुस्तान का प्रत्येक दूसरा आदमी यही चाहता है। शिक्षा का जबसे बाजारीकरण हुआ है, तभी से शिक्षा आम लोगों से दूर हो गई है। मैंने हमेशा से कोचिंग तंत्र का विरोध किया है। तभी तो मैंने फ्री में पढ़ाने का निर्णय लिया था। सरकार को स्कूल-कालेजों में ही शिक्षा का स्तर इतना दुरूस्त करना होगा जिससे कोचिंग पढ़ने की आवश्यकता की न हो। लेकिन ऐसा संभव होना मुमकिन नहीं? शिक्षा से कईंयों की दुकानें चल रही हैं, अगर ऐसा हुआ तो वह सड़कों पर आ जाएंगे। कोचिंग माफियाओं पर सरकारी हंटर चलाने की बहुत आवश्यकता है।

 कोचिंग पर विराम लगे और शिक्षा सबके लिए एक जैसी हो इसके लिए क्या उपाए होने चाहिए?

दक्ष और निपुण नए शिक्षकों की खेप को तैयार करना होगा। उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। उनके लिए स्वच्छ वातावरण तैयार किया जाए। साथ ही नकारा शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निठल्ले अफसरों को विभिन्न विभागों से हटाने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है। ठीक उसी तरह से शिक्षा विभाग में भी किया जाना चाहिए। कोचिंग पर नए कानून बनाने की जरूरत है। सरकारी तंत्र से जुड़े टीचरों पर ट्यूशन पढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाए। ऐसा करने पर ही शिक्षा का भला हो सकता है। नही ंतो जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा। कोचिंग के चलते गांव-कस्बों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा मात्र सपना बनकर रह गई है।

 करीब 15 वर्ष पहले जब आपने सुपर-30 की नींव रखी थी, क्या चल रहा था आपके मन में?

मैं बुहत दुखी था। दुखी इसलिए था कि सरकारें यह कहती हैं कि शिक्षा पर सबों का पूर्ण अधिकार होता है। लेकिन इसकी सच्चाई उस वक्त पता चली, जब प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मैं खुद पैसों के चलते पराजित हुआ। आपके पास पैसा है तो किसी भी परीक्षा में जा सकते हो, अगर नहीं है तो भगा दिए जाओगे। सुपर-30 की स्थापना इसी उद्देश्य से की थी कि गरीब-निर्धन बच्चों को फ्री शिक्षा दिलवा सकूं। शुरूआत में जब मेरे पढ़ाए हुए तीस बच्चे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल हुए तो तब निर्णय लिया, अब पीछे मुड़कर नहीं देखना। यात्रा आज यहां तक पहुंच गई है जो आप लोगों के सामने है।

 फ्री में शिक्षा देने की यात्रा निरंतर चलती रहेगी?

कोशिश तो यही रहेगी। बाकी भगवान के आशीर्वाद पर निर्भर करेगा। देखिए, मेरी मुहिम शिक्षा माफियाओं के लिए एक ललकार है और रहेगी। मेरे से जितना बन पड़ेगा, मैं ताउम्र उन बच्चों का भला करता रहूंगा जो आईआईटी जैसी परीक्षाओं में जाना चाहते हैं। फ्री में शिक्षा देकर जब मैंने सीधे शिक्षा माफियाओं से पंगा लिया तो मुझे एहसास हो गया था कि मैंने बड़े लोगों से पंगा लिया है। मैं उसी दिन से समस्याओं का सामना कर रहा हूं जब मैंने प्राइवेट कोचिंग छोड़ी थी। फ्री में शिक्षा बांटने को लेकर मैं सरकारी तंत्र की भी आंखों के खटकने लगा था। माफियाओं की तरफ से हर तरह की यातनाएं दी गईं। लेकिन मैं रूका नहीं, चलता रहा।

 भविष्य की क्या योजनाएं हैं और विस्तार देना है या किसी विश्वविद्यालय का हिस्सा बनना है?

लोगों की मुझसे बहुत उम्मीदें हैं। फिल्म आने के बाद मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मैं अपने काम में विस्तार करना चाहता हूं इसलिए एक बड़ी-सी स्कूलनुमा पाठशाला खोलना चाहता हूं जिसमें एक साथ हजार के करीब छात्र पढ़ाई कर सकें, जिसकी रीच सिर्फ बिहार तक सीमित न रहे, पूरे देश के बच्चे शामिल हो सकें। मैं उस लम्हें को नहीं भूलना चाहता जिसमें धन के अभाव में मेरी पढ़ाई बीच में छूटी, वह किसी और के साथ न हो। मेरा कैम्ब्रिज जाने का सपना जिस तरह धूमिल हुआ वैसा किसी के साथ न हो। बड़ी पाठशाला को स्थापित करने को लेकर मेरी पूरी प्लानिंग हो चुकी है। उसपर काम चल रहा है।

आपने कभी किसी से मदद मांगी?

सहयोग मांगा नहीं, लेकिन देने वालों की लंबी कतारें रहीं। प्रधानमंत्री, व्यवसाई महेंद्र बिरला, मुकेश अंबानी व बिहार सरकार के अलावा देश के अनगिनत प्रबुद्व लोगों ने मुझे सहयोग देने को कहा। लेकिन मैंने उनके आग्रह को आशीर्वाद के तौर पर ग्रहण किया पर किसी से कोई मदद नहीं ली। प्रभू से बस इतनी मांग रखता हूं, किसी तरह से सुरक्षित रहूं। मेरे पर कई बार जानलेवा हमला हुआ है। बिहार सरकार ने मेरी सुरक्षा में चार जवान तैनात किए हैं। अगर सुरक्षा नहीं मिली होती तो शायद मैं अब तक जिंदा भी नहीं होता। शिक्षा माफियाओं का मैं शुरू से दुश्मन रहा हूं। फिल्म के बनने से पहले तक मुझे काफी डराया-धमकाया गया। उनको इस बात का डर था अगर फिल्म बन गई तो इस आदमी की सच्चाई से दुनिया वाकिफ हो जाएगी। ये रातों रात अमर हो जाएगा। कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
-रमेश ठाकुर

 

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