मजबूत कलाई ही है आपकी ताकत की पहचान…

योग, सम्पूर्ण शरीर का व्यायाम है। बल्कि इसे यूं कहना ज्यादा ठीक लगता है कि ये संपूर्ण व्यायाम है। कोई एक्सरसाइज किसी अंग को फायदा पहुंचाती है तो कोई एक्सरसाइज किसी दूसरे अंग को। लेकिन योग न सिर्फ शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी फायदा पहुंचाता है। इसीलिए योग को सम्पूर्ण व्यायाम कहा जाता है। ऐसा नहीं है कि योग को किसी खास अंग को मजबूत करने या उसमें रक्त संचार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। भारत के महान योगियों ने योग विज्ञान में इसके लिए भी आसनों का निर्माण किया है। इसीलिए इस आर्टिकल में हम आपको हाथों को मजबूत बनाने वाले योगासनों के बारे में जानकारी देंगे। ये योगासन हाथों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में भी मदद कर सकते हैं।

हाथों के लिए योगासन

बकासन

बकासन इंटरमीडिएट/बेसिक लेवल की कठिनाई वाला हठ योग आसन है। इसे एक बार में अधिकतम 30 से 60 सेकेंड तक ही करना चाहिए। इसे करने से पीठ के ऊपरी हिस्से को स्ट्रेच मिलता है। जबकि आर्म्स, पेट का निचला हिस्सा और कलाइयां मजबूत होती हैं। इस आसन को करने के लिए मजबूत कोर मसल्स मजबूत बेस तैयार करती हैं। मजबूत कोर मसल्स ही आपको अपने घुटनों को जमीन से उठाने और अपर आर्म्स के पास लाने की ताकत देती हैं। इसके लगातार अभ्यास से शरीर इतना हल्का होने लगता है कि पूरे शरीर का वजन झेलने की ताकत कलाइयों में आ जाती है।

बकासन करने की विधि

  • बकासन की शुरूआत पर्वतासन से करें।
  • अपने दोनों पैरों को करीब लाएं और हाथों को जमीन पर लगाएं।
  • ध्यान रहे कि आपके दोनों हाथ कंधे की चौड़ाई के बराबर ही जमीन पर लगे हों।
  • अब अपने हिप्स को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • टेंशन कोर मसल्स में होगी क्योंकि घुटने अपर ट्राइसेप्स के करीब आ रहे हैं।
  • काकासन के लिए कुहनी को थोड़ा मोड़ें ताकि घुटने अपर आर्म्स पर टिक सकें।
  • सामने की तरफ देखें और अपने पैरों को धीरे से फर्श से उठाएं।
  • शरीर का वजन धीरे-धीरे हाथों पर लेकर आएं।
  • इस मुद्रा में कुछ सेकेंड तक बने रहें।
  • अगर बकासन करना है तो हाथों को ज्यादा मजबूत बनाना होगा।
  • धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं और उत्तानासन में बैठ जाएं।

अधोमुख श्वानासन

जब आप अधोमुख श्वानासन का अभ्यास करते हैं उस वक्त आपके शरीर का वजन पूरी तरह से हाथों और पैरों पर होता है। इससे इन दोनों अंगों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और वह शरीर का सही संतुलन बनाने में मदद करती हैं। अधोमुख श्वानासन में सिर दिल से नीचे की तरफ होता है जबकि आपके हिप्स ऊपर की तरफ उठे हुए होते हैं। इस आसन के अभ्यास से गुरुत्व बल की मदद से सिर की ओर नए रक्त की आपूर्ति बढ़ती है। इसीलिए ये आसन रक्त संचार बढ़ाने में मदद कर पाता है।

अधोमुख श्वानासन करने की विधि
  • योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • इसके बाद सांस खींचते हुए पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं।
  • अब शरीर टेबल जैसी आकृति में आ जाएगा।
  • सांस को बाहर निकालते हुए धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • कुहनियों और घुटनों को सख्त बनाए रखें।
  • ये तय करें कि शरीर उल्टे ‘वी’ के आकार में आ जाए।
  • इस आसन के अभ्यास के दौरान कंधे और हाथ एक सीध में रहें।
  • पैर हिप्स की सीध में रहेंगे और टखने बाहर की तरफ रहेंगे।
  • हाथों को नीचे जमीन की तरफ दबाएं।
  • गर्दन को लंबा खींचने की कोशिश करें।
  • कान, हाथों के भीतरी हिस्से को छूते रहें।
  • निगाह को नाभि पर केन्द्रित करने की कोशिश करें।
  • इसी स्थिति में कुछ सेकेंड्स तक रुके रहें।
  • उसके बाद घुटने जमीन पर टिका दें।
  • मेज जैसी स्थिति में? फिर से वापस आ जाएं।

उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन

उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन को करने से हाथों, पैरों, टखनों और घुटनों में खिंचाव आता है, जो उन्हें मजबूत बनाने में बहुत सहायक होता है। इस आसन को करते समय जिस पैर पर आप खड़े होते है, उसे खासतौर पर मजबूत बनाता है। ये शारीरिक संतुलन को बनाये रखने में सहायक होता है।

उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन करने की विधि

  • योग मैट पर ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं।
  • सांस को अंदर लें।
  • दाएं पैर को ऊपर उठाकर घुटने को पेट के पास ले कर आयें।
  • इस स्थिति में दाएं कूल्हे पर खिंचाव महसूस होगा।
  • संतुलन बनाये रखने के लिए अपना ध्यान बाएं पैर पर रखिये।
  • इसके बाद बायां हाथ कमर पर रखें।
  • दाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पकड़ लें।
  • दाएं पैर को आगे की तरफ बढ़ाएं।
  • प्रयास करें कि आपका पूरा पैर सीधा हो जाए।
  • साथ ही जितना ऊपर हो सके, उतना ऊपर कर लें।
  • इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए सिर को घुटने से छुएं।
  • कम से कम 5 बार सांस को अंदर लें और बाहर की तरफ छोड़ें।
  • सांस को अंदर लेते हुए अपने सिर को ऊपर उठायें।
  • सिर को घुटने से छूने में कठिनाई हो तो सिर को जमीन की ओर झुका कर रखें
  • दृष्टि को सामने की तरफ रखते हुए सांस को छोड़ें।
  • दाएं पैर को बाहर की ओर घुमायें। संभव हो सके तो 90 डिग्री तक घुमाएं।
  • इस मुद्रा में आने पर सिर को बाईं ओर घुमाएं।
  • तब तक करना है जब तक आपकी दृष्टि बाएं कंधे पर ना आ जाए।
  • पांच बार सांस अंदर लें और बाहर को छोड़ें।
  • इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रुकें।
  • अब 5 बार सांस लेने के बाद इस मुद्रा से बाहर आ सकते हैं।
  • समय सांस अंदर लेते हुए सिर को वापस सामने की ओर ले जाएं।
  • दाएं पैर को भी सामने की ओर लाएं।
  • फिर से एक बार सिर को घुटने पर टिकाएं और वापस ऊपर की तरफ ले आएं।
  • इस समय पांच बार सांस नहीं लेनी है।
  • अब दाएं हाथ को भी कमर पर रख लें, लेकिन दाएं पैर को ऊपर ही रखें।
  • इस स्थिति में भी पांच बार सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें।
  • आसन को समाप्त करने के लिए अपने दाएं पैर को नीचे कर लें।
  • अब ताड़ासन की मुद्रा को समाप्त कर दें।
  • अब यही प्रक्रिया बाईं ओर भी दोहराएं।

टिट्टिभासन

योग साइंस के अनुसार, टिट्टिभासन हाथ के बल पर शरीर का बैलेंस बनाने वाले प्रमुख आसनों में से एक है। टिट्टिभासन के निरंतर अभ्यास से शरीर को ढेरों फायदे मिलते हैं। इसे निरंतर करने से इनर ग्रोइन और बैक टोरसो को काफी मजबूती मिलती है। टिट्टिभासन के अभ्यास की निरंतर कोशिश करने पर कुछ ही दिन में आप सहज होने लगेंगे और आपके हाथों में गजब की शक्ति का अनुभव होने लगेगा। इसके अलावा आपको अपनी टांगों में भी ऊर्जा जाग्रत होती महसूस होने लगेगी।

टिट्टिभासन करने की विधि

  • योग मैट पर अधो मुख श्वानासन से शुरूआत करें।
  • आसन में ही पैरों से चलते हुए धीरे-धीरे हाथों के पास तक आ जाएं।
  • फिर, हाथों को पैरों के बीच से निकालकर पिंडलियों को पकड़ लें।
  • अपनी बाहों और कंधों को जांघों के पीछे लाएं, जहां तक उन्हें ला सकते हैं।
  • हथेलियों को पैरों के पीछे रखें जैसे एड़ी को अंगूठे और तर्जनी ने पकड़ा हुआ हो।
  • घुटनों को मोड़ें और बैठने की कोशिश करें।
  • पैरों के पीछे का हिस्सा जितना हो सके कंधे के करीब रखने की कोशिश करें।
  • उंगलियां और हथेलियां फैल जाएं, तो शरीर धीरे-धीरे टिकाने की कोशिश करें।
  • पैरों को फर्श से उठाएं।
  • पैरों को सीधा करें। स्थिर हो जाते हैं, तो अपनी बाहों को सीधा करें।
  • ऊंचाई बढ़ाने के लिए हाथों के बल पर जांघों को सिकोड़ने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकेंड के लिए इसी स्थिति में रुकें और फिर छोड़ दें।

चतुरंग दंडासन

हाथ हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो किसी भी कार्य को करने और वजन को उठाने में हमारी मदद करता है। यह दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में सहायता करता है। जब आप चतुरंग दंडासन करते हैं, तो आपके शरीर का पूरा भार आपके हाथ और कलाई पर आ जाता जाता है, जो की उनको मजबूत करने में मदद करता है।

चतुरंग दंडासन करने की विधि

  • योग मैट पर अधो मुख श्वानासन में लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को भुजंगासन के समान रखें।
  • दोनों हाथ जमीन पर अपने कंधों से आगे रखेंगे।
  • आपकी उंगलियां सामने की ओर रहेंगी।
  • दोनों पैरों की उंगलियों को जमीन पर सीधे रखें।
  • जिससे शरीर का वजन उठाया जा सके।
  • पैरों की उंगलियों के बल धीरे-धीरे दोनों घुटनों को ऊपर उठाएं।
  • सांस को अंदर लेते हुये दोनों हाथों पर शरीर के वजन को उठायें।
  • अपर-आर्म और फोर-आर्म के बीच कोहनी पर 90 डिग्री का कोण बनाएं।
  • अब पूरा शरीर फर्श के समानांतर आ जायेगा।
  • इस स्थिति में शरीर पूरी तरह से ऊपर रहेगा।
  • बस दोनों हाथ और पैर की उंगलियां जमीन पर रहेंगी।
  • शरीर का संपूर्ण भार इन्हीं पर रहेगा।
  • इस आसन को आप 10 से 30 सेकंड के लिए करें।
  • इसके बाद सांस को छोड़ते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

शलभासन

शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छी मुद्रा है। यह हमारे शरीर के हाथों, जांघों, पैरों और पिंडरी को मजबूत करता है, इसके साथ यह पेट की चर्बी को कम करके उसे सुंदर बनाता है। रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छा योग है।

शलभासन करने की विधि

  • योग मैट पर उलटे पेट के बल लेट जाएं।
  • आपकी पीठ ऊपर की ओर रहे और पेट नीचे जमीन पर रहे।
  • दोनों पैरो को सीधा रखें।
  • पैर के पंजे को सीधे तथा ऊपर की ओर रखें।
  • दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें।
  • दायां हाथ दायीं जांघ के नीचे और बायां हाथ बायीं जांघ के नीचे दबा लें।
  • सिर और मुंह को सीधा रखें।
  • गहरी सांस अंदर की ओर लेते रहें।
  • दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें।
  • अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें।
  • इस मुद्रा में कम से कम 20 सेकंड तक रहने की कोशिश करें।
  • इसे अपनी क्षमता के अनुसार कम ज्यादा कर सकते हैं।
  • सांस को बाहर छोड़ते हुए पैरों को नीचे करते जाएं।
  • पुन: प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
  • इस अभ्यास को 3-4 बार दोहराएं।

चक्रासन

चक्रासन एक बैकबेंड योग हैं। इसे अंग्रेजी में व्हील पोज भी कहते हैं। इस मुद्रा में पहिये के जैसे ऊपर की ओर झुकाव होता है। इस आसन से रीढ़ की हड्डी में बहुत लचीलापन आता हैं। बैक ब्रिज एक्रोबेट या जिमनास्टिक करने वालों की दिनचर्या का यह एक मुख्या हिस्सा होता है। ये हाथों को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।

चक्रासन करने की विधि: –

  • योग मैट पर उष्ट्रासन या कपोतासन में खड़े हो जाएं।
  • हाथों को ऊपर की ओर सीधा खड़े करें।
  • गर्दन को पीछे की ओर करते हुए दोनों हाथों को भी पीछे की ओर झुकाएं।
  • कमर को पीछे की ओर झुकाते जाएं।
  • दोनों हाथों को पीछे जमीन से टिका लें।
  • दोनों हाथों और पैरो को पास लाएं।
  • इस स्थिति में कम से कम 15 से 20 सेकेंड के लिए रुकें।
  • प्रारंभिक स्थिति में आने के लिए हाथों और पैरों को झुकाएं।
  • पैरों को सीधा करें और सामान्य हो जाएं।

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