हिंसक टकराव रोका जाए

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farmer protest

गत शनिवार को किसानों द्वारा हरियाणा के बसताड़ा टोल प्लाजा पर पुलिस लाठीचार्ज में दर्जनों से अधिक किसान घायल हुए। वर्तमान दौर में यह टकराव बेहद चिंता का विषय है। किसान संगठन पिछले नौ महीनों से लगातार केंद्र सरकार द्वारा पारित किए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन में किसानों द्वारा केन्द्र व राज्यों में भाजपा नेताओं के घेराव के चलते आए दिन कहीं-न-कहीं झड़प या लाठीचार्ज आम बात हो गई है। बसताड़ा में किसान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को काले झंडे दिखाने के बाद भाजपा की प्रदेश स्तरीय मीटिंग का विरोध करने के लिए शहर की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस के रोकने पर किसानों ने जाम लगा दिया। किसानों द्वारा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की गाड़ी का घेराव करने व गाड़ी पर डंडा मारने की बात भी मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।

उधर एसडीएम की भी एक वीडियो वायरल हुई, जिसमें वो पुलिस जवानों को किसानों के सिर फोड़ने तक की छूट दे रहे हैं, यह बेहद गंभीर मामला है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लाठीचार्ज करने की जांच के आदेश दिए हैं। आंदोलन में कानून व्यवस्था की समस्या एक काफी गंभीर मसला बन गई है। सरकार और किसान संगठन, दोनों पक्षों को इस मसले को संयम और जिम्मेदारी से हल करना चाहिए। अगर अब तक के घटनाक्रम को देखें तो नौ महीनों के इस किसान आंदोलन में तीन बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। विगत वर्ष 26 नवंबर को किसानों के दिल्ली में दाखिल होते वक्त तोड़फोड़ की कई बड़ी घटनाएं हुर्इं। इस वर्ष 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों के मार्च दौरान एक किसान की मौत हुई।

किसानों और सरकार की 12 दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। किसान नेता इस बात पर अड़े नजर आ रहे हैं कि वे कृषि कानूनों को रद्द करने तक संघर्ष करते रहेंगे। ताजा दौर चिंताजनक बनता जा रहा है। यह बड़ा अहम प्रशन है कि आखिर आंदोलन में ऐसे मोड़ कैसे आ जाते हैं। जब टकराव इतने बड़े स्तर पर पहुंच जाता है। एक स्वतंत्र देश और लोगों की चुनी हुई सरकार होने के कारण टकराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। दोनों पक्षों को मामले का शांतिपूर्ण ढंग से निष्पक्ष भाव से हल निकालना चाहिए।

 

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