लॉकडाऊन। सड़कों पर उतरे हजारों मजदूर, प्रशासन के फूले हाथ-पांव

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Workers' fury demonstration

कर्फ्यू में वेतन न मिलने पर मजदूरों के गुस्से में आया उबाल, ‘सोशल डिस्टैंस’ की जमकर उड़ी धज्जियां

संगरूर/भवानीगढ़(विजय सिंगला)। बठिंडा -चण्डीगढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित आईएएल फैक्ट्री में ठेकेदार अधीन काम करते अलग-अलग राज्य के अलग अलग सैंकड़ों मजदूरों ने कोरोना वायरस दौरान वेतन न मिलने व खाने का प्रबंध न होने के खिलाफ अपना संघर्ष तेज करते आज दूसरे दिन भवानीगढ़ से 7 किलोमीटर पैदल चल कर फैक्ट्री के गेट के आगे धरना शुरू कर दिया। मजदूरों के इस गुस्सा को देखते प्रशासन और पुलिस के हाथ पांव फूल गए।

धरने को संबोधित करते हुए जमीन प्राप्ति संघर्ष समिति के नेता मुकेश मलौद, गुरमुक्ख सिंह, फैक्ट्री मजदूर राजेश कुमार, लवकुश कुमार, राम बाबू, सिवराज कुमार, मिथलेश कुमार, शिव प्रकाश कुमार, रमिन्दरा सिंह, विनय कुमार, प्रदीप कुमार और राहुल कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस के बचाव के लिए लगाए लॉकडाऊन दौरान मजदूरों को वेतन व बोनस देने से मैनेजमैंट ने जवाब दे दिया।

मजदूरी बन्द होने के कारण वह अपने घर का खर्चा चलाने से बेबस हो गए हैं

उन्होंने कहा कि मैनेजमैंट ने उनके खाने का भी कोई प्रबंध नहीं किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मजदूरों ने भवानीगढ़ में अपने क्वार्टरों के आगे रोष प्रदर्शन किया था, परन्तु मैनेजमैंट की ओर से मसला हल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आज भुखमरी के शिकार मजदूरों को लंबा पैदल कूच कर फैक्ट्री के आगे धरना लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसी दौरान एसडीएम व डीएसपी संगरूर सत्तपाल शर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी धरने वाली जगह पर पहुंच गई। मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ रोष जाहिर किया कि उनको अपने राज्यों में भेजने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

इस दौरान प्रशासन के प्रयासों से मजदूरों के सदस्यों के साथ फैक्ट्री के अधिकारियों की मीटिंग हुई, जिसमें मजदूरों को 5-5 हजार रुपए के कूपन देने और ओवरटाईम सोमवार से लागू करने का वायदा किया गया, परन्तु वेतन व अन्य मांगों पर सहमति न होने के कारण धरना जारी है।

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