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साक्षात्कार: निचले स्तर से खिलाड़ियों को उभारा जाएगा : संदीप सिंह

किस्मत के धनी रहे सन्दीप सिंह हाकी खिलाड़ी से शुरूआत करके आज हरियाणा के खेल मंत्री बन चुके हैं। बेस्ट फ्लकर के रूप में उभरे सन्दीप सिंह को 2003 में युवराज सिंह के चोटिल होने पर अचानक भारतीय टीम में शामिल किया गया था और उस समय वे सिर्फ 18 साल के ही थे। बाद में संदीप सिंह हॉकी इंडिया के कप्तान भी बने। एक समय गोली लगने की वजह से वह पैरालिसिस का शिकार हुए और डाक्टरों ने खिलाड़ी के तौर पर कॅरिअर खत्म होने का ऐलान तक कर दिया। इस दौर से लड़ कर उभरे संदीप सिंह ने फिर से हॉकी के मैदान में न सिर्फ वापिसी की बल्कि मैदान पर कई गोल दागे। उसके बाद कांग्रेस सरकार ने संदीप सिंह को हरियाणा में डीएसपी बनाया और अब वे पिहोवा से चुनाव जीत दर्ज करने के बाद मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बनाए गए हैं। संदीप सिंह को खेल और युवा मामलों के विभाग दिए गए हैं। संदीप सिंह ने खेल विभाग का कार्यभार संभालने के बाद सच कहूँ के चंडीगढ़ से ब्यूरो चीफ अश्वनी चावला से खास बातचीत में भविष्य का प्लान बताने के साथ रोड मैप का जिक्र किया।

खिलाड़ी से खेल मंत्री बनकर कैसा लग रहा है?

बहुत अच्छा लग रहा है कि अब मुझे सरकार में रहते हुए हरियाणा के खिलाड़ियों के लिए काम करने का मौका मिलेगा। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का भी शुक्रगुजार हूँ, जिन्होंने मुझे खेल विभाग के काबिल समझते हुए इसका कार्यभार मुझे सौंपा।

अब आपकी क्या-क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?

अभी तो जस्ट शुरूआत कर रहा हूँ। दिल और दिमाग में बहुत कुछ है, जिसके जरिए हरियाणा के खिलाड़ियों के लिए बहुत कुछ करना चाहता हूँ। जल्द ही उन चीजों पर काम करना शुरू कर दूंगा, जिनकी मुझे बतौर खिलाड़ी रहते काफी कमी खलती रहती थी। ग्रामीण इलाके में काफी ज्यादा प्रतिभाशाली खिलाड़ी आज भी मौजूद है। लेकिन उन्हें सही मौका और साधन नहीं मिलने के चलते वह आगे नहीं बढ़ पाते हैं । इसलिए वह गाँव तक पहुंचकर उस ग्रास रूट से खिलाड़ियों को पैदा करके आगे लेकर आएंगे, जो कि न सिर्फ हरियाणा का नाम रोशन करेंगे बल्कि देश का नाम भी बड़ी-बड़ी ओलंपिक्स में चमकाएंगे।

मेडल टेली में हरियाणा काफी आगे रहा है, अब आगे क्या टारगेट रहेंगे ?

हरियाणा को एक मॉडल के रूप में आगे लेकर आना चाहता हूँ और पूरे देश में हरियाणा एक ऐसा राज्य बनता हुआ देखना चाहता हूँ, जिसके पास सभी दूसरे राज्यों से ज्यादा मैडल हों। इसके लिए बहुत काम करने की जरूरत है, क्योंकि ग्रास रूट में जाकर खिलाड़ियों को पैदा करना होगा। उसके बाद ही आने वाले सालों में हरियाणा के नौजवान इस कदर तैयार होंगे कि उनके सामने पड़ोसी राज्य तो दूर दूसरे देशों के खिलाड़ी भी खड़े नहीं हो पाएंगे।

कौन-कौन सी गेम पर आप का फोकस रहेगा?

हरियाणा में अभी तक कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबाल, फुटबॉल व हॉकी जैसी खेलों पर ही ज्यादा फोकस किया गया है बल्कि ओलंपिक्स में ताइक्वांडो सहित ऐसी कई छोटी-छोटी गेम्स हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। हरियाणा के हर खिलाड़ी को हर गेम के प्रति आकर्षित किया जाएगा।

नए खिलाड़ियों को लेकर क्या-क्या प्लान हैं?

अगर हमें उच्च दर्जे का और लंबे समय तक टिकने वाला खिलाड़ी चाहिए तो हमें 8 साल की उम्र से ही खिलाड़ियों को तैयार करना शुरू करना पड़ेगा, क्योंकि अगर 8 साल के एक छोटे बच्चे को खेल के मैदान में उतारकर तैयार करने की कोशिश की जाए तो युवा होने तक वह खिलाड़ी पूरी तरह दूसरे देशों के खिलाड़ियों को टक्कर देने के लिए तैयार हो जाएगा।

कब से आप काम शुरू करने जा रहे हैं?

कब से नहीं, बल्कि आज से ही काम करने शुरू जा रहा हूँ। अभी मैंने स्टाफ के साथ परिचय करने के बाद खेल विभाग के अधिकारियों की कल ही मीटिंग बुलाई है। मैं तो आज ही खेल विभाग के अधिकारियों से मीटिंग लेना चाहता था, लेकिन विभाग के डायरेक्टर के दिल्ली में एक मीटिंग में जाने के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। जैसे ही वे यहां पहुंचेंगे, काम शुरू कर दिया जाएगा।

क्या पिछली सरकार में खेलों को लेकर कुछ कमी देखते हैं?

नहीं, पिछली भाजपा सरकार में माननीय मंत्री अनिल विज द्वारा काफी अच्छा काम किया गया है, जिसका नतीजा मेडलों के ढेर के रूप में हमने देखा। यह जरूर है कि हर दिन कुछ नया करने की जरूरत है, ताकि नए खिलाड़ी और ज्यादा आ सकें और समय-समय पर बदल रही तकनीक के अनुसार खिलाड़ियों को उस तकनीक के अनुसार तैयार किया जा सके।

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