पीआरटीसी के छह संगठनों का पंजाब भर में चक्का जाम

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PRTC Protest in Punjab - Sach Kahoon Hindi News

पंजाब भर में 1000 से अधिक बसों का चक्का जाम कर मुकम्मल हड़ताल की

सच कहूँ/खुशवीर तूर पटियाला। केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों के आह्वान पर पीआरटीसी के छह संगठनों ने पंजाब भर में पीआरटीसी की 1000 से अधिक बसों का चक्का जाम कर मुकम्मल हड़ताल की। इसी कड़ी के तहत पीआरटीसी कर्मचारियों ने पटियाला के बस स्टैंड के सामने हड़ताल कर बसों का मुकम्मल चक्का जाम किया, जिस कारण लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

एसके गौतम के नेतृत्व में बैंक कर्मचारी जुलूस में शामिल हुए

पीआरटीसी के अधीन छह संगठन एटक, इंटक, कर्मचारी दल, एससीबीसी, सीटू और रिटायर्ड वर्क्स भाईचारा यूनियन के संयुक्त एक्शन समिति के नेतृत्व में पीआरटीसी कर्मचारियों ने पंजाब भर में हड़ताल की गई। इस मौके पीआरटीसी संगठनों की प्रमुख लीडर निर्मल सिंह धालीवाल संयोजक बलदेव राज, जरनैल सिंह, गुरबख्शा राम, सुच्चा सिंह और उत्तम सिंह बागड़ी के नेतृत्व में सुबह 5 बजे ही सैकड़ों कर्मचारियों ने एकत्रित होकर हड़ताल का बिगुल बजा दिया था। जैसे-जैसे हड़ताल का दायरा विशाल होता गया तो अन्य विभागों के कर्मचारी, मजदूर भी काफिलों के रूप में बस स्टैंड पर हो रही रैली में शामिल हुए।

एक बड़े जत्थे के साथ साथी दर्शन सिंह लुबाना प्रधान प.स.स.फ. के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी रैली व हड़ताल में शामिल होने के लिए अपने-अपने दफ्तरों में काम छोड़कर पहुंचे। इसी प्रकार सुनीता जोशी आंगनबाड़ी वर्करों की मुख्य नेता सहित महिलाएं वर्कर भी रैली में पहुंची। एसके गौतम के नेतृत्व में बैंक कर्मचारी जुलूस में शामिल हुए। पोस्टल, पल्लेदार, रेलवे, औद्योगिक कर्मचारी, भट्टा वर्कर, होस्टलें इत्यादि के कर्मचारी/मजदूर भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे।

 कम से कम वेतन 21000/ रुपए प्रति माह तय किया जाए

इस मौके विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीआरटीसी वर्कर्स एक्शन समिति के संयोजक कामरेड निर्मल धालीवाल ने कहा कि आज देश भर में कम से कम 35 करोड़ मेहनती लोगों व विभिन्न वर्गों द्वारा 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आदेश पर देश व्यापक हड़ताल मोदी सरकार की देश विरोधी और लोक विरोधी आर्थिक औद्योगिक नीतियों और तानाशाही नीतियों के विरोध में जबरदस्त हड़ताल की। उन्होंने मांग की कि कंट्रैक्ट व्यवस्था खत्म कर सभी कंट्रैक्ट कर्मचारी पक्के किए जाएं, लेबर कानून रद्द किए जाएं, पब्लिक सैक्टर का निजीकरण बंद किया जाए, तीनों कृषि कानून वापिस लिए जाएं, कम से कम वेतन 21000/ रुपए प्रति माह तय किया जाए, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए, इत्यादि मांगें पूरी की जाएं।

इस मौके दर्शन सिंह लुबाना, प्रधान प.स.स.फ., सुच्चा सिंह, गुरबखशा राम, जरनैल सिंह, बहादुर सिंह, उत्तम सिंह बागड़ी, सुनीता जोशी, रविन्द्रजीत कौर, करनैल सिंह, जगमोहन, हरशरनजीत कौर, सुखदेव राम सुखी आदि ने भी संबोधन किया।

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