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लोकसभा महाकुं भ, मैदान में उतरे गायक ईश्वर शर्मा

Singer, Ishwar Sharma

38 सालों से रागनियों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का कर चुके काम

सच कहूँ/विजय शर्मा
करनाल। लोक सभा चुनाव की घोषणा व चुनाव आचार संहिता के साथ ही विभिन्न पार्टियां सक्रिय हो चुकी हैं ऐसे में इस बार देखा जा रहा है करनाल लोक सभा से सीट से लोकल उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अभी तक निर्दलीय उम्मीदवार प्रमोद शर्मा प्रत्यक्ष से रूप से मैदान में उतर चुके हैं वहीं अब उनके सामने हरियाणा के सुप्रसिद्ध विशेष लोक कलाकार पंडित ईश्वर शर्मा खड़े हो चुके हैं। बता दें कि हरियाणा में करनाल लोकसभा क्षेत्र की अहम सीट है। जिस पर ज्यादातर ब्राह्मणों का कब्जा रहा है। सच कहूँ संवाददाता से विशेष बातचीत में ईश्वर शर्मा ने बताया कि उनका सपना शहीदों के सपनों का देश बनाना है। भटकते युवाओं को सही राह पर लाकर उन्हें रोजगार दिलाना व समाज में फैली कुरितियों के साथ नशों को समाप्त करना है।

सांसद ऐसा हो जो समझ सके लोगों का दर्द: ईश्वर शर्मा

बातचीत में लोक सभा चुनाव मैदान में कूदे गायक ईश्वर शर्मा ने बताया कि इस बार जनता चाहती है कि अबकी बार जो सांसद चुना जाए वह उनके बीच का हो। करनाल निवासियों को लोकसभा का सांसद पैराशूट वाला नहीं चाहिए जो कभी जीतने के बाद 5 सालों में ईद के चांद की तरह नजर आए। उन्होंने कहाकि सांसद ऐसा होना चाहिए जो लोगों की तकलीफ, उनके दर्द को समझ सके। और वह जनता के बीच रहे ही नहीं है बल्कि उनकी समस्याओं व दु:खों से भी बाकिफ हैं।

जिन्दगी की दूसरी पारी राजनीति के साथ शुरू

जिंदगी के 38 साल तक सरकार की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने के बाद देशभर में अपनी हरियाणवी लोक गायन शैली रागनी के माध्यम से बेटी बचाओ और पढ़ाओ की अलख जगाने वाले देश लोक गायक ईश्वर शर्मा अपनी जिंदगी की दूसरी पारी राजनीति से शुरू करना चाहते हैं। ईश्वर शर्मा एक लोकल निवासी है और सेक्टर-6 करनाल में पिछले 48 वर्षों से रह हैं।

समाज सेवा का है अनोखा जज्बा

ईश्वर शर्मा ने बताया कि वह करनाल के सिरसल गांव के रहने वाले हंै। जिस उम्र में बच्चे बोलना सीखते हैं उस उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। अपने दादा पंडित बेजनाथ शर्मा और पिता राम किशन शर्मा से विरासत में मिली इस कला को उन्होंने आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि वह रागनी खुद लिखते हैं और खुद ही उसका संगीत निर्देशन करते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने निवास पर बच्चों को नि:शुल्क गायकी का प्रशिक्षण भी देते हैं। ताकि रागनी के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिल सके।

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