लघुकथा : कैदी

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नन्हा बिट्टू दादा जी के साथ बाजार गया हुआ था। बाजार से आते-आते दादा जी ने सोचा-चलो मदिंर में भगवान के दर्शन कर आएं। वे मंदिर पहुंचे। मंदिर में ताले लगे हुए थे। दादा जी ने घड़ी की ओर देखा। दोपहर के 12 बज रहे थे। वे निराश भाव से बढ़ चले।
बिट्टू ने पूछा, ‘‘दादा जी! क्या भगवान दोपहर 12 बजे के बाद गायब हो जाते हैं?’’
दादा जी ने मुस्कुराते हुए कहा-‘‘नहीं बेटा, भगवान गायब नहीं होते। वे तो कण-कण में मौजूद हैं।’’
‘‘तो फिर मंदिरों में ताला लगाकर भगवान को कैदी की तरह क्यों रखा गया है?’’
‘‘नहीं बेटा, उन्हें मंदिरों में स्थापित कर पूजा करने के लिए रखा गया है।’’
दादा ने उत्तर दिया। तो फिर भगवान को ताले में बंद करने की क्या जरूरत है? क्या भगवान कैदी नहीं हुए?
यह सुनकर दादा जी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि सचमुच भगवान कैदी बनकर रह गए हैं।
-श्रीमति शैल चन्द्रा

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