यह मस्ताना है मस्ताना

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Mastana Balochistani - Sach Kahoon

अपने मुर्शिद पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज की ओर से बख्शी हुई मस्ती में पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज इतना नाचते कि पता ही नहीं चलता। चारों तरफ धूड़ ही धूड़ हो जाती। सेवादार आप जी को बिठाने की बहुत कोशिश करते। कई बार पकड़कर दूर ले जाते। इस पर पूजनीय बाबा सावण सिंह जी उन सेवादारों को रोक देते व साथ ही वचन भी फरमाते, ‘‘न रोको, यह मस्ताना है मस्ताना । मस्ती में नाचता है। इसके वश की बात नहीं है। इसे मालिक का प्रेम नचाता है।’’ कभी कभी आप जी इतना नाचते कि बेहोश होकर वहीं गिर जाते।

पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज स्टेज से खुद उतर कर आपजी के पास आ जाते व अपनी चादर उतार कर आपजी को बड़े ही प्यार के साथ दे देते। एक बार ऐसा ही देखकर किसी सत्संगी भाई ने पूज्य बाबा जी के चरणों में बेनती की कि सच्चे पातशाह! आपजी मस्ताना जी को सच्चा प्यार करते हो, इसका क्या कारण है? बाबा जी तो रहमत के समुन्द्र थे। उन्होंने फरमाया, ‘‘यह तो बबर शेर है, जितना प्रेम मस्ताने अकेले के पास है इतना सारे मातृलोक में भी किसी के पास नहीं है व मालिक तो प्रेम का भूखा है।’’

सतगुरू ने शाबाशी दी

पूजनीय मस्ताना जी महाराज ने सुल्तान बाहू व बुल्लेशाह की पुस्तकें सत्संगियों से भी पढ़वाई। उसके बाद आप जी ने पूज्य बाबा सावण सिंह जी महाराज के चरणों में अर्ज करते कहा, ‘‘हमनें बाहू की किताब पढ़वाई, बुल्लेशाह की किताब पढ़वाई।’’ उन्होंने लिखा है कि अल्लाह तो संत फकीर ही होते हैं, तो सार्इं जी, आपके बिना अब कौन है?’’ पूजनीय बाबा जी बोले, ‘‘मस्ताना शाह, बहुत ही उच्च कोटि की बाते हैं, आप धन्य हो, आप धन्य हो’’

आपसे कोई रूहानी काम लेना

पूजनीय सार्इं सावण सिंह जी महाराज के पास ब्यास में रहते शाह मस्ताना जी महाराज पूरी लग्न के साथ जो भी सेवा मिलती वही करते, आप जी सेवादारों के साथ लकड़ियां इक्ट्टठी करके लाने की सेवा कर रहे थे। मस्ताना जी अपने मुर्शिद के प्यार में पूरी मस्ती के साथ नाचते। उनकी मस्ती के चर्चे हर तरफ होते थे। सावण सिंह जी महाराज फरमाने लगे,‘‘आपकी लकड़ियों वाली सेवा बंद करते हैं, आपसे कोई रूहानी काम लेना है। ’’ इन वचनों के अनुसार ही सावण सिंह जी महाराज ने आप जी को जन-कल्याण के लिए सरसा भेज दिया।

 

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