राजस्थान में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता चुनाव हारे

Several Congress leaders in Rajasthan lose elections

लोकसभा चुनाव में राजस्थान में भाजपा ने सभी 25 सीट जीत कर एक नया इतिहास बना दिया है। 2014 में भी भाजपा ने राजस्थान में सभी 25 सीटे जीती थी। ऐसे में राजस्थान में लगातार दूसरी बार सभी सीटे जीत कर भाजपा ने एक रिकार्ड बनाया है। इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार भाजपा के सामने कहीं टिकते नजर नहीं आये। कांग्रेस के कई दिग्गजों का सूपड़ा साफ हो गया।

सत्रहवीं लोकसभा के लिये हुये चुनाव में राजस्थान में ऐसी मोदी लहर चली की कांग्रेस के कई दिग्गज नेता इस आंधी में उड़ गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने गृहनगर जोधपुर लोकसभा सीट से अपने पुत्र वैभव गहलोत को मैदान में उतारा था। अपनी बढ़ती उम्र के कारण गहलोत चाहते थे कि उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में उनके पुत्र वैभव गहलोत को स्थापित किया जाये। मगर भाजपा ने उनके मंसूबो पर पानी फेर दिया। जोधपुर से भाजपा प्रत्याशी व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री पुत्र को दो लाख 74 हजार 440 वोटों से हरा दिया। जोधपुर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वंय चार बार सांसद व पांच बार विधायक का चुनाव जीता है। पुत्र की हार गहलोत के लिये राजनीतिक रूप से बड़ा झटका माना जाता है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के निकट सहयोगी माने जाने वाले भंवर जितेन्द्र सिंह का अलवर से लगातार दूसरी बार हार जाना कांग्रेस के लिये किसी सदमे से कम नहीं हैं। जितेन्द्र सिंह मनमोहन सिंह सरकार में रक्षा राज्य मंत्री रह चुके हैं तथा वर्तमान में कांग्रेस कार्यसमिति के आमंत्रित सदस्य हैं। इनको ओडीसा कांग्रेस का प्रभारी भी बनाया गया था। कांग्रेस की राजनीति में इनको राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी देखा जाता रहा है। उदयपुर से दूसरी बार हारे कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रघुवीर मीणा विधानसभा के पिछला चुनाव भी हार गये थे। अशोक गहलोत के नजदीकी मीणा पूर्व में कई बार विधायक, राज्य सरकार में मंत्री व सांसद रह चुके हैं। भाजपा के अर्जुनलाल मीणा ने उनको 4 लाख 35 हजार 734 वोटो से हराया है।

बाडमेर से कांग्रेस टिकट पर हारे मानवेन्द्र सिंह पूर्व में भाजपा से सांसद व विधायक रह चुके हैं। गत विधानसभा चुनाव से पूर्व ही उन्होने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनको तब की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने झालरापाटन से चुनाव लड़ाया था जिसमें वो काफी अधिक मतों से पराजित हो गये थे। कांग्रेस ने उनको लोकसभा चुनाव में बाडमेर से टिकट दी मगर भाजपा के कैलाश चौधरी से 3 लाख 23 हजार 808 वोटो हार गये। मानवेन्द्र सिंह के पिता जसवंत सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता थे तथा केन्द्र की बाजपेयी सरकार में वित्त, विदेश व रक्षा मंत्री व राज्य सभा में नेता विपक्ष रहे थे। जसवंत सिंह भाजपा से चार बार लोकसभा व पांच बार राज्यसभा सदस्य रहे थे। कांग्रेस में आने के बाद लगातार मिल रही हार से इनका राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।

भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल होकर सीकर से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सुभाष महरिया को भाजपा के बाबाजी स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती ने दो लाख 97 हजार 156 वोटो से हरा दिया। महरिया सीकर से भाजपा टिकट पर तीन बार सांसद व बाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके थे। पूर्व में लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ को हरा कर महरिया देश भर में चर्चा में आये थे। लगातार चार चुनावों में हारने से महरिया की राजनीतिक पारी समाप्त मानी जाने लगी है। केन्द्र सरकार में मंत्री रहे नमोनारायण मीणा की टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट से हार कांग्रेस के लिये अप्रत्याशी थी। सभी उनकी जीत पक्की मान रहे थे। उनको भाजपा के सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने एक लाख 11 हजार 291 वोटो से हरा दिया। मीणा राजस्थान पुलिस के महानिदेशक भी रह चुके हैं।

नागौर से कांग्रेस टिकट पर हारी ज्योति मिर्धा किसानो के बड़े नेता व कई बार सांसद मंत्री रहे नाथूराम मिर्धा की पौत्री है। ज्योति के ससुराल वाले हरियाणा में बड़े उद्योगपति हैं। ज्योति मिर्धा को भाजपा से गठबंधन कर चुनाव लड़े विधायक हनुमान बेनीवाल ने एक लाख 71 हजार 260 वोटो से हरा दिया। ज्योति मिर्धा 2009 में सांसद का चुनाव जीती थी। कोटा से कांग्रेस के विधायक रामनारायण मीणा को भाजपा के ओम बिरला ने 2 लाख 79 हजार 677 वोटो से हराया है। चित्तोडगढ़ से प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व राजसमंद से सांसद रहे गोपाल सिंह शेखावत को भाजपा के सीपी जोशी से 5 लाख 76 हजार 247 वोटो से हार का सामना करना पड़ा। गोपाल सिंह कांग्रेस में राजपूतो के बड़े नेता माने जाते हैं।

आदिवासी बहुल बांसवाड़ा सीट पर कांग्रेस के ताराचन्द भगोरा को भाजपा के कनकमल कटारा ने 3 लाख 95 हजार 484 वोटो से हरा दिया। कांग्रेस के भगोरा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं। भगोरा की हार से कांग्रेस को आदिवासी बेल्ट में खामियाजा उठाना पड़ेगा। राजस्थान में चूरू से कांग्रेस के एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी रफीक मंडेलिया को भाजपा के राहुल कस्वां ने 3 लाख 34 हजार 402 वोटों से हरा दिया। रफीक मंडेलिया 2009 में भी चूरू से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।

राजस्थान में लोकसभा के 25 व राज्य सभा के 10 सदस्य है। मगर राजस्थान से देश की संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले 35 सांसदो में से कांग्रेस का एक भी नहीं हैं। भाजपा ने प्रदेश की 200 में से 185 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनायी है। यह कांग्रेस के लिये सोचने वाली बात है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार पर कांग्रेस को गंभीर मंथन कर जरूरी परिवर्तन करना चाहिये। तभी कांग्रेस पुन: मुख्यधारा में लौट पायेगी।

-रमेश सर्राफ झुंझुनू

 

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