स्कूल खुलने चाहिए, लेकिन कोविड-19 नियमों का पालन होना जरूरी

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School should open,

अभिभावकों ने नियमों के साथ स्कूल खोलने पर जताई सहमति, अध्यापक बोले अभिभावकों का चिंतित होना स्वाभाविक (School Should Open)

सच कहूँ/राजू  ओढां। कोरोना संक्रमण के मामलों में हर रोज ईजाफा हो रहा है। सरकार द्वारा 21 सितंबर से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों को खोलने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों व अध्यापकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग स्कूल खोले जाने के निर्णय को जोखिम भरा बता रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नियमों के साथ स्कूल खोले जाएं तो बेहतर है। इस बारे जब कुछ अभिभावकों व स्कूल संचालकों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि सरकार अगर स्कूलों में कोरोना के बचाव व उपचार का समाधान सुनिश्चित करते हुए नियमों का पालन बेहतर ढंग से होता है तो स्कूल खोले जाने पर उन्हें कोई एतराज नहीं।
कोरोना काल के चलते पिछले करीब 6 माह से स्कूल बंद पड़े हैं। शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए बच्चों को आॅनलाईन पढ़ाया जा रहा है। लेकिन फिर भी बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। आॅनलाईन पढ़ाई में बच्चों की रूचि कम है। दूसरा आॅनलाईन सिस्टम से बच्चों की आंखों पर भी प्रभाव पड़ता है। जो शिक्षा बच्चे स्कूल में आकर ग्रहण कर सकते हैं वो आॅनलाईन के जरिए नहीं। जो बच्चा कक्षा में बैठकर अध्यापक से प्रश्न पूछ सकता है वो आॅनलाईन नहीं। नियमों के साथ स्कूल खुलने चाहिए। हम कोविड-19 के नियमों का पालन करेंगे।
वकील गोदारा, निदेशक (एनपीएस नुहियांवाली)।
हम मानते हैं कि जो पढ़ाई स्कूल में जाकर हो सकती है वो आॅनलाईन नहीं। पिछले करीब 6 माह से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। अगर कोरोना के खत्म होने के समय का पता हो तो हम बच्चों को स्कूल जाने से और भी रोेक लेंगे। आॅनलाईन शिक्षा लेने के बाद बच्चे बेवजह घरों से बाहर घूमते रहते हैं। स्कूल में जाने के बाद उनका कम से कम कोई शेड्यूल तो होता है। हालांकि कोविड-19 के तहत बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम चिंतित हैं। क्योंकि हर रोज पॉजिटिव केसों में ईजाफा हो रहा है। हम स्कूल खोलने के पक्ष में हैं। लेकिन स्कूलों में संक्रमण से बचाव के लिए उचित कदम उठाना जरूरी है।
संदीप वर्मा, अभिभावक (महम्मदपुरिया)।
कोरोना काल के चलते बच्चों की शिक्षा प्रभावित होना स्वाभाविक है। हम चाहते हैं कि स्कूल खुले लेकिन पहले सरकार स्कूलों में उचित व्यवस्था स्थापित तो करे। पिछले कुछ समय से संक्रमण के लगातार मरीज सामने आ रहे हैं। जिनमें अध्यापक भी शामिल हैं। हम बच्चों को स्कूल तो भेज देंगे लेकिन मन में चिंता होना लाजमी है। स्कूलों के अंदर इन्ट्री होते ही सभी बच्चों के हाथ सैनिटाइज होने चाहिए, मास्क लगे होना चाहिए व सोशल डिस्टेंस के साथ उन्हें कोरोना से बचने के बारे में जानकारी जरूर दी जाए।
संजय राजपूत, अभिभावक।
कोरोना काल में वैसे तो हर वर्ग प्रभावित हुआ है। लेकिन शिक्षा अधिक प्रभावित हुई है। हालांकि स्कूलों ने आॅनलाईन भी पढ़ाया। लेकिन हर किसी के पास तो स्मार्ट फोन नहीं है। मेरा ये मानना है कि स्कूल खुलने चाहिए। लेकिन स्कूल प्रबंधकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाना चाहिए। स्कूल मेें इन्ट्री होने से पूर्व गेट पर बच्चों को सैनिटाइज करवाना, मास्क लगे होना व सोशल डिस्टेंस का पालन करवाना अनिवार्य होना चाहिए। दूसरा अध्यापक स्वंय जागरूक होकर बच्चों को भी जागरूक करें। जो शिक्षा प्रभावित हुई है वो पुन: पटरी पर तभी आ सकती है जब स्कूल खुलेंगे।
पवन कु मार मैहता, अभिभावक (नागोकी)।
स्कूल खुलने चाहिए। क्योंकि अन्य सभी क्षेत्र भी तो खुले हुए हैं। कोरोना काल में बच्चों की शिक्षा का बहुत नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई तभी हो सकती है जब स्कूल खुलेंगे। हालांकि हमनें आॅनलाईन भी पढ़ाया है। लेकिन जो शिक्षा व संस्कार स्कूल के वातावरण में मिल सकते हैं वो आॅनलाईन नहीं। अभिभावकों का अपने बच्चों को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है। लेकिन हम स्कूल में कोविड-19 के सभी नियमों का पालन करेंगे। इस महामारी से हम सभी को जागरूक होकर लड़ने की आवश्यक्ता है।
पूजा शर्मा, प्राचार्या (एम.एम मैमोरियल स्कूल ओढां)।
स्कूल खुलने चाहिए। क्योंकि कोरोना काल में शिक्षा का स्तर काफी प्रभावित हुआ है। पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमित केसों में ईजाफा हो रहा है। ऐसे में बच्चों को लेकर मन में डर सा है। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यापक प्रबंधों का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि बच्चे अपने आप तो नहीं समझ पाते, लेकिन अगर उन्हें समझाया जाए तो वे समझ भी जाते हैं। बसों में सैनिटाइजर का छिड़काव करने के साथ-साथ बच्चों व स्टाफ को मास्क लगाना भी सुनिश्चित होना चाहिए। हालांकि आॅनलाईन पढ़ाया जा रहा है लेकिन स्कूलों में जाकर पढ़ना इससे काफी बेहतर है।
साहिल मलिक, अभिभावक।

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