अब लोकपाल में जाएंगे ये ईमानदार अफसर

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Sanjeev Chaturvedi
Rajiv Chaturvedi will provide services in Lokpal

उत्तराखंड सरकार की सहमति से मिली हरी झंडी | Lokpal

देहरादून। कहते हैं अगर इन्सान नेक नीयत और बुलंद हौंसले से कोई कार्य करता है तो उसका फल उसे जरूर मिलता है। ऐसा ही हुआ है रमन मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त भारतीय वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के साथ। उत्तराखंड सरकार ने इस ईमानदार अफसर को केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर नवगठित लोकपाल (Lokpal) में भेजने को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के अनुमोदन के बाद उत्तराखंड सरकार में अपर सचिव सुभाष चन्द्र ने भारत सरकार को भेजे पत्र में सहमति प्रदान कर दी है।

केन्द्र में प्रतिनियुक्ति के लिए किया था आवेदन

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2002 बैच के उत्तराखण्ड काडर के अधिकारी चतुर्वेदी राज्य में अपनी तीन वर्षीय उपशमन अवधि समाप्त होने के बाद केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति में जाकर नवगठित लोकपाल में सेवाएं देना चाहते हैं। उन्होंने केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व के साथ ही नवगठित लोकपाल में उपयुक्त रिक्तियों के दृष्टिगत लोकपाल के अध्यक्ष को नवम्बर में भेजे अपने पत्र के माध्यम से संस्था की प्रशासनिक शाखा की जांच इकाई में प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने हेतु अपनी उम्मीदवारी की थी।

शानदार रही है कार्य रिपोर्ट

देश के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2010-11 व 2011-12 की चतुर्वेदी की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट को उत्कृष्ट करार दिये जाने तथा खुफिया ब्यूरो द्वारा जनवरी 2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल हलफनामें में उन्हें परिश्रमी अधिकारी बताए जाने को इस उम्मीदवारी का आधार बनाया गया था। चतुर्वेदी वर्तमान में नैनीताल जिले के हल्द्वानी में वन संरक्षक अनुसंधान के पद पर कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने सोमवार को उन्हें मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति भी दे दी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा रहे सख्त तेवर

  • संजीव ने वन विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है।
  • एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते भ्रष्टाचार के मामलों को सामने रखने के लिए संजीव सुर्खियों में आए थे।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संजीव को मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात करने की मांग की थी।
  • केंद्र सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया था। इसके बाद
  • संजीव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
  • उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी संजीव की याचिका पर केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
  • दिल्ली में एक साल तक खाली रहने के बाद संजीव को उत्तराखंड वन अनुसंधान में नियुक्ति दी गई थी।
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