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प्रशासन ने सुनी नहीं, फरिश्ता बनकर आई साध-संगत

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जरुरतमंद परिवार को डेरा पे्रमियों ने बनाकर दिया आशियाना

हनुमानगढ़, सच कहूँ न्यूज। गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने जिस जरुरतमंद परिवार की नहीं सुनी, उसके लिए साध-संगत फरिश्ता बनकर आई। साध-संगत ने उक्त परिवार के गिरने की कगार पर खड़े कच्चे मकान की जगह एक ही दिन में नया पक्का आशियाना बनाकर दिया। पक्की छत्त मिलने पर उक्त परिवार खुशी के मारे फूले नहीं समा रहा है। जानकारी के अनुसार टाउन की भभूता सिद्ध कॉलोनी हरीराम (35) सब्जी की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। वह खुद गुर्दांे की बीमारी से पीड़ित है जबकि दो पुत्रों में से एक लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है।

परिवार में उसकी पत्नी व दो पुत्रों सहित चार जने हैं। दवाओं पर काफी धन खर्च हो चुका है। इस कारण हरीराम के पास इतना पैसा नहीं था कि वह गिरने की कगार पर खड़े कच्चे मकान को पक्के में तब्दील कर सके। जब उसकी इस पीड़ा का पता वार्ड पार्षद मनोज सैनी को लगा तो वे आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में प्रशासनिक अधिकारियों से मिले तथा हरीराम के परिवार को पक्का मकान बनाने के लिए सहायता करने की गुहार लगाई।

सेवा के जज्बे को सलाम

पर वहां से बात नहीं बनी तो पार्षद मनोज सैनी गत दिनों ब्लॉक के जिम्मेदारों से मिले। उन्होंने हरीराम को मकान बनाकर देने में सहयोग का आग्रह किया। इस पर जिम्मेदारों ने मकान बनाकर देने का वादा किया। इसी वादे पर खरे उतरते हुए साध-संगत ने रविवार को हरीराम के जरुरतमंद परिवार को कुछ ही घंटों में पक्का आशियाना बनाकर दे दिया। ब्लॉक भंगीदास गिरधारीलाल इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस की खुशी में साध-संगत ने हरीराम व उसके परिवार को पक्की छत्त उपलब्ध करवाई।

इस कार्य में ब्लॉक के जिम्मेदार श्यामलाल गर्ग इन्सां, सुरेश मरेजा इन्सां, पंकज इन्सां, साहबराम इन्सां, संतोख सिंह इन्सां, बहन सीमा मरेजा इन्सां, ईशरी देवी इन्सां, मिनाक्षी इन्सां, कुलदीप कौर इन्सां, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सदस्य संदीप जिन्दल इन्सां, प्रदीप इन्सां, कृष्ण सक्सेना इन्सां, प्रेम इन्सां, आशाराम इन्सां, हेतराम इन्सां, बिल्लू इन्सां सहित साध-संगत का सहयोग रहा। वहीं मिस्त्री मलकीत सिंह इन्सां, दर्शनसिंह इन्सां, बिन्द्रसिंह इन्सां व सुखदेव सिंह इन्सां ने मकान का निर्माण किया। उधर, कुछ ही घंटों में पक्का मकान बनकर तैयार हुआ तो हरीराम की आंखें नम हो गईं। उन्होंने साध-संगत का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह उनका यह कर्ज कभी नहीं उतार सकेगा। मोहल्ले के लोगों ने भी साध-संगत के मानवता भलाई के इस कार्य की भरपूर प्रशंसा की।

 

 

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