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रोड़वेज की हड़ताल 11वें दिन भी जारी, कर्मचारी एकजुट

Roadways strike

सामूहिक अवकाश पर रहकर अनेक कर्मचारियों ने दिया समर्थन | Roadways strike

भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। सरकार की सख्ती और कर्मचारियों के हठ के चलते फिलहाल रोड़वेज की हड़ताल खत्म होती नहीं दिख रही। सरकार द्वारा सामूहिक अवकाश पर रोक के बावजूद भिवानी में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ छात्र संगठनों, पंचायतों व खापों ने हड़ताल (Roadways strike) का समर्थन किया। एसएफआई की आईटीआई भिवानी की इकाई ने हड़ताली रोड़वेज कर्मचारियों के समर्थन में शहर में प्रदर्शन करते हुए हरियाणा सरकार का पुतला फूंका। वही हड़ताली कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि वो सरकार के काले कानूनों से डरने वाले नहीं हैं।

720 निजी बसों को रोड़वेज बेड़े में शमिल करने के सरकार के फैसले के विरूद्ध रोङवेज व अन्य कर्मचारी संगठनों की हड़ताल शुक्रवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गई। सरकार द्वारा सभी उपायुक्तों के माध्यम से 26 और 27 अक्टूबर को कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर रोक का भी आज कुछ खासा असर दिखाई नहीं दिया, बल्कि इसके उलट रोड़वेज के हड़ताली कर्मचारियों को छात्र संगठनों, पंचायतों व खापों तक ने समर्थन देकर जता दिया कि हड़ताल अभी लंबी चलेगी।

नेहरू पार्क में डेरा डाले हड़ताली कर्मचारियों को शुक्रवार को विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने समर्थन दिया। वही एसएफआई ने सड़कों पर उतर कर सरकार से निजी बसों को वापस लेने की मांग को लेकर पुतला फूंका। कुहाड़ व बजीणा गांव के सरपंचों ने धरने पर पहुंच कर समर्थन दिया। जाटू खाप-84 के प्रधान सूबेदार राजमल धनाना ने कहा कि उनकी खाप रोड़वेज कर्मचारियों के साथ है और 5-7 दिनों तक समाधान नहीं हुआ तो वो आसपास के गांवों में रोड़ जाम करेंगें।

वहीं हड़ताली कर्मचारी नेता राजकुमार दलाल व महेश रोहिला ने कहा कि उनकी हड़ताल  (Roadways strike) सफल है और सरकार के काले कानून के बावजूद विभिन्न विभागों के कर्मचारी, छात्र संगठन, सरपंच व खापे उनके समर्थन में आ रही है। उन्होंंने कहा कि ये उनकी खुद की नहीं, बल्कि जनता की मांग है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री गुजरात मॉडल लागू कर अपने चहेतों व मंत्रियों को फायदा पहुंचाने के लिए निजी बसें बेड़े में शामिल कर रहे और हरियाणा को गुजरात बनाना चाहते हैं।

हड़ताली कर्मचारियों ने प्रशासन के प्रयासों से चल रही कुछ बसों के सवाल पर कहा कि ये भगवान भरोसे हैं। सभी चालक नौसिखिया हैं और आज तक एक भी बस की वर्कशॉप में मुरम्मत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कोई बड़ा हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेवारी अधिकारियों की होगी।

इन सब के बीच प्रशासन के प्रयास व सरकार की सख्ती रोड़वेज कर्मचारियों की हड़ताल (Roadways strike)के आगे नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में हर दिन हड़ताल को लेकर बढ़ रहा समर्थन व सरकार की लाचारी के चलते लोगों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही।

Roadways strike

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