हमसे जुड़े

Follow us

23.4 C
Chandigarh
Tuesday, March 31, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय सुप्रीम कोर्ट...

    सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला

    Supreme Court

    सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव टालने वाली पटीशन रद्द कर दी है। अदालत ने फैसले में कहा है कि कोविड-19 को चुनाव टालने का आधार नहीं माना जा सकता। देश कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है, जिससे निपटने की प्राथमिक जिम्मेवारी केंद्र व राज्य सरकार की है। बीमारी से लड़ने के लिए चलाई गई मुहिम बरकरार रहेगी जहां तक वोट देने का संबंध है यह केवल एक दिन का मामला है। बाजार में रोजाना की भीड़ हो रही है। कई लोग मास्क पहनने और सामाजिक दूरी रखने की हिदायतों का भी पालन कर रहे हैं, इसीलिए वोट देने का काम भी कोई मुश्किल नहीं है। 2019 के लोक सभा चुनावों में कोरोना मरीजों के एक क्षेत्र में पोलिंग बूथ बनाया गया जहां केवल एक ही वोटर था जहां तक शहरों का संबंध है पोलिंग बूथ ज्यादा बनाकर भीड़ घटाई जा सकती है। बाकी बिहार में पहले भी चुनाव चरणबद्ध तरीके से होते रहे हैं।

    इस बार पड़ावों की संख्या बढ़ाकर प्रबंधों में इजाफा किया जा सकता है। राज्य के कामकाज को जारी रखने के लिए समय पर नई सरकार का गठन जरूरी है। यूं भी देश में कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर भी अमेरिका सहित विश्व के कई देशों की अपेक्षा ज्यादा है। आज कल यह दर 70 प्रतिशत से अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत में कोरोना दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की प्रशंसा कर चुका है। चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है और संविधान के अनुसार पांच वर्षों बाद चुनाव करवाना अनिवार्य है। जब लोग अपने घर के कार्यों के लिए निकल रहे हैं, वोट डालना भी कोई समस्या वाली बात नहीं है। राजनीतिक तंत्र बरकरार रखा जाना जरूरी है, ताकि शासन-प्रशासन में जवाबदेही बनी रहे। यह मानकर चलना होगा कि महामारी की रोकथाम के लिए प्रबंध जरूरी है। देश में विधानसभा चुनावों ही नहीं बल्कि देश में जहां-कहीं भी नगर कौंसिल या पंचायती चुनाव हैं, वह भी तय समय के अनुसार करवाए जाने चाहिए।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।