आरटीआई में हुआ खुलासा : 18 मई तक लोगों ने दी 74 लाख 90 हजार 771 राशि

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Revealed in RTI 74 lakh 90 thousand 771 people gave till May 18

कोरोना काल में राहत और बचाव के लिए नहीं खर्च किया भिवानी रिलीफ फंड से पैसा

  • जीबीटीएल मील सहित कॉलोनियों में जरूरी वस्तुओं से मोहताज रहे लोग, झेली परेशानियां
भिवानी सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन। पिछले लगातार चार महीनों में भिवानी में कोरोना के केस लगातार बढ़े हैं। कोरोना वैश्विक महामारी संक्रमण से निपटने के साथ राहत एवं बचाव के लिए जिला प्रशासन ने 27 मार्च को भिवानी कोविड-19 रिलीफ फंड राहत कोष की स्थापना भी की और बैंक में खाता भी खुलवा दिया। भिवानी कोविड रिलीफ फंड में लोगों ने भी दिल खोलकर लाखों रुपयों का दान दिया और करीब दो माह में ही जिला प्रशासन के पास 74 लाख 90 हजार 771 रुपये का फंड भी जमा हो गया। लेकर दुर्भाग्य की बात तो यह है कि जनता को कोरोना संक्रमण से बचाव और गरीब लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने इस रिलीफ फंड से एक पैसा तक खर्च नहीं किया। दरअसल यह खुलासा आरटीआई द्वारा मांगी गई सूचना में हुआ है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने भिवानी कोविड रिलीफ फंड की स्थापना से लेकर अब तक जमा राशि व खर्च का विवरण आरटीआई के जरिए मांगा था। बृजपाल सिंह परमार द्वारा मांगी गई आरटीआई का जवाब 25 जून को पहुंचा तो इसमें फंड में जमा राशि 74 लाख 90 हजार 771 दर्शायी गई, लेकिन खर्च एक पैसा तक नहीं किया गया। जबकि लगातार इस रिलीफ फंड में दानी सज्जन लाखों रुपयों का रिलीफ फंड जमा कराते आ रहे हैं। बृजपाल सिंह परमार ने कहा कि रिलीफ फंड में दानी लोगों ने लाखों रुपये जरूरतमंद व कोरोना बीमारी से संक्रमित लोगों व उनके परिजनों को राहत देने के लिए ये पैसा जमा कराया था, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि दो माह तक कोरोना के काफी मामले भिवानी में आए और कई इलाकों को कंटेनमेंट जोन की श्रेणी में डालकर सील कर दिया गया। लेकिन प्रशासन की तरफ से वहां रहने वाले लोगों के लिए इस बजट से कोई राहत नहीं दी गई और एक भी नया पैसा खर्च नहीं किया। बृजपाल सिंह परमार ने कहा कि कोविड रिलीफ फंड के पैसे को किसी दूसरे मद में भी खर्च नहीं किया जा सकता, जबकि प्रशासन ने इस पैसे को मील मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए भी खर्च नहीं किया। जीबीटीएल मील सहित लेबर कॉलोनी, चिरंजीव कॉलोनी में लोग जरूरी वस्तुओं के भी मोहताज हो गए हैं।

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