पेट्रोल-डीजल पर गुरु जी ने किए शानदार वचन

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बरनावा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने वीरवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अपने पावन वचनों से निहाल किया। इस अवसर पर पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज का दौर, आज का समय बड़ा ही भयानक है। स्वार्थीपन, गर्जीपन बढ़ता ही जा रहा है। अहंकार में इन्सान अंधा होता जा रहा है। स्वार्थ के बिना कोई किसी से बात करना भी पसंद नहीं करता। ग़र्ज के बिना इन्सान दोस्ती, मित्रता भी नहीं जोड़ता।

वैसे तो कोई भी रिश्ता ऐसा नहीं जिसमें ग़र्ज ना छुपी हो। कहीं न कहीं, कोई न कोई ग़र्ज होती है। बेग़र्ज निस्वार्थ सेवा भावना तो वो ही लोग करते हैं जो ओउम, हरि, ईश्वर, मालिक, राम को मानते हैं। भगवान का नाम लेते हैं, परमात्मा को याद करते हैं, उन्हीं के अन्दर भावना आती है कि निस्वार्थ भावना से समाज का भला किया जाए। आज समय ऐसी करवट बदलता जा रहा है, पानी की बात करें तो पानी कम होता जा रहा है। बिजली, जिसके सुख-सुविधा में इन्सान पड़ा है, वो कोयले खत्म होने की कगार पर जा रहे हैं। और यहां तक कि एक सार्इंटिस्ट से बात हुई, पेट्रोल-डीजल ये भी खत्म होने की तरफ बढ़ रहे हैं। जरा सोचकर देखिए, अगर ये चीजें खत्म हो जाती हैं तो क्या होगा?

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पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अब एक ही घर से तीन-तीन गाड़ियां निकलती हैं। एक आदमी एक गाड़ी लेकर निकलता है। और अगर ड्रॉप करते जाएं आप या यार-दोस्त एक ही दफ्तर में जाते हैं आप, तो चार-पाँच दोस्त हैं, तो आज तू ले आना, आज तू लेना ऐसे एक ही गाड़ी से काम चल सकता है। लेकिन ना, ना, इगो हर्ट होती है, बुरा लगता है, अपनी-अपनी गाड़ी लेकर चलेंगे तो कितना डीजल-पेट्रोल का खात्मा आप कर रहे हैं और कितना पोल्यूशन हो रहा है। काश ऐसा कोई सोच ले। कौन सोचे? हमें सोचना होगा, सारे समाज को सोचना होगा, कि हाँ, इस तरह से किया जा सकता है। हमें तो जैसा राम जी ख्याल देते हैं, आइडिया देते हैं हम तो आपको बता देते हैं, सेवादार हैं आपके, सेवा करना हमारा काम है। तो कितना आसान हो जाए, कि भई हाँ, चार-पाँच दोस्त जा रहे हैं, एक ही दफ्तर में, कि भई आज तेरी गाड़ी पर चलेंगे, कल तेरी पर, तो पाँच गाड़ियों की जगह एक गाड़ी जाएगी।

आप पहल तो करो, क्या पता समाज के और लोग भी आपकी देखा देखी शुरू हो जाएं। तो प्रदूषण के जहर से भी बचा जाएगा और बचाव भी, डीजल-पेट्रोल आपका बचेगा, खर्चा भी बचेगा। पर सोचना नहीं, विचारना नहीं, झुकना नहीं, ये झुकना नहीं होता समझदारी कहते हैं इसको, पर अगर आप करो तो। बताना तो हमारा काम होता है जी। फकीरों का काम तो समाज के भले के लिए चर्चा करना होता है। तो राम का नाम आप अगर लेंगे, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, ख़ुदा, रब्ब से जुड़ेंगे तो आपके अंदर विल पावर (आत्मबल) आएगा, जो आपकी इगो, अहंकार को मारेगा, तभी आप ऐसी चीजों में साथ दे सकते हैं, वरना आदमी की इगो तो घर में काबू नहीं आती, बाहर की बात तो छोड़ो आप।

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