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Wednesday, April 1, 2026
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    सूचना-तकनीक को आत्मसात करे भारतीय जन

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    रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने भारतीय बैंक ग्राहकों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। रिजर्व बैंक ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता अपने डेबिट, क्रेडिट कार्ड से एटीएम से लेन-देन करने के दौरान किसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तब वह अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत तीन दिन के भीतर अपने बैंक शाखा को, जिसके खाते में से पैसों की हेराफेरीर हुई है, करें।

    बैंक ग्राहक को उसकी राशि का नुक्सान नहीं होने देगा। अन्यथा अभी तक लाखों लोगों के साथ आॅनलाइन धोखाधड़ी हो चुकी है, परंतु उनकी किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।

    हालांकि बैंक अपने ग्राहकों को हर संभव जागरूक कर रहे हैं कि वह अपना एटीएम या इसका गुप्त कोड किसी को नहीं देवें। अपने गुप्त कोड को बार-बार बदलते रहें। फोन पर कोई व्यक्ति आपसे आपके बैंक खाते या डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी मांगता है, तब किसी व्यक्ति को फोन पर ये जानकारियां नहीं देवें।

    फिर भी बहुत से ग्रामीण व कस्बाई लोग धोखा देने वाले लोगों के झांसे में आ जाते हैं और अपने बैंक खातों में पड़े धन को गंवा बैठते हैं। नेटबैंकिंग व मोबाइल फोन के अलावा हाल के दिनों में बैंक एटीएम बूथों पर भी ग्राहकों से हेराफेरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। बहुत से बैंक एटीएम में कैश डालने का ठेका बैंकों ने निजी कंपनियों को दे रखा है,

    ये निजी कंपनियां अकसर एटीएम मशीनों में डाली जाने वाली राशि में से असली नोट चुराकर उनकी जगह नकली व बच्चों के खेलने वाले करंसी नोट डाल देती हैं। हालांकि यह हेराफेरी बहुत छोटे स्तर पर की जाती है, लेकिन इस हेराफेरी के शिकार कई बार बहुत ही साधारण ग्राहक हो जाते हैं जिनके पास थोड़ी सी ही जमा पंूजी होती है।

    इस तरह की हेराफेरी से बैंक भी पल्ला झाड़ लेते हैं कि वह जिम्मेवार नहीं हैं। अब आरबीआई के दिशा-निर्देशों से करोड़ों ग्राहकों को राहत मिली है। भविष्य के लिए बैंकों को चाहिए कि वह अपनी सूचना तकनीकी में सुधार कर एटीएम कार्डों के साथ फिंगर प्रिंट मैचिंग को अनिवार्य कर दें।

    फिंगर प्रिंट अनिवार्य हो जाने से यदि ग्राहक का गुप्त कोड भी चोरी हो जाए तब भी कोई धोखाधड़ी से पैसा नहीं निकाल सकेगा। बैंकों की कार्यप्रणाली में बढ़ रही सूचना तकनीक सुविधा का ग्राहकों व बैंकों को बहुत ज्यादा फायदा है।

    इससे यहां देश का अरबों रूपये का कागज व श्रम बचता है, वहीं ग्राहकों व बैंकों के मध्य होने वाली छोटी से छोटी लेनदारियां-देनदारियां भी रिकार्ड हो रही हैं एवं हेराफेरी की गुंजाईश नाममात्र भी नहीं रहती।

    अत: भारतीय जनमानस को चाहिए कि वह बैंक ही नहीं, हर क्षेत्र में बढ़ रही सूचना तकनीक को पूरी तरह से आत्मसात करे ताकि देश का आर्थिक विकास अपनी पूरी ताकत व तेजी से हो।

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