अवैध से करनी होगी तौबा

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चंडीगढ़ में अवैध रूप से चल रहे गर्ल्स पीजी में लगी आग से तीन छात्राएंं बुरी तरह जलकर मर गई। कई छात्राएं इस दौरान गंभीर रूप से घायल हो गई। पिछले दिनों पंजाब के लोंगोवाल में एक खटारा स्कूली वैन में आग से चार मासूमों की जान चली गई थी। इससे भयानक व बड़े आग हादसे भी यह देश देख चुका है जिनमें दिल्ली की एक अवैध फैक्ट्री में आग से मजदूरों का जल जाना, अहमदाबाद के एक कोचिंग संस्थान में लगी आग, कोलकाता के हॉस्पीटल में लगी आग, उपहार सिनेमा अग्निकांड, डबवाली में स्कूल अग्निकांड जैसे हादसों ने कई बार पूरे देश को डराया है।
बावजूद इन हादसों के देश में अग्नि जैसी आपदाओं के विरुद्ध देश के शहरों, कस्बों, महानगरों में कुछ नहीं हो रहा सिवाय दिखावटी मॉक ड्रिल करने या अवैध संस्थानों को फर्जी तौर पर अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र बांटे जाने के। देश में चल रहे अवैध आवासीय कारोबारों में लाखों संस्थान बिना किन्हीं सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं, जबकि इनमें बहुतों के पास आग से सुरक्षित परिसर का प्रमाण-पत्र होगा। प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार, कानूनों की अनदेखी एवं लालची कारोबारियों की वजह से देश एवं देशवासियों का करोड़ों रुपयों का माली व अमूल्य जिन्दगियों का नुकसान हो रहा है।
दरअसल देश के शहरी विकास में शुरू से ही कमियां रही हैं। देश में कभी ढंग से योजनाबद्ध रूप से शहरों का विकास नहीं किया गया, अवैध कॉलोनियां, उनमें अवैध कारोबार, उनमें अवैध यातायात इन सब का परिणाम भुगत रहे हैं आम लोग। यह सब हुआ वोट व गरीब के रोजगार के नाम पर, चूंकि देश में गरीब होना मानों सब कानूनों से ऊपर उठ जाना है। फिर रोजगार चलता रहने देने की आड़ में कोई नियम कायदा मानने की जरूरत नहीं। किसी अवैध फैक्ट्री को इसलिए नहीं रोका जाता कि उससे कई घरों का रोजगार चल रहा है, किसी अवैध पीजी को चलने दिया जाता है क्योंकि जरूरतमंद छात्राएं मंहगे शहरों में आखिर कहां रहें? अवैध वाहन चलने दिये जाते हैं कि चलो किसी का चूल्हा जल रहा है, भले ही ऐसे चूल्हे बहुतों के चूल्हे बुझा दें।
देश में शायद सरकारों को कोई मतलब नहीं रह गया है कि लोग कैसे रहें? कैसे जियें? सरकारें अगर फिक्र करती तो क्या इस देश में लाखों अवैध कालोनियां बन जाती? सरकारें फिक्र करती तो क्या भ्रष्टाचार होता? पर यहां बड़ी सफाई से दोष भी आमजन पर ही डाल दिया जाता है कि सरकारें क्या करें, जब आमजन ही साथ नहीं दे रहा। चंडीगढ़ में क्या सरकार को नहीं पता, कितने पीजी बिना सुरक्षा मानकों के अवैध चल रहे हैं? खैर सरकार को नहीं पता होगा कि उसके यहां कितने अवैध पीजी हैं, लेकिन सरकार को यह तो पता होगा कि उसके स्कूल, कॉलेजों में कितने छात्र हैं? कितने होस्टल हैं? जिनके पास हॉस्टल नहीं वह छात्र कहां रहते हैं? सरकार की आँख, कान, हाथ उसका सिस्टम है, जो शायद नकारा हो चुका है। तभी तो कोई आग से मरे, पानी से मरे, बेघर मरे, भूखा मरे, बिना दवा मरे या फिर अपने हक के लिए लड़ता-लड़ता मरे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
अत: इस देश में आमजन को ही यह जिम्मेवारी लेनी होगी कि वह किसी भी अवैध गतिविधि या अवैध सुविधा से दूर ही रहे। भले ही उसके सामने अवैध कितना भी सस्ता या लाभदायी होकर क्यों न खड़ा हो जाए। अवैध पीजी, अवैध स्कूल, अवैध वाहन, अवैध फैक्ट्री, अवैध नौकरी इन सबसे दूर रहना ही बेहतर होगा, चूंकि अवैध ने सिर्फ भ्रष्ट, लालची एवं गैर जबावदेह लोगों को ही लाभ दिया है, इतना ही नहीं अवैध कारोबार आमजन की जानें भी ले रहा है।

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