सम्पादकीय

आतंकियों के निशाने पर पंजाब

Punjab, Target, Terrorists

आम चुनाव 2019 के दौरान वह कारगुजारी को अंजाम देना चाहता है।

कश्मीर मुद्दे पर विश्व स्तर पर मुंह की खाने के साथ ही, आतंकवाद (Punjab on target of terrorists) के मुद्दे पर हर समय घिरता आया पड़ोसी हर उस हरकत पर आमादा है, जिससे देश में विघटनकारी ताकतें सशक्त हों। कश्मीर घाटी के बाद पंजाब उसके निशाने पर है, वहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ ही आम चुनाव 2019 के दौरान वह कारगुजारी को अंजाम देना चाहता है। आईएसआई और सीरिया से निकले आईएस के गठजोड़ ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आईएस भारत में जड़ें जमाना चाहता है। आईएसआई, इंडियन मुजाहिदीन उसके मददगार बने हुए हैं।

आम जनता में दहशत का माहौल बनाने के लिए वे नित नई रणनीति अपना रहे हैं

दरअसल, कश्मीर घाटी में भारतीय जवानों ने जिस तरह मोर्चा संभाला है, उससे आतंकवादियों के हौसले पस्त हुए हैं। हमारे जवानों ने दिवाली पर दहशत फैलाने आए आतंकियों को मार गिराया। वहीं पत्थरबाजों से वे लगातार लोहा ले रहे हैं। प्रतिदिन शिकार की तलाश में आने वाले आतंकी पुलिस के हाथों जान गंवा रहे हैं। ऐसे में पड़ोस की सीमा में बैठे आतंक के आकाओं का बौखलाना स्वाभाविक है। आम जनता में दहशत का माहौल बनाने के लिए वे नित नई रणनीति अपना रहे हैं।

घाटी में शार्प शूटर्स को लगाया है, वहीं युवाओं को दिग्भ्रमित कर उकसाने वाली गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। हाल ही में सेना का एक जवान पाकिस्तान को सड़कों के नक्शे भेजते पकड़ाया है, वहीं पटियाला पुलिस ने दिवाली के मौके पर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हमले और हिन्दू नेताओं की टारगेट किलिंग की तैयारी कर रहे खालिस्तान गदर फोर्स के आतंकी शबनम दीप सिंह को गिरफ्तार किया है। वह आईएसआई के लिए भी काम कर रहा था। यानी, राजनीतिक दल ही नहीं आतंकी संगठन भी चुनावी तैयारी में जुटे हैं।

मिशन-2019 निशाने पर है

मिशन-2019 निशाने पर है, जिसे लेकर पहले ही इनपुट जारी हो चुका है। सीमा पर गतिविधियों में तेजी लाने के साथ ही चुनावी दिनों में आतंकी संगठनों द्वारा यहां माहौल बिगाड़ने का प्रयास किए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वे जातीय संघर्ष, सांप्रदायिकता विद्वेष बढ़ाने की घटनाओं को अंजाम देने की बड़ी साजिश रच सकते हैं। इन हालात में सीमा पर कड़ी चौकसी के साथ ही घरेलू मोर्चे पर आंतरिक सुरक्षा की दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन करना, कड़ी चुनौती साबित हो सकती है। इसके लिए गृह मंत्रालय के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को कमर कसना होगा।

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