बड़े भाई का फर्ज अदा करे पंजाब, हरियाणा को मिले उसके हिस्से का पानी : दुग्गल

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Punjab, Haryana should get their share of water due to elder brother's duty Duggal

सांसद सुनीता दुग्गल ने ट्वीट कर जताई उम्मीद, सौहार्दपूर्ण माहौल में निकलेगा साकारत्मक समाधान

  • सांसद ने लोकसभा में अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान उठाया था एसवाईएल का मुद्दा
सिरसा। सिरसा की सांसद श्रीमती सुनीता दुग्गल ने सतलुज-यमुना लिंक नहर(एसवाईएस) को लेकर होने जा रही उच्च स्तरीय बैठक के साकारत्मक परिणाम मिलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र की कई चिरलम्बित समस्याओं का समाधान निकला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने नदी विवादों के निपटारे के लिए जल शक्ति मंत्रालय का पुनर्गठन करवाया। उनकी सोच है कि एसवाईएल जैसे राज्यों के बीच के जल विवादों का निपटारा सौहार्दपूर्ण माहौल में हो। अपने ट्वीट में सांसद दुग्गल ने कहा कि इस मसले पर आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंद्र सिंह करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा का बड़ा भाई है और वो सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का सम्मान करते हुए हरियाणा को उसके हिस्से का पानी देने का काम करेगा। सांसद ने कहा कि पिछले वर्ष लोकसभा में माननीय स्पीकर ओम बिरला जी के समक्ष शून्य काल में उन्होंने एसवाईएल का मुद्दा उठाया था। लोकसभा में अंतरर्राजयीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए जल शक्ति मंत्रालय से मध्यस्ता कर मामले का निपटारा करवाने की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आज का दिन महत्वपूर्ण है और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों व जल शक्ति मंत्री की बैठक हरित प्रदेश हरियाणा के किसानों को उनके हिस्से का पानी दिलवाने का काम करेगी। सांसद दुग्गल ने कहा कि केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र की कई प्रमुख समस्याओं को सुलझाने का काम किया है। हरियाणा के बनने के बाद 1966 से यह विवाद चल रहा है। अब इसका निपटारा होगा। गौरतलब है कि सांसद श्रीमती सुनीता दुग्गल ने पिछले वर्ष विशेष रूप से एसवाईएल को पुरजोर ढंग से उठाया था। सांसद दुग्गल ने पर्वत, नदियां, पवन के झोंके कोई सरहद इन्हें ना रोके गीत के बोलों के साथ अपनी बात रखते हुए पंजाब से हठधर्मिता छोडऩे की अपील की थी। जलशक्ति मंत्रालय से हस्तक्षेप का आह्वान किया था ताकि हरियाणा को उसका हक मिल सके।

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