दिखावा नहीं, सच्ची भावना से करें प्रभु भक्ति: पूज्य गुरु जी

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Spirituality
सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को जो इन्सान देखना चाहे, उससे बात करना चाहे, तो उसे जंगल, पहाड़ों, उजाड़ों में जाने की जरूरत नहीं, कोई कपड़े बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि जिस धर्म, मजहब में आप रहते हैं, उसको मानो। दिखावा मत करो। क्योंकि धर्मों में सुबह-शाम भक्ति करने का नियम है और ठगी, बेइमानी, भ्रष्टाचार करने, किसी का दिल दुखाने से, बेहद स्वार्थ में डूब जाने से रोका गया है। हर तरह के नशे, हर तरह की तकरार से निंदा-चुगली करने से रोका गया है। इसलिए अगर आप अपने-अपने धर्म को मानते हुए सच्ची भावना, श्रद्धा से मालिक का नाम जपते हैं, उसकी भक्ति करते हैं, तो हम गारंटी देते हैं कि वो आपको आपके अंदर से नजारे जरूर दिखाएगा। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक हर जगह है। जो इन्सान उसे सच्ची भावना, तड़प से पुकारता है, तो वो उसे जरूर नजर आता है, लेकिन उसके लिए आपको समय देना पड़ेगा।
आप डिग्री, डिप्लोमा करते हैं, उसके लिए जिंदगी के 20-25 साल लगा देते हैं, तो क्या भगवान के लिए 20-25 महीने नहीं लगाने चाहिए? क्या उसके लिए थोड़ा समय नहीं देना चाहिए? क्या भगवान को पाने के लिए रिसर्च किया है? क्या आपने भगवान को पाने के लिए टाईम लगाया है? अगर टाईम नहीं लगाया, तो आप कैसे कह सकते हैं कि भगवान नहीं है। जिस प्रकार बच्चे जितनी लगन से पढ़ते हैं, उसी के अनुसार फर्स्ट डिवीजन, कोई मैरिट हासिल करता है। उसी प्रकार भगवान के लिए इतनी लगन होनी चाहिए। आपके अंदर ईश्वर के लिए तड़प, लगन, व्याकुलता होगी और आप एक घंटा सुबह-शाम मालिक की याद में लगाकर देखो, यकीनन आपके अंदर बदलाव आएगा, आपके दिलो-दिमाग में सुकून आएगा और मालिक की झलक नजर आने लग जाएगी।
आप जी ने फरमाया कि आप कितना भी पढ़ लेते हैं, कितने भी समझदार बन जाते हैं, लेकिन हर काम के लिए समय लगाना जरूरी है। समझ उम्र के साथ, तजुर्बे के साथ और सीखने से आती है। एकदम से किसी को समझ नहीं आया करती। जन्म से बच्चा लगभग नासमझ होता है। फिर जैसे-जैसे बड़ा होता है, तो मां जो पहला गुरु होती है, उसकी शिक्षा पे चलता है, उसके साये में रहता है तो वो समझदार बनता चला जाता है। उसी तरह फकीर एक टीचर होते हैं। वो जीवों को समझाते हैं और वो अपनी वाह-वाह नहीं बल्कि भगवान की वाह-वाह करते हैं कि सब-कुछ करने वाला वो ही है, हम तो कुछ भी नहीं। फकीर तो चौकीदार की तरह होता है, जो दिन में भी आवाज देता रहता है कि भाई जाग जाओ, होशियार हो जाओ।

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