भावी पीढ़ी को मिले समृद्ध व ईमानदार भारत

Self Respect of Country

पूर्व प्रधानमंत्री व मदन मोहन मालवीय की जयंती पर देश में सुशासन दिवस मनाया गया है, लेकिन सुशासन है नहीं यहां सिर्फ एक अपराध चोरी पर ही नजर डाल लेते हैं। पूरे देश में चोर हर वर्ष करीब दस हजार करोड़ रूपये की मूल्यवान वस्तुएं जिनमें ज्वैलरी, नगदी, इलेक्ट्रोनिक आॅटो मोबाइल, पालतु जानवर, फसल, धातु आदि शामिल हैं, पर हाथ साफ कर जाते हैं। हर दिन देश में कई सौ घटनाएं चोरी की दर्ज की जाती हैं। उत्तरी भारत में सर्दी के दिनों में एवं दक्षिण भारत में त्यौहार व शादी के दिनों में चोरी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। पुलिस भी चोरी की घटनाओं को सामान्य अपराध की तरह दर्ज कर इसकी छानबीन करती है, जबकि चोरी एक गंभीर सामाजिक अपराध है। अनेक लोगों का चोरी पुश्तैनी धंधा बन जाती है, उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि समाज उन्हें कैसे देखता है या पुलिस केस होगा तो वह जेल चले जाएंगे।

देश में जिस तरह से अमीरी-गरीबी का फासला बढ़ रहा है एवं बेरोजगारी बढ़ रही है तब से पढ़े-लिखे लोगों में भी चोरी की लत बढ़ रही है। आज बैंक एटीएम तोड़ लेना, दुकानों, बाजारों में सेंध लगाना आम हो रहा है। चोरी से यहां समाज में आर्थिक नुक्सान होता है वहीं लोगों का मनोबल भी गिरता है कि उनकी खून पसीने की कमाई को कोई पलभर में ले उड़ा जिससे लोगों में अवसाद बढ़ता है। पुलिस हालांकि चोरी की घटनाओं की छानबीन करती है लेकिन चोरी हुई संपत्ति का वह भी 15-20 प्रतिशत ही रिकवर कर पाती है। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 से 2017 तक चोरी की कुल घटनाओं में 87 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, चोरों द्वारा चुराई गई संपत्ति की कीमत में 229 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि हुई है। स्पष्ट है हर साल यहां चोरी की घटनाएं बढ़ रहीं हैं, वहीं उन द्वारा चुराई जा रही संपत्ति उससे भी कहीं ज्यादा गुणा कीमत की जा रही है।

औसतन देश में हर वर्ष चोरी के करीब छ: लाख मामले दर्ज होते हैं। देश के महानगर दिल्ली, मुंबई, बेगलुरू, हैदराबाद, चैन्नई, कोलकाता चोरों के सबसे पसंदीदा स्थल हैं। सूचना तकनीक के इस दौर में सुरक्षात्मक उपाय बढ़े हैं जिनमें कैमरे, तकनीकी ताले, सायरन, सूचना संदेश आदि चोरी से बचाते हैं फिर भी प्रतिवर्ष चोरी की घटनाएं व नुक्सान बढ़ रहा है। भारत में सम्राट अशोक व हर्ष, शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह का शासन काल ऐसा रहा है कि कई साल तक चोरी की कोई भी घटना नहीं घटती थी। आज भी यूरोप व एशिया के कई देश जिनमें फिनलैंड, नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, सिंगापुर, जापान एक उदाहरण के तौर पर मौजूद हैं यहां भ्रष्टाचार व चोरी जैसे अपराध नामात्र हैं। वर्तमान समय में शिक्षा प्रणाली का दोष कहें या शासन व्यवस्था की नाकामी की चोरी को जैसे अपराध ही नहीं समझा जा रहा।

चोरी के अलावा ठगी, डकैती, भ्रष्टाचार व नशा तस्करी से देश का कितना नुक्सान हो रहा है, ये आंकलन से भी बाहर हो रहा है। अत: शिक्षा को संस्कारों एवं नैतिकता से पूर्ण बनाना होगा। अब जबकि शिक्षा व्यवस्था सिर्फ नौकरी व धनोपार्जन का जरिया ही समझी जा रही है। शासन व प्रशासन में ईमानदार लोगों को कठोर बनना होगा ताकि भ्रष्ट, बेईमान, अपराधी प्रवृत्ति के जनप्रतिनिधियों, भ्रष्ट अधिकारियों, निकम्मे कर्मचारियों को शासन-प्रशासन से बाहर किया जा सके। वर्तमान पीढ़ी व शासन-प्रशासन पर यह भी जिम्मेवारी है कि वह भावी पीढ़ी को समृद्ध भारत के साथ-साथ ईमानदार भारत सौंपने का प्रयत्न करे।

 

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