नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी

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  • सख्ती। प्राइवेट स्कूलों को नियमों के दायरे में लाने की तैयारी, 31 दिसंबर तक मांगा फीस वृद्धि का ब्यौरा
  • अस्थाई स्कूलों की मान्यता पर फैसला अगले शैक्षणिक सत्र से पहले
  • नियम 134 के तहत एडमिशन की तारीख जनवरी के पहले सप्ताह में

ChandiGarh, Anil Kakkar: प्रदेश में स्थापित सभी प्राइवेट स्कूलों को नियमों के दायरे में लाने तथा शिक्षा नीति में आए विभिन्न लूप होल्स को भरने के मद्देनजर प्रदेश का स्कूली शिक्षा विभाग नए कदम उठाने जा रहा है। प्राइवेट स्कूलों की फीसों को लेकर मनमानी, नियम-134 के एडमिशन देने में आनाकानी के साथ-साथ मान्यता प्राप्त करने के लिए विभिन्न जोड़-तोड़ अब नहीं चल पाएंगे। शिक्षा विभाग ने गत वर्ष हुई गलतियों से सबक लेकर सावधानी से नए नियम बना कर उनका ऐलान कर दिया है। इस संबंध में हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के. दास ने बताया कि हर वर्ष फीसों में वृद्धि को लेकर मिलने वाली शिकायतों को दूर करने के लिए विभाग ने कदम उठाया है जिसके तहत हरियाणा स्कूल ऐजुकेशन के नियम 158 और 158-ए के तहत प्राइवेट स्कूलों को फार्म-6 में प्रस्तावित बढ़ाई जाने वाली फीस के संबंध में 31 दिसंबर, 2016 तक शिक्षा विभाग को भरकर देना होगा। वहीं अभिभावकों में मान्यता प्राप्त तथा गैर मान्यता वाले स्कूलों के फैले भ्रम को दूर करने के लिए सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिले में अस्थाई मान्यता के बिना जितने भी स्कूल संचालित हैं उनका निरीक्षण करके तुरंत उनकी रिपोर्ट बनाकर भेजें और अगले शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से पहले इनकी मान्यता के संबंध में फैसला कर दिया जाएगा। इसी के साथ गत वर्ष नियम 134 के तहत इलीजिबल विद्यार्थियों को एडमिशन न मिलने की ढेर सारी शिकायतें सरकार के पास आई। इस दफे ऐसा न हो इसलिए सरकार ने इस पर भी नियम तैयार किया है जिसके तहत मेधावी छात्रों के निजी स्कूल में दाखिले के लिए नियम 134 के तहत लिए जाने वाले टेस्ट की तिथि जनवरी के पहले सप्ताह में घोषित कर दी जाएगी।

अभिभावकों की बार-बार की शिकायतों के चलते उठाया कदम
बता दें कि प्रदेश में गत वर्षांे में बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों के आ जाने से जहां शिक्षा के स्तर में वृद्धि हुई है वहीं अभिभावकों द्वारा सरकारी की बजाय प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों का पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बहुत कोशिशों के बावजूद भी सरकारी स्कूल अभी तक वह इमेज नहीं बना सके हैं जो कुछ ही वर्ष पूर्व शुरू हुए प्राइवेट स्कूलों ने बना ली। लेकिन इसी बीच शिक्षा के व्यवसायीकरण का दायरा इतना बढ़ा कि अभिभावकों की प्रताड़ना शुरू हो गई। प्राइवेट स्कूलों की मनमानियों से तंग-परेशान अभिभावकों ने फिर सरकार दरबार अर्जियां लगानी शुरू की। अभिभावकों द्वारा पेश की गई अर्जियों पर गंभीरता दिखाते हुए सरकार प्रदेश सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

शर्तें पूरी नहीं तो किसी कीमत पर मान्यता नहीं
अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने बताया कि हरियाणा एजुकेशन एक्ट और नियम के अनुसार बिना स्वीकृति के स्कूल नहीं चलना चाहिए, लेकिन इस संबंध में कुछ स्कूलों ने स्वीकृति के लिए अप्लाई किया है और ऐसे स्कूलों को साल दर साल अस्थाई मान्यता दी जा रही है लेकिन अब निर्णय लिया गया है कि अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू होने से पहले इनकी मान्यता के संबंध में फैसला कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूल जिनकी आवेदन लंबित है उनका भी मेरिट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा ताकि ऐसे स्कूलों के प्रबंधन और पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों को किसी प्रकार की शंका न रहे कि उन्हें मान्यता मिलेगी या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल शर्तों को पूरा नहीं करता है तो किसी भी स्थिति में उसको मान्यता नहीं दी जाएगी।

नियम 134 के तहत किसी भी स्कूल में ले सकेगा दाखिला
दास ने कहा कि नियम 134 के तहत यदि कोई मेधावी छात्र सरकारी स्कूल या प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है। वो किसी भी प्राइवेट स्कूल में दाखिला ले सकता है और उसको कोई फीस नहीं देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जो सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं करवाई गई उसके आधार पर मेधावी छात्रों की सूची बनाई गई तथा प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे बच्चों का दो बार टेस्ट लिया गया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इस माध्यम से ऐसे 40 हजार बच्चों का दाखिला हुआ। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि सरकार के नियम 134 के तहत निजी स्कूल दाखिला देने के