अनमोल वचन : बुराइयों से रोकते हैं धर्म

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Precious words Religions prevent evils
सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को अपनी हैसियत को हमेशा याद रखना चाहिए। किसी जीव को मारना, तड़पाना राक्षसों का काम है मनुष्य का नहीं। झूठ न बोलना, ठगी, बेइमानी न करना, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी न करना और कभी भी किसी का बुरा न सोचना, न करना, निंदा-चुगली नहीं करनी चाहिए। ये सब हमारे धर्मों में लिखा हुआ है, लेकिन आज आदमी यही सब करता है। इन्सान को ऐसा नहीं करना चाहिए।  पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को सच के रास्ते पर अडोल चलना चाहिए। अगर इन्सान सच के रास्ते पर चलेगा, मालिक की भक्ति-इबादत करेगा तो उसे वो नजारे मिलेंगे जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
सच के रास्ते पर चलते हुए इन्सान को डरना नहीं चाहिए, लेकिन इन्सान पहले अपनी जान बचाता है फिर मालिक के बारे में सोचता है। इन्सान पर अगर इस तरह का कोई कर्म आ जाता है तो पता नहीं कितना बड़ा पहाड़ जैसा कर्म कंकर में बदल जाता है, क्योंकि वह परमपिता परमात्मा किसी का अहसान नहीं लेता। कोई उसके रास्ते पर चलता है तो मालिक उसे अंदर-बाहर से दया-मेहर, रहमत से उसके खजाने भर देता है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान निंदा-चुगली करता है, लेकिन इन्सान को सिर्फ अपने तक सीमित रहना चाहिए। अगर आप सही हैं तो बढ़िया है, मालिक अपने आप रहमत करेगा, लेकिन दूसरों को देखकर आप दुखी होते हैं तो खुशियां कैसे मिलेंगी? इसलिए इन्सान को अपने अवगुण देखने चाहिए, किसी दूसरे के नहीं।
आप जी ने आगे फरमाया कि जो इन्सान जैसा करता है वह वैसा ही भोगता है। समय बढ़ सकता है लेकिन यह नहीं हो सकता है कि आदमी बुराइयां करे और उसे तगमा नहीं मिले। परमात्मा की तरफ से नहीं मिलता लेकिन यह बात अलग है कि आज दुनिया में बुराई करने वाले कहां-कहां तक पहुंचे हुए हैं। भाई गुरदास जी की वाणी पढ़ लो, उसमें सब कुछ पता चल जाएगा। बहुत से ऐसे लोगे बैठे होते हैं जो यही देखते हैं कि गुरु जी, किसके बारे में बोलते हैं और वो अपनी नौकरी, पैसे के लिए ऐसी-ऐसी बातें करते हैं। उन्हें इन्सानियत से कोई मतलब नहीं होता। इसलिए आप खुद वो वाणी पढ़ कर देख लो। हु-ब-हू आज का नक्शा उन्होंने अपनी वाणी में लिखा हुआ है।  आप जी फरमाते हैं कि आज ऐसा समय आ चुका है कि आदमी नहीं बल्कि मायारानी बोलती है। लोग झूठ, कूफर बोलते हैं लेकिन सच कभी नहीं डोलता। झूठ, कूफर चाहे काले बादलों की तरह कितने भी आ जाएं, लेकिन सच सूरज है, था और हमेशा रहेगा। बादलों का कुछ पता नहीं होता कि कब आएं और कब चले जाएं। परमपिता परमात्मा अडोल सच है, उसके साथ नाता जोड़ कर रखो।

 

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