ट्रांसफर अब बंद हैं, मुख्यमंत्री ही कुछ कर सकते हैं, अब हमारे बस में नहीं…

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Transfer

परेशानी। विधायकों से लेकर आमजन तक रोजाना लगा रहे मंत्रियों के दरबार में चक्कर

  • 15 दिसंबर के बाद से मंत्रियों से छिनी ट्रांसफर की पावर

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार बनते ही सबसे पहले मंत्रियों को तबादलों (Transfer) की पावर दी थी, लेकिन उसकी समय सीमा 15 दिन रखी। 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक जनता को मंत्री, विधायक जहां भी मिले उन्होंने अपना, अपने रिश्तेदार का तबादला करवाने का कागज थमा दिया। यहां तक कि लगातार 15 दिन मुख्य सचिवालय में हजारों तबादलों की अर्जियां मंत्री कबूलते रहे। उनका ज्यादातर समय प्रशासनिक कार्यांे में न लग कर, तबादलों की अर्जियां पकड़ने में ही रहा।

लेकिन अब वह समय सीमा समाप्त हो गई है। लेकिन विधायकों, भाजपा नेताओं व आम लोगों का लगातार मंत्रियों के दरवाजे पर तबादलों की अर्जियां लेकर आना जारी है। ऐसे में मंत्री यही कह रहे हैं कि अब उनकी ट्रांसफर करने की पावर समाप्त हो गई है अब मुख्यमंत्री ही ट्रांसफर कर सकते हैं। ऐसे में कुछेक लोग निराश लौट रहे हैं। वहीं कुछेक फिर भी कागज थमा रहे हैं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के पास ट्रांसफर एप्लीकेशन लगातार अभी भी आ रहे हैं। ऐसे में शायद सरकार मंत्रियों की ट्रांसफर पावर कुछेक दिनों के लिए और भी बढ़ा सकती है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

भाजपा ही नहीं अन्य पार्टियों के विधायक भी लगा रहे गुहार

चंडीगढ़ मुख्य सचिवालय में आजकल हर मंत्री के पास प्रदेश के विधायक, चाहे वे भाजपा से हों या अन्य पार्टियों से, वे अपने इलाके के लोगों की ट्रांसफर एप्लीकेशन लेकर लगातार पहुंच रहे हैं। वहीं मंगलवार को प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज के पास एक कांग्रेसी विधायक, जिन्होंने हाल ही के विधानसभा चुनाव में भाजपा के फायर ब्रांड नेता और मंत्री को हराया, वे पहुंचे।

विज ने उनका स्वागत किया और आने का कारण पूछा तो विधायक ने बगल में दबाई एक फाइल निकाल कर विज के सामने रख दी और कहा कि ये कुछ ट्रांसफर हैं, आप इन्हें करवाएं। विज ने जवाब दिया कि अभी तो ट्रांसफर बंद हैं। ऐसे में विधायक ने कहा कि सुना है कि पावर एक्सटैंड की जा रही हैं, तो विज ने जवाब दिया कि यदि एक्सटैंड हो गई तो आपका काम जरूर करेंगे, इतना कह कर फाइल विज ने अपने पास रख ली। इसी तरह हर मंत्री के पास विभिन्न नेताओं, विधायकों द्वारा फाइलें लगातार पहुंचाई जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार ट्रांसफर पॉवर आगे एक्सटैंड करती है या अब ट्रांसफर सच में मुख्यमंत्री ही करेंगे।

भ्रष्टाचार से भी नहीं किया जा सकता इंकार

वहीं कुछ वरिष्ठ मीडियाकर्मियों का मानना है कि ट्रांसफर की आड़ में भ्रष्टाचार होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि ट्रांसफर करवाने वाले कर्मचारी, अधिकारियों में ज्यादातर सीधे मुख्य सचिवालय नहीं पहुंचते, वे किसी नेता या विधायक के द्वारा ही अपना कागज भेजते हैं। ऐसे में कहीं-न-कहीं भ्रष्टाचार हो सकता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि मनोहर सरकार पार्ट-1 के शासनकाल के समय मंत्रियों के दरवाजे पर साफ लिखा गया था कि यहां ट्रांसफर के लिए न आएं या ट्रांसफर की फाइल यहां नहीं ली जाएगी।

उस समय सरकार ने ट्रांसफर आॅनलाइन कर दिए थे और अपनी पसंद के शहरों को चुनने की आजादी दी थी। सरकार इसे भ्रष्टाचार को रोकने की कवायद का एक हिस्सा मान रही थी। लेकिन विधानसभा चुनावों में जिस तरीके से जनता ने भाजपा को बहुमत नहीं दिया, उससे सरकार को समझ आ गया है कि लोगों के काम पुराने ढर्रे के तरीके से ही करने होंगे। ऐसे में आगे कौन-कौन सी योजनाएं आॅनलाइन से आफलाइन आती हैं, यह भी देखने वाली बात होगी।

 

 

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