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प्रदूषण से सांस लेना भी हो गया है दुर्लभ

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दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गुड़गांव टॉप पर है। आईक्यू एयरविजुअल और ग्रीनपीस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वहीं दुनिया के टॉप-10 प्रदूषित शहरों में भारत के 7 शहर हैं। चीन के 5, पाक के दो और एक बांग्लादेश का शहर है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक- प्रदूषण के चलते भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.5: का नुकसान हुआ। प्रदूषण का आकलन पीएम 2.5 कणों के आधार पर किया गया है। पीएम 2.5 कण अत्यंत महीन होते हैं और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।

ग्रीनपीस के मुताबिक, प्रदूण का खासा दुष्प्रभाव पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण एवं मानवाधिकारों के जानकार की एक रिपोर्ट के अनुसार घर के अंदर और बाहर होने वाले वायु प्रदूषण के कारण हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है जिनमें छह लाख बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ डेविड बोयड ने कहा कि करीब छह अरब लोग नियमित रूप से इतनी प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं कि इससे उनका जीवन और स्वास्थ्य जोखिम में घिरा रहता है। पर्यावरण एवं मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक ने सोमवार को मानवाधिकार परिषद से कहा, इसके बावजूद इस महामारी पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है क्योंकि ये मौतें अन्य आपदाओं या महामारियों से होने वाली मौतों की तरह नाटकीय नहीं हैं।

पर्यावरण प्रदूषण एक विश्वव्यापी समस्या है। पेड़-पौधे, मानव, पशु-पक्षी सभी उसकी चपेट में है। कल कारखानों से निकलने वाला उत्सर्जन, पेड़ पौधों की कटाई, वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण ने मानव जीवन के समक्ष संकट खड़ा कर दिया है। लैंसेट जर्नल नामक एक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पर्यावरण प्रदूषण से मानव जीवन को होने वाली हानि की जानकारी दी गई है। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रदूषण से होने वाले भयावह खतरे और अकाल मौतों से अवगत कराया गया है।

प्रदूषण से होने वाली मौतों में भारत सबसे टॉप पर हैै। रिपोर्ट के अनुसार भारत में वायु, जल, ध्वनि और दूसरे तरह के प्रदूषणों की वजह से दुनिया में सबसे ज्यादा मौत हुईं। प्रदूषण की वजह से उस साल देश में 25 लाख लोगों की जान गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि इनमें से अधिकतर मौतें प्रदूषण की वजह से होने वाली दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, फेफड़ों के कैंसर और सांस की गंभीर बीमारी सीओपीडी जैसी गैर संचारी बीमारियों की वजह से हुईं। प्रदूषण की वजह से दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब 90 लाख लोगों की मौत होती है जो कुल मौतों का छठा हिस्सा है। अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण इसका सबसे बड़ा कारक है जिसकी वजह से 2017 में दुनिया में 70 लाख लोगों की मौत हुई जबकि जल प्रदूषण (18 लाख मौत) और कार्यस्थल से जुड़ा प्रदूषण (8 लाख मौत) अगले बड़े जोखिम हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में हवा मानक स्तर से ज्यादा है। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 हमारे देश के हैं। भारत में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण दिल्ली में है। मानव जीवन के लिये पर्यावरण का अनुकूल और संतुलित होना बहुत जरूरी है। पर्यावरण के प्रदूषित होने से हमारे स्वस्थ जीवन में कांटे पैदा हो गए है। विभिन्न असाध्य बीमारियों ने हमें असमय अंधे कुए की ओर धकेल दिया है जिसमें गिरना तो आसान है मगर निकलना भारी मुश्किल। यदि हमने अभी से पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाला मानव जीवन अंधकारमय हो जायेगा। यह प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने आस-पड़ौस के पर्यावरण को साफ सुथरा रखकर पर्यावरण को संरक्षित करे तभी हमारे सुखमय जीवन को सुरक्षित और संरक्षित रखा जा सकता है।

बाल मुकंद ओझा

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